हिमाचल प्रदेश पुलिस में महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल: DGP ने दिया POSH एक्ट के ऑडिट का आदेश, 15 दिनों में तलब की रिपोर्ट

Share This Article

शिमला। हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग ने अपनी महिला कर्मचारियों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और बाधा मुक्त कार्यस्थल सुनिश्चित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम उठाया है। प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने राज्य की सभी पुलिस इकाइयों, बटालियनों और कार्यालयों में ‘महिलाओं के कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013’ यानी POSH एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन का राज्यव्यापी ऑडिट करने का निर्देश दिया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य पुलिस विभाग के भीतर महिलाओं के लिए बने सुरक्षा चक्र को और अधिक मजबूत और जवाबदेह बनाना है।

डीजीपी द्वारा जारी आदेशों के अनुसार, यह ऑडिट प्रक्रिया अगले 15 दिनों के भीतर पूरी की जानी अनिवार्य है। इस निर्धारित समय सीमा में प्रत्येक पुलिस इकाई को यह समीक्षा करनी होगी कि क्या उनके यहाँ अधिनियम के तहत ‘आंतरिक शिकायत समितियों’ (ICC) का गठन सही तरीके से किया गया है। ऑडिट में न केवल समितियों की मौजूदगी देखी जाएगी, बल्कि उनकी सक्रियता, जांच प्रक्रिया में लगने वाले समय और शिकायतों के निपटारे की गुणवत्ता का भी बारीकी से आकलन किया जाएगा।

वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी और जवाबदेही तय

शासन ने इस ऑडिट की गंभीरता को देखते हुए सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SPs) और कमांडेंट (COs) को व्यक्तिगत रूप से इसकी निगरानी करने की जिम्मेदारी सौंपी है। इन वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले कार्यालयों का दौरा करें और यह सुनिश्चित करें कि POSH एक्ट के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं का अक्षरशः पालन हो रहा है। इसके बाद एक विस्तृत ‘कंप्लायंस रिपोर्ट’ सीधे पुलिस मुख्यालय को भेजी जाएगी।

पुलिस महानिदेशक ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि किसी भी स्तर पर नियमों के पालन में ढिलाई पाई गई, तथ्यों को छुपाने की कोशिश की गई या सुधार के उपायों को लागू करने में देरी हुई, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। विभाग का मानना है कि इस प्रकार की सख्ती से ही कानून का सही क्रियान्वयन संभव है और कर्मचारियों का विश्वास जीता जा सकता है।

जीरो टॉलरेंस: प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक प्रोफेशनल संस्कृति की ओर बढ़ते कदम

हिमाचल प्रदेश पुलिस ने अपने आधिकारिक वक्तव्य में दोहराया है कि कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार के उत्पीड़न के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की नीति अपनाई जाएगी। डीजीपी के अनुसार, इस ऑडिट का मकसद केवल कागजी खानापूर्ति करना नहीं है, बल्कि पुलिस बल के भीतर एक ऐसी पेशेवर संस्कृति विकसित करना है जहाँ सम्मान और जवाबदेही प्राथमिकता हो। इसमें जेंडर सेंसिटिविटी (लैंगिक संवेदनशीलता) को बढ़ावा देने के लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रमों के आयोजन पर भी जोर दिया गया है।

ऑडिट के दौरान इस बात का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा कि महिला कर्मचारियों को उनके कानूनी अधिकारों के बारे में पूरी जानकारी हो और उन्हें शिकायत करने के लिए एक सुरक्षित वातावरण मिले। हिमाचल प्रदेश पुलिस ने यह संकल्प दोहराया है कि वह अपने कार्यक्षेत्र में संगठनात्मक ईमानदारी और कानूनी व्यवहार के उच्चतम मानकों को स्थापित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। 15 दिनों की इस ऑडिट रिपोर्ट के बाद कई इकाइयों में बड़े प्रशासनिक बदलाव और समितियों के पुनर्गठन की भी संभावना जताई जा रही है।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted

Live Channel

Advertisement

[wonderplugin_slider id=1]

Live Poll

[democracy id="2"]

Also Read This