हापुड़। दिवाली के बाद हापुड़ में वायु प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ गया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा एनसीआर में दिवाली पर ग्रीन पटाखे छोड़ने का आदेश जारी किया गया था, लेकिन हापुड़ के नागरिकों ने इसे नजरअंदाज कर जमकर पटाखे फोड़ते रहे। इस वजह से पूरे शहर में धुआँ फैल गया और हवा में स्मॉग छा गया।
मंगलवार सुबह शहर की सड़कों पर मॉर्निंग वॉक पर निकले लोग धुएँ के कारण परेशान दिखाई दिए। आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याओं की शिकायतें सामने आईं। स्थानीय अस्पतालों में भी मरीजों की संख्या में इजाफा देखा गया, खासकर उन लोगों में जो पहले से श्वसन रोगों से पीड़ित थे।
हापुड़ शहर में प्रदूषण के स्तर को मापने वाले सेंसरों के अनुसार दिवाली के अगले दिन पीएम 2.5 और पीएम 10 कणों की मात्रा सामान्य स्तर से कई गुना अधिक पाई गई। विशेषज्ञों का कहना है कि पटाखों से निकलने वाला धुआँ हवा में फैलकर स्मॉग का कारण बनता है और लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं।
स्थानीय प्रशासन ने दिवाली से पहले ही ग्रीन पटाखे छोड़ने का आदेश दिया था और लोगों से अपील की थी कि वे धुएँ फैलाने वाले पटाखों का इस्तेमाल न करें। इसके बावजूद, कई इलाकों में लोग परंपरागत पटाखों का प्रयोग करते रहे। पुलिस और स्थानीय निकाय की टीमों ने कुछ इलाकों में निगरानी की, लेकिन पर्याप्त नियंत्रण नहीं हो सका।
शहर के विभिन्न हिस्सों में प्रदूषण का असर अलग-अलग देखा गया। मुख्य बाजार, प्रमुख चौक और residential कॉलोनियों में धुएँ का स्तर सबसे अधिक रहा। लोगों ने बताया कि सुबह-सुबह बाहर निकलना मुश्किल हो गया है, विशेषकर बुजुर्ग और छोटे बच्चे। कई लोग मास्क पहनकर ही घर से बाहर आए।
हापुड़ में इस बार दिवाली का उत्सव पहले की तरह धूमधाम से मनाया गया, लेकिन इसके बाद प्रदूषण का यह उच्च स्तर शहरवासियों के लिए चिंता का विषय बन गया। स्थानीय नागरिकों ने सोशल मीडिया पर भी प्रदूषण की तस्वीरें और वीडियो साझा किए, जिसमें धुएँ से ढके शहर की स्थिति साफ दिखाई दे रही थी।
स्वास्थ्य विभाग ने शहरवासियों से आग्रह किया है कि वे धुएँ से बचने के लिए आवश्यक सावधानी बरतें। जिन लोगों को सांस लेने में कठिनाई हो रही है, उन्हें डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
इस प्रकार, हापुड़ में दिवाली के तुरंत बाद बढ़े प्रदूषण ने स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जिंदगी पर प्रतिकूल असर डाला है। सरकारी आदेशों की अवहेलना के कारण शहर में प्रदूषण का स्तर सामान्य से कहीं अधिक बढ़ गया है और लोगों को इसके दुष्प्रभाव का सामना करना पड़ा।







