‘राजस्व सेवा केवल कर संग्रह नहीं, राष्ट्र निर्माण का आधार’: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने IRS प्रशिक्षु अधिकारियों को दिया सफलता का मंत्र

राष्ट्रपति मुर्मु ने दी IRS अधिकारियों को 'संतुलन' की सीख

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नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) के 79वें बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने युवा अधिकारियों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि एक विकसित भारत के निर्माण में उनकी भूमिका केवल कर वसूलने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे राष्ट्र की प्रगति में एक ‘अपरिहार्य भागीदार’ हैं। राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि प्रत्यक्ष कर ही वह स्थिर स्रोत हैं जो सरकार को शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश करने की शक्ति प्रदान करते हैं।

नागपुर स्थित राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी (NADT) में प्रशिक्षण ले रहे इन अधिकारियों में रॉयल भूटान सेवा के दो प्रशिक्षु अधिकारी भी शामिल थे। राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग और तकनीकी दक्षता के साथ-साथ मानवीय संवेदनशीलता के संतुलन को सेवा का मूल आधार बताया।

प्रत्यक्ष कर: समावेशी विकास की मजबूत नींव

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संबोधन में कहा कि एक निष्पक्ष और पारदर्शी कर प्रणाली ही समाज में समानता को बढ़ावा देती है। उन्होंने अधिकारियों को समझाते हुए कहा कि राजस्व का सही संग्रह सरकारों को समाज कल्याण की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने में सक्षम बनाता है। उनके अनुसार, सतत विकास की नींव तभी मजबूत होती है जब कर प्रणाली न्यायसंगत और कुशल हो।

उन्होंने आईआरएस (IRS) अधिकारियों की क्षमता को रेखांकित करते हुए कहा कि जटिल वित्तीय लेनदेन का विश्लेषण करना, सीमा पार से होने वाले अवैध वित्तीय प्रवाह (Illicit Financial Flows) का पता लगाना और उलझी हुई कॉर्पोरेट संरचनाओं को सुलझाना उनकी विशेषज्ञता का हिस्सा है। यही विशेषज्ञता उन्हें ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण योद्धा बनाती है।

प्रवर्तन और विनम्रता के बीच संतुलन: राष्ट्रपति की सलाह

युवा अधिकारियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करते हुए राष्ट्रपति ने ‘विवेक’ के इस्तेमाल पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि एक सफल अधिकारी वही है जो निम्नलिखित पहलुओं के बीच सटीक संतुलन बनाए रखना जानता हो:

  • प्रवर्तन बनाम सुविधा: कर कानून लागू करने के साथ-साथ करदाताओं को सुविधाएं देना।

  • अधिकार बनाम विनम्रता: अपने पद की शक्ति का प्रयोग विनम्रता और संयम के साथ करना।

  • तकनीकी क्षमता बनाम मानवीय संवेदनशीलता: डेटा और तकनीक के साथ-साथ मानवीय पहलुओं को भी समझना।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रशिक्षु अधिकारियों को सलाह दी कि वे अपने आचरण में संवैधानिक मूल्यों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता रखें। उन्होंने कहा कि न्यायसंगत और व्यावसायिक प्रक्रियाओं की गहन समझ ही उन्हें सही निर्णय लेने में मदद करेगी।

एनएडीटी नागपुर में ले रहे हैं कड़ा प्रशिक्षण

आईआरएस के ये प्रशिक्षु अधिकारी वर्तमान में नागपुर स्थित राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी (NADT) में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। यहाँ उन्हें न केवल भारतीय कर कानूनों, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कराधान, साइबर फॉरेंसिक और वित्तीय जांच के आधुनिक गुर सिखाए जा रहे हैं। भूटान के अधिकारियों की मौजूदगी भारत के अपने पड़ोसी देशों के साथ मजबूत प्रशासनिक और शैक्षिक संबंधों को भी दर्शाती है।

राष्ट्रपति ने अंत में अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे अपनी सेवा के दौरान सत्यनिष्ठा और पारदर्शिता के उच्चतम मानकों को स्थापित करेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि यह युवा बैच अपनी तकनीकी दक्षता और नैतिक मूल्यों के बल पर देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

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