Ayodhya: चैत्र शुक्ल पूर्णिमा के अवसर पर दक्षिण भारत की परंपरा के अनुसार मनाई जाने वाली हनुमान जयंती इस बार राम मंदिर में विशेष रूप से आयोजित की जाएगी। उत्तर और दक्षिण भारत की परंपराओं के समन्वय के तहत 2 अप्रैल को यह पर्व भव्य रूप में मनाया जाएगा।
सुबह से शुरू होंगे धार्मिक अनुष्ठान
हनुमान जयंती के अवसर पर राम मंदिर में प्रातः काल से ही धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हो जाएगी। सुबह विशेष पूजा और अनुष्ठान किए जाएंगे, जबकि मध्याह्न में राजभोग आरती के साथ प्राकट्य आरती उतारी जाएगी। प्राकट्य आरती से लगभग एक घंटा पहले भगवान का पंचामृत से अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद उन्हें नवीन वस्त्र धारण कराए जाएंगे और भव्य श्रृंगार किया जाएगा।
श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की व्यवस्था
इस विशेष अवसर पर मंदिर परिसर के परकोटे की दक्षिणी भुजा में स्थित हनुमान जी मंदिर के पट पूरे दिन श्रद्धालुओं के लिए खुले रहेंगे, जिससे वे दर्शन कर सकें। हालांकि सामान्य दिनों की तरह परकोटे के अन्य मंदिरों में आम भक्तों के लिए दर्शन की व्यवस्था सीमित ही रहेगी।
ध्वजारोहण समारोह में शामिल होंगे प्रमुख अतिथि
हनुमान जयंती के उपलक्ष्य में मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण समारोह भी आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में बजरंग दल के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सांसद विनय कटियार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। वहीं विशिष्ट अतिथियों में मध्यप्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त वित्त आयोग के चेयरमैन और बजरंग दल के पूर्व अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया, विहिप के संयुक्त मंत्री सुरेंद्र जैन और संगठन मंत्री प्रकाश शर्मा भी उपस्थित रहेंगे। वहीं राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा ने बताया कि 2 अप्रैल को सुबह 11 बजे 300 लोगों की उपस्थिति में ध्वजारोहण किया जाएगा।
ट्रस्ट ने जारी किए निर्देश
इस समारोह में बजरंग दल के पूर्व और वर्तमान पदाधिकारियों के साथ-साथ रामनगरी के 50 प्रमुख संतों और अयोध्या-फैजाबाद के नागरिकों को भी आमंत्रित किया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से सभी आमंत्रित अतिथियों को निमंत्रण पत्र भेजे जा रहे हैं और उन्हें मोबाइल फोन के माध्यम से भी सूचना दी जा रही है।
ट्रस्ट द्वारा जारी निर्देश के अनुसार सभी अतिथियों को पूर्वाह्न 10 बजे तक रामकोट स्थित तीर्थ क्षेत्र के आवासीय कार्यालय पहुंचना होगा। यहां से उन्हें राम मंदिर के उत्तरी प्रवेश द्वार से प्रवेश दिया जाएगा, जिसे आद्य गुरु रामानुजाचार्य प्रवेशद्वार नाम दिया गया है।
अयोध्या में आयोजित यह भव्य कार्यक्रम न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक होगा, बल्कि उत्तर और दक्षिण भारत की परंपराओं के समन्वय का एक महत्वपूर्ण उदाहरण भी बनेगा।
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