नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में जारी Iran Israel War India Stance ने वैश्विक स्तर पर जो तनाव पैदा किया है, उस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राज्यसभा में भारत का रुख बेहद स्पष्ट और मजबूती के साथ रखा। संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के दौरान PM Modi ने न केवल युद्ध के वैश्विक दुष्परिणामों पर चिंता जताई, बल्कि यह भी साफ कर दिया कि भारत शांति, संवाद और आत्मनिर्भरता के मंत्र के साथ इस संकट का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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बातचीत और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में वैश्विक शांति पर जोर देते हुए कहा कि भारत ने हमेशा से ही युद्ध के बजाय संवाद को प्राथमिकता दी है। उन्होंने सदन को जानकारी दी कि भारत इस गंभीर हालात में मूकदर्शक नहीं बना है, बल्कि लगातार ईरान, अमेरिका और इजरायल (Iran Israel War) जैसे देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ संपर्क में है। पीएम ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि यह संघर्ष और लंबा खिंचता है, तो इसके परिणाम पूरी दुनिया के लिए विनाशकारी हो सकते हैं। भारत की कोशिश है कि कूटनीतिक रास्तों से इस तनाव को कम किया जाए।

होर्मुज स्ट्रेट का संकट और तेल की कीमतों पर असर – Iran Israel War India Stance
पिछले तीन हफ्तों से जारी इस जंग ने वैश्विक ऊर्जा बाजार (Energy Market) की नींव हिला दी है। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ते तनाव का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस समुद्री मार्ग से होने वाली तेल आपूर्ति बाधित होने के कारण भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है। पीएम ने स्वीकार किया कि इस स्थिति को सामान्य होने में अभी वक्त लगेगा और इसके गंभीर आर्थिक परिणाम भारत को भी भुगतने पड़ सकते हैं।

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संकट काल में ‘आत्मनिर्भर भारत’ ही असली ढाल
वैश्विक संकटों के बीच प्रधानमंत्री ने ‘आत्मनिर्भरता’ को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि विदेशी निर्भरता कम करने के लिए भारत अब शिपबिल्डिंग से लेकर रेयर अर्थ मिनरल्स (दुर्लभ खनिज) जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में तेजी से काम कर रहा है। पीएम के अनुसार, यह रणनीति न केवल वर्तमान संकट से निपटने में मददगार होगी, बल्कि भविष्य में आने वाली ऐसी किसी भी वैश्विक चुनौती से भारत को सुरक्षित रखेगी।

खाड़ी में फंसे भारतीयों की सुरक्षा सर्वोपरि
प्रधानमंत्री ने देश को आश्वस्त किया कि खाड़ी देशों में रहने वाले करीब एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा सरकार की पहली प्राथमिकता है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे जहाजों पर तैनात भारतीय क्रू मेंबर्स का भी जिक्र किया और कहा कि सरकार उनकी हर हलचल पर पैनी नजर रख रही है। विदेश मंत्रालय और संबंधित एजेंसियां लगातार स्थिति की समीक्षा कर रही हैं ताकि संकट की स्थिति में भारतीयों को सुरक्षित निकाला जा सके।
