नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) वॉयस वोट से खारिज होने के बाद, गुरुवार को उन्होंने सदन में अपनी वापसी की। स्पीकर की कुर्सी संभालते ही ओम बिरला ने उन सभी आरोपों की धज्जियां उड़ा दीं, जो पिछले कई दिनों से विपक्ष द्वारा उन पर लगाए जा रहे थे।
ओम बिरला ने बेहद तल्ख और स्पष्ट लहजे में कहा कि स्पीकर का पद किसी भेदभाव के लिए नहीं, बल्कि सदन की गरिमा और नियमों की रक्षा के लिए है।
“माइक का कंट्रोल मेरे हाथ में नहीं”
विपक्ष, खासकर कांग्रेस और शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत द्वारा बार-बार यह आरोप लगाया जा रहा था कि राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं के भाषण के दौरान उनका माइक्रोफोन बंद कर दिया जाता है। इस पर सफाई देते हुए बिरला ने कहा:
“चेयर (अध्यक्ष) के पास माइक चालू या बंद करने के लिए कोई बटन नहीं होता है। यह दावा पूरी तरह गलत है कि किसी का गला घोंटा गया। सदन में जिसे बोलने की अनुमति दी जाती है, उसका माइक तकनीकी रूप से चालू कर दिया जाता है। यह बात विपक्ष के वो सांसद भी जानते हैं जो समय-समय पर इस चेयर पर बैठकर सदन चलाते हैं।”
सस्पेंशन पर बोले— “मर्यादा से समझौता नहीं”
सत्र के दौरान कई सांसदों को सस्पेंड करने के कड़े फैसले पर अडिग रहते हुए स्पीकर ने कहा कि सदन की गरिमा उनके लिए सर्वोच्च है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब भी कोई सदस्य संसद की मर्यादा पर प्रहार करेगा, उन्हें कड़े और कड़वे फैसले लेने ही होंगे। बिरला ने कहा, “सदन का कोई भी सदस्य नियमों से खुश या नाखुश हो सकता है, लेकिन नियमों को बिना किसी भेदभाव के लागू करना मेरा संवैधानिक कर्तव्य है।”
आर्टिकल 105 और बोलने की आज़ादी
संविधान के अनुच्छेद 105 (संसद में वाक्-स्वतंत्रता) का जिक्र करते हुए ओम बिरला ने एक बड़ी लकीर खींची। उन्होंने कहा:
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अधिकार: संसद में बोलने की आज़ादी हर सदस्य का बुनियादी अधिकार है।
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मर्यादा: यह आज़ादी निरंकुश नहीं है, बल्कि सदन के तय नियमों और गौरवशाली परंपराओं के दायरे में आती है।
संसदीय इतिहास का तीसरा अविश्वास प्रस्ताव
ओम बिरला ने याद दिलाया कि आज़ाद भारत के संसदीय इतिहास में यह केवल तीसरी बार था जब किसी लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। उन्होंने दोहराया कि वे अपनी ड्यूटी पूरी निष्पक्षता से करेंगे, चाहे सामने सत्तापक्ष का मंत्री हो या विपक्ष का कोई सांसद।