Chhattisgarh: बस्तर के 47 गांवों में पहली बार फहराया गया तिरंगा, गणतंत्र दिवस पर लोकतंत्र की नई शुरुआत

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Chhattisgarh: 26 जनवरी 2026 का दिन छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के लिए इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज हो गया है। वह दिन जब बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिलों के 47 गांवों में पहली बार गणतंत्र दिवस के अवसर पर तिरंगा फहराया गया। दशकों तक नक्सलवाद और हिंसा के साये में जीने वाले ये गांव अब विकास और शांति की नई इबारत लिख रहे हैं। यह पल न केवल बस्तर बल्कि पूरे देश के लिए एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक है।

अतीत में, छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के इन गांवों में राष्ट्रीय पर्व मनाना एक खतरनाक काम माना जाता था। नक्सलियों के आतंक और सुरक्षा बलों की लगातार संघर्षों के कारण यहां के लोग गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व से दूर रहते थे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में केंद्र और राज्य सरकार की समन्वित रणनीतियों, सुरक्षाबलों की कड़ी कार्रवाई और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से बस्तर के हालात तेजी से बदले हैं। अब यह इलाका हिंसा की चपेट से बाहर निकलकर शांति और विकास की ओर अग्रसर हो रहा है।

इस बदलाव की बड़ी वजह है Chhattisgarh के बस्तर में स्थापित किए गए 59 नए सुरक्षा कैंप, जो अब प्रशासन की स्थायी मौजूदगी सुनिश्चित कर रहे हैं। इन सुरक्षा कैंपों की मौजूदगी ने न केवल सुरक्षा को मजबूत किया है, बल्कि विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। इन कैंपों की मदद से सड़कों, स्कूलों, स्वास्थ्य सेवाओं और बैंकिंग जैसी बुनियादी सुविधाएं अब दूरस्थ गांवों तक पहुंच रही हैं। हाल ही में जगरगुंडा जैसे नक्सल प्रभावित इलाके में बैंकिंग सेवाओं की शुरुआत इस बदलाव का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के अनुसार, Chhattisgarh के बस्तर को अब हिंसा के अतीत से निकालकर विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार (Chhattisgarh Government) बस्तर में शांति, विश्वास और लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसके परिणामस्वरूप, अब यहां के लोग लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का हिस्सा बन रहे हैं और राष्ट्रीय पर्वों में उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं।

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गणतंत्र दिवस 2026 को इन 47 गांवों में तिरंगा फहराना बस्तर में एक नई शुरुआत का प्रतीक बन गया। यह दिन न केवल शांति और विकास की नई पहल को दर्शाता है, बल्कि बस्तर के लोगों के लिए एक नए जीवन की शुरुआत का भी प्रतीक है। अब ये गांव भी लोकतंत्र और समृद्धि की ओर बढ़ते हुए, अपने भविष्य की दिशा तय कर रहे हैं।

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