Azamgarh पुलिस ने फर्जी ट्रेडिंग ऐप के जरिए ऑनलाइन ठगी करने वाले एक संगठित साइबर गिरोह का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से तीन मोबाइल फोन, तीन एटीएम कार्ड और बड़ी संख्या में चेक बुक बरामद की हैं।
जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देश पर साइबर अपराधों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का नेतृत्व साइबर सेल के नोडल अधिकारी एवं एसपी ट्रैफिक विवेक त्रिपाठी कर रहे हैं। अभियान के तहत लगातार अंतरराज्यीय शातिर साइबर ठगों की धरपकड़ की जा रही है। जांच में सामने आया है कि इस ठगी नेटवर्क में बैंक और कॉल सेंटर से जुड़े कुछ कर्मचारी भी शामिल हैं।
साइबर थाने में दर्ज हुआ था मामला
अपर पुलिस अधीक्षक विवेक त्रिपाठी ने बताया कि इस मामले में पीड़ित अशोक कुमार अग्रवाल ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित ने फेसबुक पर “NEXT TRADE” नामक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म का विज्ञापन देखकर दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क किया था। इसके बाद आरोपियों ने अधिक मुनाफे का लालच देकर ‘NEXT TRADE’ नामक फर्जी ट्रेडिंग ऐप का लिंक भेजा और उसमें निवेश करने को कहा।
झांसे में आकर पीड़ित ने अलग-अलग किश्तों में कुल 8 लाख 99 हजार रुपये निवेश कर दिए। काफी समय बीत जाने के बावजूद जब कोई लाभ नहीं मिला और पीड़ित ने अपनी धनराशि वापस निकालने की कोशिश की, तो उसकी आईडी बंद कर दी गई। इसके बाद पीड़ित को साइबर ठगी का एहसास हुआ।
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सर्विलांस से आरोपियों तक पहुंची पुलिस
मुकदमा दर्ज होने के बाद साइबर टीम ने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबरों की लोकेशन और सर्विलांस के आधार पर जांच शुरू की। इसी क्रम में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इंद्रजीत डे और अंकेश धाकड़ के रूप में हुई है। इंद्रजीत डे उज्जैन का रहने वाला है, जबकि अंकेश धाकड़ इंदौर निवासी है और वह कोटक महिंद्रा बैंक, इंदौर में कार्यरत है।
इस मामले में बैंक से जुड़े डिप्टी मैनेजर गोपाल भदोरिया, माधव राखी और यस बैंक का कर्मचारी प्रीतम अभी फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।
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बैंक कर्मियों की भूमिका भी उजागर
साइबर सेल के नोडल अधिकारी विवेक त्रिपाठी ने बताया कि पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे एक संगठित गिरोह के रूप में काम करते थे। यह गिरोह लोगों को ट्रेडिंग के नाम पर ‘NEXT TRADE’ ऐप डाउनलोड कराकर निवेश कराता था और रकम को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवाता था।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह में कुछ बैंक कर्मचारी शामिल हैं, जो अपने पद का दुरुपयोग करते हुए पहले से हस्ताक्षरित ब्लैंक चेक उपलब्ध कराते थे। जैसे ही खातों में पैसा आता था, उसे तुरंत चेक के जरिए निकाल लिया जाता था। पूरे लेनदेन का हिसाब गिरोह द्वारा व्यवस्थित रूप से रखा जाता था।
अब तक की जांच में इस गिरोह द्वारा एक करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी किए जाने की पुष्टि हुई है। देशभर से इस नेटवर्क से जुड़ी करीब 12 से अधिक शिकायतें भी सामने आई हैं, जिनकी जांच जारी है। इस अभियान में इंस्पेक्टर देवेंद्र प्रताप सिंह, सब-इंस्पेक्टर योगेंद्र प्रसाद समेत कई पुलिसकर्मी शामिल रहे।
साइबर एक्सपर्ट की सलाह
साइबर सेल ने आम लोगों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक ऐप स्टोर जैसे गूगल प्ले स्टोर या सैमसंग गैलेक्सी स्टोर से ही ऐप डाउनलोड करें। किसी भी थर्ड पार्टी वेबसाइट या अनधिकृत लिंक से एपीके फाइल डाउनलोड न करें। व्हाट्सएप या सोशल मीडिया पर मिलने वाले ऐप लिंक पर क्लिक करने से बचें और किसी भी संदिग्ध ऐप को तुरंत अनइंस्टॉल कर दें।
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