Aligarh Muslim University (AMU) के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के शोधकर्ताओं ने एक विशेष एफसीआई (फेरो सेल्युलर इंसुलेटेड) पैनल विकसित किया है, जो भीषण गर्मी में भी कमरे के भीतर तापमान को उल्लेखनीय रूप से कम रखने में सक्षम है। दावा किया गया है कि यदि बाहर का तापमान 40-42 डिग्री सेल्सियस हो, तो अंदर 25-27 डिग्री सेल्सियस का अनुभव होगा, यानी लगभग 15 डिग्री की गिरावट।
यह पैनल प्रो. अब्दुल बकी, डॉ. मोहम्मद रेहान सादिक और शोधार्थी यासिर खान की टीम ने तैयार किया है। सीमेंट और गत्ते के संयोजन से बने इस 90 एमएम मोटे कॉर्टन-सीमेंट पैनल में दो परतों के बीच खाली स्थान छोड़ा गया है। इस गैप में फंसी हवा प्राकृतिक इंसुलेटर की तरह काम करती है, जिससे कमरे का तापमान स्वतः नियंत्रित रहता है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, इस तकनीक से एसी और कूलर पर निर्भरता कम होगी, जिससे बिजली की खपत में बड़ी बचत संभव है। साथ ही यह पैनल बाहरी शोर को भी काफी हद तक रोकता है, जिससे अंदर शांत वातावरण मिलता है।
डॉ. मोहम्मद रेहान सादिक के मुताबिक, देश में साल के अधिकांश महीनों में गर्मी रहती है और भवनों को ठंडा रखने के लिए अत्यधिक ऊर्जा खर्च होती है। ऐसे में यह पैनल पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा दक्ष विकल्प प्रदान करता है। पारंपरिक ईंट-सीमेंट की दीवारों के बजाय हल्के और मजबूत पैनल का उपयोग संरचना पर भार भी कम करेगा।

लागत थोड़ी अधिक, लेकिन दीर्घकाल में फायदेमंद
यासिर खान के अनुसार, यदि 10×10 फुट के कमरे का निर्माण सामान्य ईंट से किया जाए तो लगभग 1 लाख रुपये खर्च आते हैं, जबकि इस पैनल से वही कमरा करीब 1.15 लाख रुपये में तैयार होगा। हालांकि, ईंट से बने कमरे को ठंडा रखने में एसी पर सालाना लगभग 22,651 रुपये बिजली खर्च होते हैं, जबकि पैनल से बने कमरे में यह खर्च घटकर करीब 10,251 रुपये रह जाएगा।
इस प्रकार हर वर्ष लगभग 12,400 रुपये की बचत संभव है, जिससे शुरुआती अतिरिक्त लागत कुछ ही वर्षों में वसूल हो जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह नवाचार ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और किफायती भवन निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। फिलहाल इसे बाजार में उतारने की तैयारी की जा रही है।