भगवान बुद्ध के उपदेशों से मजबूत हुआ भारत-भूटान का रिश्ता, पवित्र अवशेषों ने जोड़ी नई आध्यात्मिक डोर

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भगवान बुद्ध के अवशेषों से सजा भूटान, भारत से पहुंची विरासत

भारत और भूटान के बीच आध्यात्मिक रिश्तों को और गहराई देने वाली ऐतिहासिक घटना में भारत ने भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का एक हिस्सा भूटान को सौंपा है। ये वही अवशेष हैं जिन्हें भारत में पिपरहवा-कपिलवस्तु अवशेष के नाम से जाना जाता है। शनिवार को इन अवशेषों को भूटान की राजधानी थिम्फू स्थित प्रतिष्ठित ताशीछो-दजोंग मठ में श्रद्धापूर्वक स्थापित किया गया। इसे भूटान की धार्मिक और राजनीतिक जीवन का केंद्र माना जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर भूटान के नेतृत्व और जनता का धन्यवाद करते हुए कहा कि “भगवान बुद्ध के उपदेश भारत और भूटान के बीच करुणा और शांति की पवित्र कड़ी हैं।”

यह पवित्र अवशेष भारत के राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली में संरक्षित थे और इन्हें विशेष धार्मिक समारोह के तहत भूटान भेजा गया। समारोह में भारत के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार सहित दोनों देशों के कई उच्च पदस्थ प्रतिनिधि मौजूद रहे। इस ऐतिहासिक क्षण को दोनों देशों के आध्यात्मिक इतिहास में एक नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

भूटान में पारंपरिक जुलूस और गार्ड ऑफ ऑनर से हुआ स्वागत

भूटान पहुंचने पर भगवान बुद्ध के इन अवशेषों का पारंपरिक चिपड्रेल जुलूस के साथ भव्य स्वागत किया गया। पूरा थिम्फू शहर इस अवसर पर आध्यात्मिक उत्सव में डूबा नजर आया। अवशेषों को ताशीछो-डजोंग के ग्रैंड कुएनरे हॉल में स्थापित किया गया, जहां भूटान की सेना ने इन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे, वरिष्ठ मंत्रियों और धार्मिक नेताओं ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ मिलकर पूजा-अर्चना की।

यह आयोजन महामहिम चौथे द्रुक ग्यालपो की 70वीं जयंती के उपलक्ष्य में किया गया, जिसमें 12 से 17 नवंबर 2025 तक अवशेषों को जनदर्शन के लिए रखा जाएगा। समारोह के दौरान भूटान के धार्मिक संस्थानों में विशेष प्रार्थनाएं हुईं, जिनमें हजारों लोगों ने भाग लिया। पूरा वातावरण भक्ति और करुणा से भर गया, मानो भगवान बुद्ध स्वयं इस पवित्र क्षण के साक्षी हों।

भगवान बुद्ध के उपदेश हैं भारत-भूटान की साझा आत्मा : पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा, “भारत से लाए गए भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का आदरपूर्वक स्वागत करने के लिए भूटान के लोगों और नेतृत्व को हार्दिक धन्यवाद।” उन्होंने यह भी कहा कि “ये अवशेष शांति, दया और सौहार्द का शाश्वत संदेश देते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि बुद्ध के उपदेश दोनों देशों के बीच आध्यात्मिक एकता और मानवता के प्रति समर्पण की मजबूत डोर हैं।

भूटान-भारत की आध्यात्मिक साझेदारी का नया अध्याय

भारत और भूटान का रिश्ता सिर्फ सीमाओं से नहीं बल्कि साझा आध्यात्मिक धरोहर से जुड़ा है। दोनों देशों में बुद्ध धर्म की गहरी जड़ें हैं और बुद्ध के उपदेशों ने इन समाजों को शांति और सेवा की भावना से जोड़े रखा है। भूटान में स्थापित ये अवशेष इस आध्यात्मिक बंधन को और मजबूत करते हैं। ताशीछो-डजोंग, जो एक प्राचीन मठ और किला दोनों है, अब भूटान के धार्मिक जीवन का केंद्र बन चुका है।

भारतीय दूतावास के अनुसार, ये अवशेष 8 से 18 नवंबर तक सार्वजनिक दर्शन के लिए उपलब्ध रहेंगे। भारत के संस्कृति मंत्रालय ने इसे “दोनों देशों की आत्माओं को जोड़ने वाला प्रतीक” बताया है। बौद्ध अनुयायियों के लिए यह अवसर किसी तीर्थ यात्रा से कम नहीं माना जा रहा है।

यह भी पढ़े – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 नवंबर से भूटान की दो दिवसीय यात्रा पर

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