अफ्रीका से फिर भारत आएंगे चीते… राष्ट्रपति मुर्मू ने बोत्सवाना से समझौता किया

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राष्ट्रपति मुर्मू की बोत्सवाना यात्रा और ऐतिहासिक समझौता

भारत और बोत्सवाना के बीच वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की बोत्सवाना यात्रा के दौरान यह घोषणा की गई कि अफ्रीका के इस देश ( बोत्सवाना ) से आठ चीतों को भारत लाया जाएगा। यह पहल ‘प्रोजेक्ट चीता’ के तहत भारत में विलुप्त हो चुके चीतों की आबादी को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से की जा रही है। राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने समकक्ष राष्ट्रपति ड्यूमा गिदोन बोको और बोत्सवाना की जनता को धन्यवाद देते हुए कहा, “यह जानकर विशेष खुशी है कि बोत्सवाना, भारत में चीतों को दोबारा बसाने के लिए ‘प्रोजेक्ट चीता’ में सहयोग कर रहा है, जो भारत सरकार की एक अनूठी संरक्षण पहल है. मैं बोत्सवाना के राष्ट्रपति और जनता की आभारी हूं कि वे अपने चीते भारत भेज रहे हैं। हम उनका पूरा ध्यान रखेंगे।” इस समझौते के अंतर्गत गुरुवार को विशेष समारोह में इन चीतों को भारत को प्रतीकात्मक रूप से सौंपा जाएगा।

गौरतलब है कि यह समझौता न केवल वन्यजीव संरक्षण का प्रतीक है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच जैव विविधता और पर्यावरणीय सहयोग को भी मजबूत करेगा। समझौते के अनुसार, गुरुवार को एक विशेष समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें इन चीतों को प्रतीकात्मक रूप से भारत को सौंपा जाएगा।

भारत में अभी 27 चीते मौजूद

बोत्सवाना के मोकोलोदी नेचर रिजर्व से कालाहारी रेगिस्तान के गान्जी शहर में पकड़े गए ये चीतें लाए जाएंगे। बोत्सवाना के राष्ट्रपति ने इस कदम को जैव विविधता सहयोग का प्रतीक बताया, जो भारत में चीतों की आबादी बढ़ाने में सहायक होगा। भारत ने पहले 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा था, जो किसी बड़े जंगली मांसाहारी प्रजाति का विश्व का पहला महाद्वीपीय पुनर्वास अभियान था. इसके बाद फरवरी 2023 में भारत ने दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते आयात किए..तीन साल बाद अब वर्तमान में भारत में कुल 27 चीते हैं, जिनमें से 16 भारतीय भूमि पर जन्मे हैं।

भारत में चीतों की तैयारी

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि आठ चीतें दिसंबर के तीसरे सप्ताह में भारत आएंगी। उन्हें पहले क्वारंटाइन में रखा जाएगा और विभिन्न स्वास्थ्य जांचों के बाद कूनो राष्ट्रीय उद्यान  ( Kuno National Park) में अन्य चीतों के साथ रखा जाएगा। भारत में ‘प्रोजेक्ट चीता’ के तहत अब तक शावकों के जीवित रहने की दर 61 प्रतिशत है, जो दुनिया की औसत 40 प्रतिशत से अधिक है। इससे भारत में चीतों के संरक्षण में सफलता की कहानी सामने आती है।

भविष्य की दिशा और संरक्षण की सफलता

देश में भारत के माध्यम से चीतों की आबादी लगातार बढ़ रही है। दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से लाए गए चीतों के शावक अब वयस्क होने के करीब हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस पहल से भारत में विलुप्त प्रजातियों के संरक्षण के प्रयास और मजबूत होंगे। कूनो, गांधी सागर, नौरादेही और बन्नी घास जैसे अभ्यारण्य अब चीतों के लिए सुरक्षित घर बन चुके हैं। अफ्रीका से आने वाले आठ चीतों के बाद भारत में चीतों की आबादी और बढ़ेगी और यह देश दुनिया में इस दुर्लभ प्रजाति के संरक्षण में एक अग्रणी उदाहरण पेश करेगा।

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