पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मी तेज है। इसी बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय के नाम एक खास अपील जारी की। अपने आधिकारिक X हैंडल (पूर्व में ट्विटर) पर नीतीश ने लिखा कि मुस्लिम समाज किसी भी भ्रम में न रहे और अब तक की सरकार के काम को देखकर अपना वोट तय करे। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने बिना किसी भेदभाव के सभी समुदायों के लिए काम किया है और हर वर्ग को समान अवसर दिया है।
नीतीश की अपील – “काम देखकर करें फैसला”
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने राज्य में विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सौहार्द के क्षेत्र में निरंतर काम किया है। उन्होंने लिखा – “हमारी सरकार ने जो काम किए हैं, मुस्लिम समाज उसे याद रखे। किसी के झांसे में न आए और काम देखकर ही तय करे कि वोट किसे देना है।”
नीतीश कुमार का यह बयान विपक्षी दलों द्वारा अल्पसंख्यक वोट बैंक को साधने की कोशिशों के बीच आया है। उन्होंने कहा कि कुछ दल चुनावी मौसम में अचानक मुस्लिम समाज के हितैषी बन जाते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्हें कोई हिस्सा नहीं देते।
विपक्ष पर हमला – “सिर्फ वोट के लिए करते हैं छलावा”
नीतीश कुमार ने विपक्षी दलों पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग मुस्लिम वोट पाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाते हैं। उन्होंने लिखा कि “यह सब छलावा है। मुस्लिम समाज का इस्तेमाल सिर्फ वोट बैंक के रूप में किया गया, उन्हें कोई वास्तविक हिस्सेदारी नहीं दी गई।”
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनकी सरकार ने मुस्लिम समाज को हर क्षेत्र में बराबरी का हक और प्रतिनिधित्व दिया है। शिक्षा, रोजगार और अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं में इस समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं का विस्तृत ब्यौरा
नीतीश कुमार ने अपने पोस्ट में अल्पसंख्यक समाज के लिए चल रही योजनाओं का विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के बजट में 306 गुना वृद्धि करते हुए इसे 1080.47 करोड़ रुपए किया गया है।
उन्होंने कहा कि 2006 से राज्य में संवेदनशील कब्रिस्तानों की घेराबंदी शुरू की गई थी ताकि सांप्रदायिक शांति बनी रहे। अब तक 8000 से अधिक कब्रिस्तानों की घेराबंदी पूरी की जा चुकी है और 1273 कब्रिस्तानों को चिन्हित किया गया है। इनमें से 746 की घेराबंदी पूर्ण हो चुकी है जबकि बाकी का काम तेजी से किया जा रहा है।
भागलपुर दंगा और मदरसों का मुद्दा
नीतीश कुमार ने विपक्षी सरकारों के कार्यकाल की याद दिलाते हुए कहा कि 1989 में भागलपुर में भयानक दंगे हुए थे, जिन पर उस समय की सरकार काबू नहीं पा सकी थी। उन्होंने कहा कि जब उनकी सरकार बनी तो भागलपुर दंगे की जांच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की गई और पीड़ित परिवारों को मुआवजा व पेंशन दी गई।
उन्होंने बताया कि बिहार में मदरसों को सरकारी मान्यता दी गई है और मुस्लिम महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं लागू की गई हैं। तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को दी जाने वाली सहायता राशि 2007 में 10 हजार थी, जिसे बढ़ाकर अब 25 हजार रुपए कर दिया गया है।
शिक्षा और रोज़गार के लिए नई पहलें
नीतीश कुमार ने कहा कि सरकार ने अल्पसंख्यक युवाओं के लिए “तालीमी मरकज और हुनर योजना” जैसी योजनाएं शुरू की हैं, जिनसे हजारों छात्रों को स्कॉलरशिप और फ्री कोचिंग का लाभ मिल रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि “अल्पसंख्यक उद्यमी योजना” के तहत छोटे व्यवसायों के लिए आसान ऋण सुविधा दी जा रही है ताकि मुस्लिम समुदाय आर्थिक रूप से सशक्त बन सके। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि अल्पसंख्यक समाज आत्मनिर्भर बनें और उनके बच्चे उच्च शिक्षा तक पहुंच सकें।
सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में सामाजिक एकता और सद्भाव पर जोर देते हुए कहा कि बिहार की पहचान गंगा-जमनी तहज़ीब से है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने हमेशा हर धर्म, जाति और वर्ग को साथ लेकर काम किया है और भविष्य में भी यही नीति जारी रहेगी।
नीतीश कुमार ने कहा कि कुछ राजनीतिक दल समाज में फूट डालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जनता को उनकी चाल समझनी चाहिए। उन्होंने कहा कि “हमारा मकसद सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास है।”
राजनीतिक विश्लेषण: चुनावी रणनीति का संकेत
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि नीतीश कुमार की यह अपील आगामी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की दिशा तय कर सकती है। बिहार में मुस्लिम मतदाता लगभग 17 प्रतिशत हैं और कई विधानसभा सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
नीतीश कुमार का यह संदेश इस वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने और विपक्ष के प्रचार को चुनौती देने का संकेत माना जा रहा है। दूसरी ओर, विपक्षी दल इसे चुनावी रणनीति बता रहे हैं।