नई दिल्ली:
दीवाली के मौके पर हर कोई अपने घर पहुंचकर परिवार के साथ त्योहार मनाना चाहता है, लेकिन इस बार यात्रियों के सामने सफर आसान नहीं है। ट्रेन और बसों में भीड़ और किराया वृद्धि ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
रेलवे ने दीवाली और छठ पर्व को देखते हुए कुछ स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं, लेकिन उनमें भी सीटें फुल हो चुकी हैं। गुजरात के सूरत और उत्तर प्रदेश-बिहार जाने वाले कई यात्रियों की भीड़ रेलवे स्टेशनों पर देखने को मिल रही है। उधना रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की लंबी कतारें लगी हैं। कई लोग टिकट न मिलने के बावजूद उम्मीद में स्टेशन पहुंचे हैं।
भीड़ नियंत्रण के लिए रेलवे प्रशासन ने हर प्लेटफॉर्म पर आरपीएफ और जीआरपी की तैनाती की है। यात्रियों को लाइन में लगाकर ट्रेन में बैठाया जा रहा है। झांसी से गोरखपुर और अन्य मार्गों पर भीड़ इतनी अधिक है कि कई लोग खिड़की या दरवाजे से कोच में घुसने की कोशिश कर रहे हैं। रेलवे और आरपीएफ ने स्वयं कमान संभाल ली है ताकि भगदड़ जैसी स्थिति न बने।

बसों की स्थिति भी ठीक नहीं है। निजी बस कंपनियों ने फेस्टिवल सीजन का फायदा उठाते हुए किराया बढ़ा दिया है। उदाहरण के लिए:
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दिल्ली से कानपुर बस का किराया अब 2900 रुपये तक पहुँच गया है (सामान्यतः 700 रुपये)
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दिल्ली से लखनऊ: 2500 रुपये
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दिल्ली से वाराणसी: 3000 रुपये
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दिल्ली से आगरा: 1500 रुपये
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दिल्ली से चंडीगढ़: 1500 रुपये
दिल्ली के सौरभ नामक यात्री ने बताया कि उन्हें दीवाली से एक दिन पहले ही कानपुर जाना था। सरकारी बसें फुल थीं और निजी बसें सामान्य किराए से तीन गुना ज्यादा मांग रही थीं।
यात्री अधिकारियों का कहना है कि लोगों को सिर्फ टिकट कन्फर्म होने पर ही स्टेशन आने की सलाह दी जा रही है। इसके बावजूद त्योहार के मौसम में भीड़ और किराया वृद्धि ने यात्रियों के लिए सफर को कठिन बना दिया है।
इस समय रेलवे और बस सेवा प्रदाताओं पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। प्रशासन को यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के साथ-साथ अनियंत्रित किराया वृद्धि पर भी नजर रखनी होगी, ताकि किसी भी यात्री को आर्थिक या शारीरिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
दीवाली और छठ जैसे त्योहारों के दौरान सफर को सुविधाजनक बनाना सरकार और निजी सेवा प्रदाताओं की जिम्मेदारी है। इस बार यात्रियों की मुश्किलें बताती हैं कि यात्रा व्यवस्था में सुधार की सख्त जरूरत है।
