नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुग्राम में श्रवणथी समूह, श्रवणथी इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड और उसकी समूह कंपनी श्रवणथी एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड (एसईपीएल) के प्रमोटर दंडमुडी वेंकटेश्वर राव के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आवासीय और वाणिज्यिक परिसरों की तलाशी ली और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए। ईडी ने तलाशी के दौरान संपत्ति पंजीकरण विलेख, उपहार विलेख, शेयर खरीद समझौते और अन्य आपत्तिजनक वित्तीय कागजात एकत्र किए। इस कार्रवाई का उद्देश्य बैंकरों और एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों (एआरसी) के बीच हुए ऋण असाइनमेंट समझौतों, हाइथ्रो पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और उसकी समूह कंपनियों के साथ पत्राचार, एसईपीएल और उसकी समूह कंपनियों के बहीखाते, लेखा बही, क्रय आदेश, कार्य आदेश और शेयर मूल्यांकन रिपोर्ट की जाँच करना था। ईडी ने बताया कि यह कार्रवाई हाइथ्रो पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और उसके निदेशकों अमूल गबरानी व अजय कुमार बिश्नोई द्वारा सार्वजनिक धन का गबन और डायवर्जन करने के मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई। इस गबन की राशि 2009 से 2015 के बीच 346.08 करोड़ रुपये आंकी गई है।
ED, Gurugram has conducted search operations on 01.10.2025 at 03 residential and commercial premises related to Dandamudi Venkateswara Rao, Promoter of Sravanthi group, M/s Sravanthi Infratech Pvt. Ltd. and its group company M/s Sravanthi Energy Pvt. Ltd. (SEPL) in Gurugram under…
— ED (@dir_ed) October 3, 2025
ईडी ने कहा कि उसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर चल रही है, जिसमें आईपीसी, 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि एसईपीएल 2013-15 के दौरान 10 करोड़ रुपये से अधिक का कर्जदार रहा, जिसकी अब तक कोई वसूली नहीं हुई है। इसके अलावा, वित्तीय वर्ष 2018-19 और 2019-20 के दौरान, एसईपीएल के 18.43 करोड़ रुपये मूल्य के इक्विटी शेयर, जिनका अंकित मूल्य 10 रुपये प्रति शेयर था, को इसके विदेशी निवेशकों को केवल 0.25 रुपये प्रति शेयर की अत्यधिक रियायती दर पर हस्तांतरित किया गया। यह तब हुआ जबकि कंपनी ने इन वर्षों में 210 करोड़ रुपये से अधिक का सकारात्मक ईबीआईटीडीए दर्ज किया था।
ईडी ने स्पष्ट किया कि इस जाँच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि आरोपियों ने आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी के माध्यम से स्वयं को अनुचित लाभ पहुँचाया। जांच में दर्ज दस्तावेज़ों और शेयर हस्तांतरण की प्रवृत्ति यह संकेत देती है कि वित्तीय अनियमितताओं के मामले में प्रमोटर द्वारा गंभीर कदाचार किया गया। इस कार्रवाई से बैंकों और निवेशकों के हितों की सुरक्षा के प्रयास में ईडी की सतत निगरानी और सक्रिय भूमिका सामने आई है। गुरुग्राम में की गई इस छापेमारी ने यह संदेश दिया कि वित्तीय धोखाधड़ी और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के मामलों में एजेंसी सख्त कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगी। इस कदम से न केवल संभावित धोखाधड़ी की जाँच में तेजी आएगी, बल्कि निवेशकों और बैंकिंग प्रणाली में विश्वास भी मजबूत होगा।