लखनऊ में जमीन के नाम पर 19 लाख की ठगी: 5 साल में पैसा दोगुना करने का झांसा देकर फंसाया, सेल्स मैनेजर और निदेशकों पर FIR दर्ज

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जमीन में निवेश के नाम पर मोटे मुनाफे और रकम दोगुनी करने का झांसा देकर एक व्यक्ति से 19 लाख रुपये ठगने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। जालसाजों ने पीड़ित को पांच वर्ष में निवेश की गई राशि को दो गुना करने का लालच दिया था, लेकिन समय बीतने के बाद न तो जमीन की रजिस्ट्री की गई और न ही पैसा वापस मिला। चारबाग निवासी पीड़ित राकेश कुमार सिंह की शिकायत पर डीसीपी दक्षिणी के आदेश के बाद कृष्णानगर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और तीन नामजद आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की है।
पीड़ित राकेश कुमार सिंह के अनुसार, यह धोखाधड़ी का सिलसिला सितंबर 2016 में शुरू हुआ था। उनके एक परिचित राहुल पाठक ने खुद को एक कंपनी का सेल्स मैनेजर बताते हुए उनसे संपर्क किया। राहुल ने दावा किया कि कंपनी की योजनाओं में निवेश करने पर बहुत कम समय में भारी मुनाफा कमाया जा सकता है। इसके बाद राहुल ने राकेश की मुलाकात कंपनी के निदेशकों, विनय पाठक और रंजना पाठक से कराई। इन तीनों ने मिलकर पीड़ित को मोहनलालगंज और सुल्तानपुर रोड स्थित कुछ जमीनें दिखाईं और आश्वासन दिया कि यदि वे निवेश करते हैं, तो पांच वर्षों में उन्हें लाभांश सहित दोगुनी रकम वापस मिलेगी या फिर जमीन का मालिकाना हक दे दिया जाएगा।

चेक और नकद के जरिए वसूले 19 लाख, लौटाने के नाम पर दिए बाउंस चेक

जालसाजों के झांसे में आकर राकेश कुमार सिंह ने 20 नवंबर 2016 से 2 फरवरी 2018 के बीच अलग-अलग किस्तों में कुल 19 लाख रुपये का निवेश किया। पीड़ित ने यह भुगतान चेक, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन और नकद माध्यमों से किया था। निवेश की अवधि पूरी होने के बाद जब राकेश ने अपनी रकम या जमीन की रजिस्ट्री की मांग की, तो आरोपी टालमटोल करने लगे। काफी समय बीत जाने के बाद भी जब उन्हें कोई लाभ नहीं मिला, तो उन्होंने आरोपियों पर दबाव बनाना शुरू किया। इस पर आरोपियों ने साल 2021 में उन्हें तीन-तीन लाख रुपये के दो चेक थमा दिए

राकेश कुमार सिंह ने बताया कि बार-बार शिकायत करने और दबाव बनाने के बाद आरोपियों ने किसी तरह केवल ढाई लाख रुपये ही वापस किए, लेकिन बाकी की बड़ी रकम लौटाने से साफ इनकार कर दिया। अपनी मेहनत की कमाई डूबती देख पीड़ित ने डीसीपी दक्षिणी से न्याय की गुहार लगाई। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप और शुरुआती जांच के बाद अब कृष्णानगर थाने में आरोपी राहुल पाठक, निदेशक विनय पाठक और रंजना पाठक के विरुद्ध एफआईआर (क्राइम नंबर के तहत) दर्ज कर ली गई है।

पुलिस की कार्रवाई और निवेश के प्रति सावधानी की अपील

कृष्णानगर पुलिस के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ जालसाजी और धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। पुलिस अब कंपनी के बैंक खातों और अन्य निवेशों की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इन आरोपियों ने अन्य लोगों को भी अपना शिकार बनाया है। अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के रियल एस्टेट निवेश के मामलों में अक्सर लोग झांसे में आ जाते हैं, इसलिए किसी भी निजी कंपनी में निवेश करने से पहले उसके वैधानिक दस्तावेजों और रेरा (RERA) पंजीकरण की जांच अवश्य करनी चाहिए।
घटना के बाद से पीड़ित परिवार मानसिक तनाव में है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है और जल्द ही उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। इस मामले ने एक बार फिर लखनऊ में सक्रिय जमीन माफियाओं और फर्जी निवेश कंपनियों के नेटवर्क की पोल खोल दी है, जो आम जनता को लुभावने विज्ञापनों और झूठे वादों के जरिए लूट रहे हैं।

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