गोरखपुर को मिलेगी नई पहचान, मार्च 2026 तक तैयार होगा उत्तर प्रदेश का दूसरा ज्ञान-विज्ञान पार्क

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर गोरखपुर एक नई दिशा में कदम बढ़ा रहा है। वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला परिसर में बन रहा ‘महंत अवेद्यनाथ ज्ञान-विज्ञान पार्क’ मार्च 2026 तक पूरी तरह तैयार हो जाएगा। यह प्रदेश का दूसरा और पूर्वांचल का पहला विज्ञान पार्क होगा, जो न केवल विद्यार्थियों बल्कि आम नागरिकों में भी विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रति नई सोच विकसित करेगा। लगभग 15.89 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह पार्क बच्चों के लिए विज्ञान को खेल-खेल में समझने का अवसर प्रदान करेगा। इसी परिसर में 46.88 करोड़ रुपये की लागत से नक्षत्रशाला का आधुनिकीकरण भी किया जा रहा है, जिससे यह स्थान अब केवल तारों को देखने का केंद्र नहीं, बल्कि शिक्षा और अनुसंधान का आधुनिक केंद्र बनकर उभरेगा।

आधुनिक तकनीक से सजेगा गोरखपुर का नक्षत्रलोक

उत्तर प्रदेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अनिल कुमार ने बुधवार को नक्षत्रशाला और निर्माणाधीन विज्ञान पार्क का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि निर्माण कार्य गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ पूरा किया जाए। मंत्री ने कहा कि यह परियोजना न केवल गोरखपुर बल्कि पूरे पूर्वांचल के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी। नक्षत्रशाला को आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक उपकरणों और डिजिटल सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है। यहां थ्री-डी थिएटर, एम्फीथिएटर, साइंस गैलरी, और एक्टिविटी लैब जैसी सुविधाएं होंगी, जहां विद्यार्थी स्वयं प्रयोग करके विज्ञान की गहराई को समझ सकेंगे। यह न केवल शिक्षा के क्षेत्र में, बल्कि पर्यटन और नवाचार के क्षेत्र में भी गोरखपुर को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

नक्षत्रशाला के प्रभारी डॉ. महादेव पांडेय के अनुसार, नई तकनीकों के उपयोग से नक्षत्रशाला को विश्व स्तरीय रूप दिया जा रहा है। इसमें ऐसे उपकरण लगाए जा रहे हैं जो खगोल विज्ञान, भौतिकी और जीवविज्ञान जैसे विषयों को छात्रों के लिए अधिक रोचक बनाएंगे। यहां आने वाले बच्चे तारों की दुनिया में डिजिटल यात्रा कर सकेंगे, जिससे विज्ञान के प्रति उनकी जानने की इच्छा और समझ दोनों बढ़ेगी।

मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर हुआ कायाकल्प

नक्षत्रशाला और विज्ञान पार्क के कायाकल्प का विचार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अक्टूबर 2022 में व्यक्त किया था। उस दौरान उन्होंने नक्षत्रशाला का दौरा किया और वहां आंशिक सूर्य ग्रहण का नजारा भी देखा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि गोरखपुर को विज्ञान शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहचान दी जाए। उनके निर्देश के बाद 5 जुलाई 2024 से नक्षत्रशाला के आधुनिकीकरण और 5 मई 2025 से विज्ञान पार्क के निर्माण कार्य की शुरुआत हुई। योजना के अनुसार, विज्ञान पार्क का कार्य मार्च 2026 और नक्षत्रशाला का कार्य दिसंबर 2026 तक पूर्ण किया जाना है।

सरकार का उद्देश्य इस परियोजना के माध्यम से पूर्वांचल के विद्यार्थियों को आधुनिक विज्ञान शिक्षा से जोड़ना है। मुख्यमंत्री योगी जी ने कहा था कि यह केंद्र “पूर्वांचल का साइंस हब” बनेगा, जहां विद्यार्थी प्रयोग, शोध ( खोज ) और अवलोकन ( किसी चीज़ को ध्यान से देखना और निरीक्षण करना ) के माध्यम से सीख सकेंगे।

इकोलॉजिकल पार्क से बढ़ेगा हरियाली और पर्यटन

विज्ञान पार्क के साथ-साथ गोरखपुर में एक इकोलॉजिकल पार्क (स्पंज पार्क) भी बनाया जा रहा है, जो पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन दोनों के लिए वरदान साबित होगा। करीब 49 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस पार्क में बोटिंग, भूलभुलैया, किड्स जोन, जॉगिंग ट्रैक, ओपन जिम जैसी सुविधाएं होंगी। यह पार्क शहर की वायु गुणवत्ता सुधारने, जल स्तर बढ़ाने और लोगों को हरा – भरा वातावरण उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएगा। नगर निगम ने इस परियोजना की निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी है और जल्द ही निर्माण कार्य प्रारंभ होगा।

यह पार्क न केवल एक मनोरंजन स्थल होगा बल्कि एक कार्बन सिंक की तरह काम करेगा, जिससे शहर की जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, यहां बनने वाला ओपन एयर क्लासरूम और अवेयरनेस जोन बच्चों को पर्यावरण शिक्षा से जोड़ने में मदद करेगा।

रिपोर्ट – राजीव पाण्डेय

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