CM Yogi ने ‘प्रारंभिक उत्तर भारत व इसके सिक्के’ पुस्तक का किया विमोचन

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) ने लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में ‘प्रारंभिक उत्तर भारत व इसके सिक्के’ नामक पुस्तक का विमोचन कियाहिंदुजा फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक प्राचीन भारत के इतिहास, उसकी लोकतांत्रिक चेतना, सांस्कृतिक एकता और आर्थिक समृद्धि को प्रामाणिक साक्ष्यों के साथ प्रस्तुत करती है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पुस्तक वर्षों से किए जा रहे पश्चिमी दुष्प्रचार का तथ्यात्मक और प्रमाणिक उत्तर है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) ने अपने संबोधन में कहा कि भारत ने सदैव सनातन संस्कृति और इतिहास से जुड़े प्रमाणों को महत्व दिया है। उन्होंने कहा कि यदि लोकतंत्र को समझना है तो दुनिया को भारत से सीखना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जी-20 समिट के दौरान दिए गए उस वक्तव्य का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत केवल दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र नहीं, बल्कि लोकतंत्र की जननी भी है। इसका ऐतिहासिक प्रमाण वैशाली है, जो विश्व के प्रारंभिक गणराज्यों में से एक रहा है।

मुख्यमंत्री आवास में हुआ विमोचन कार्यक्रम

यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री आवास के सभागार में आयोजित किया गया, जहां सीएम योगी (CM Yogi) ने पुस्तक के साथ-साथ हिंदुजा फाउंडेशन द्वारा संग्रहित दुर्लभ और प्राचीन ऐतिहासिक सिक्कों का भी अवलोकन किया। इस दौरान फाउंडेशन के जनकल्याणकारी कार्यों पर आधारित एक लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री ने इस शोधपरक प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्य भारत की वास्तविक ऐतिहासिक पहचान को विश्व के सामने लाने में सहायक हैं।

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भारत की उदार और समावेशी परंपरा

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भारत वह देश है जिसने दुनिया के हर जाति, मत और संप्रदाय को शरण दी और फलने-फूलने का अवसर प्रदान किया। उन्होंने “अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्, उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्” श्लोक का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना केवल भारत की ही देन है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में जन्म लेना सौभाग्य है और मनुष्य के रूप में जन्म लेना उससे भी अधिक दुर्लभ।

पश्चिमी दुष्प्रचार और भारत की ऐतिहासिक एकता

मुख्यमंत्री (CM Yogi) ने कहा कि पश्चिमी विद्वानों द्वारा लंबे समय तक यह प्रचार किया गया कि भारत कभी एक राष्ट्र या एक इकाई नहीं था, जबकि सच्चाई यह है कि वर्ष 1947 का विभाजन ब्रिटिश साजिश का परिणाम था। उन्होंने श्लोक “उत्तरं यत् समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्…” का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐतिहासिक भारतवर्ष में वर्तमान पाकिस्तान और बांग्लादेश भी शामिल रहे हैं। हजारों वर्षों की इस अखंड विरासत को भुलाने वाले ही भारत की एकता पर प्रश्न उठाते हैं।

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सिक्कों में सुरक्षित भारत का इतिहास

मुख्यमंत्री योगी (CM Yogi) ने कहा कि पुस्तक में अयोध्या, मथुरा, कौशाम्बी, काशी और पांचाल जैसे क्षेत्रों से प्राप्त तांबे, चांदी और मिश्रित धातुओं के सिक्कों का विस्तृत वर्णन है। ये सिक्के उस काल की राजनीतिक, भौगोलिक और व्यापारिक परिस्थितियों को प्रमाणित करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा तथ्यों और साक्ष्यों के साथ अपनी बात रखी है, जबकि पश्चिमी देशों ने इतिहास को अपने अनुसार प्रस्तुत करने का प्रयास किया।

मापन, मुद्रा और विज्ञान की सनातन परंपरा

मुख्यमंत्री (CM Yogi) ने कहा कि भारत ने सबसे पहले मापन और तोल की वैज्ञानिक प्रणाली विकसित की। माशा और तोला जैसी इकाइयां आज भी प्रचलन में हैं, विशेषकर धातुओं और सोने की तोल में। प्राचीन सिक्कों के मापक भी इसी वैज्ञानिक व्यवस्था पर आधारित थे, जो भारत की उन्नत बौद्धिक परंपरा को दर्शाते हैं। उन्होंने मौर्य शासनकाल को भारत का स्वर्ण युग बताते हुए कहा कि उस समय वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी लगभग 46 प्रतिशत थी।

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विजन-2047 का उल्लेख

मुख्यमंत्री योगी (CM Yogi) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन-2047 का उल्लेख करते हुए कहा कि पंच प्रण और 11 संकल्पों के माध्यम से हर भारतीय को अपनी विरासत पर गर्व करने की प्रेरणा दी जा रही है। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम का पुनरोद्धार और सनातन धरोहरों का संरक्षण इसी विजन का साकार रूप है।

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