अजमेर/नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भीषण संघर्ष और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर भारत में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। अजमेर शरीफ दरगाह के दीवान और प्रमुख, सैयद ज़ैनुल आबेदीन ने सोमवार को इस पूरे घटनाक्रम की कड़ी आलोचना करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति की एक ‘तानाशाही’ करार दिया है। समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) से बातचीत के दौरान उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच जो कुछ भी हो रहा है, उसे पारंपरिक ‘युद्ध’ की संज्ञा नहीं दी जा सकती।
आबेदीन ने सीधे तौर पर संयुक्त राज्य अमेरिका (US) पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह अपने निजी फायदों के लिए दुनिया के नेताओं को ‘बंधक’ बनाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने अयातुल्ला अली खामेनेई के कद को रेखांकित करते हुए कहा कि वह केवल ईरान के राजनीतिक प्रमुख नहीं थे, बल्कि दुनिया भर के शिया मुसलमानों के लिए एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक और नेतृत्वकर्ता थे। उनके अनुसार, जिस तरह से सैन्य ऑपरेशनों को अंजाम दिया जा रहा है, वह वैश्विक स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा है।
भारत के शिया समुदाय में उबाल: तीन दिन तक कारोबार बंद रखने का एलान
अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या की खबर के बाद भारत के विभिन्न हिस्सों में शिया समुदाय के बीच गहरा रोष और शोक व्याप्त है। ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव, मौलाना यासूब अब्बास ने इस दुखद घड़ी में एकजुटता दिखाने के लिए तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी शोक का आह्वान किया है। उन्होंने घोषणा की कि खामेनेई के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए तीन दिनों तक सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठान और बाजार बंद रहेंगे।
मौलाना अब्बास ने समुदाय के लोगों से अपने घरों और धार्मिक स्थलों पर काले झंडे फहराने की अपील की है। उन्होंने बताया कि देशभर के इमामबाड़ों और मस्जिदों में शोक सभाएं आयोजित की जाएंगी, जहाँ मरहूम नेता को श्रद्धांजलि दी जाएगी। गौरतलब है कि 28 फरवरी को हुए अमेरिकी-इज़राइली मिसाइल हमलों में अयातुल्ला खामेनेई के साथ उनके परिवार के कई सदस्य, जिनमें उनकी बेटी, नाती और बहू शामिल थे, भी मारे गए थे। इस घटना ने धार्मिक भावनाओं को वैश्विक स्तर पर आहत किया है।
लखनऊ से अलीगढ़ तक प्रदर्शन: ‘इज़राइल और अमेरिका की होगी हार’
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, जो शिया संस्कृति का एक बड़ा केंद्र है, वहां विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला तेज हो गया है। रविवार को बड़ी संख्या में लोग ‘छोटे इमामबाड़े’ में एकत्र हुए, जहाँ प्रसिद्ध शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद कल्बे जवाद ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की। सभा को संबोधित करते हुए मौलाना जवाद ने कहा कि ईरान की जनता और दुनिया का मुस्लिम समाज इन हमलों के आगे कभी नहीं झुकेगा। उन्होंने भविष्यवाणी की कि अंततः इज़राइल और अमेरिका को इस संघर्ष में हार का सामना करना पड़ेगा।
इसी तरह का आक्रोश अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के परिसर में भी देखा गया। विश्वविद्यालय के सैकड़ों छात्रों ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर एक विशाल ‘कैंडल मार्च’ निकाला और अयातुल्ला खामेनेई की हत्या को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने मिलकर खामेनेई के लिए ‘जनाजे की नमाज़’ (ग़ायबना नमाज़-ए-जनाज़ा) भी अदा की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह हमला केवल एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि एक विचारधारा और संप्रभुता पर हमला है।
ईरान में 40 दिनों का सार्वजनिक शोक और खामेनेई की विरासत
ईरान सरकार ने अपने सर्वोच्च नेता की मौत के बाद देश में 40 दिनों के आधिकारिक सार्वजनिक शोक की घोषणा की है। अयातुल्ला अली खामेनेई का कार्यकाल ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। 1989 में इस्लामी क्रांति के संस्थापक रूहोल्लाह खुमैनी के निधन के बाद उन्होंने सत्ता संभाली थी और दशकों तक ईरान की नीतियों को दिशा दी। उनके नेतृत्व में ईरान ने पश्चिमी देशों के बढ़ते प्रभाव का लगातार विरोध किया और खुद को एक क्षेत्रीय शक्ति के रूप में स्थापित किया।
