New Delhi, India: भारत की राजधानी में आयोजित 5 दिवसीय AI Impact Summit 2026 का समापन एक ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ हुआ। 16 से 20 फरवरी तक चले इस भव्य आयोजन में दुनिया के 88 देशों और कई बड़े International Organizations ने एक सुर में New Delhi Declaration को अपनाया है। यह घोषणापत्र आने वाले समय में Artificial Intelligence के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग और विकास की नई इबारत लिखेगा।
‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ का वैश्विक संदेश
इस समिट की सबसे बड़ी विशेषता इसका मूल मंत्र रहा। भारत ने दुनिया को “Sarvajan Hitay, Sarvajan Sukhay” (सभी का भला, सभी की खुशी) का संदेश दिया है। डिक्लेरेशन में साफ़ तौर पर कहा गया है कि AI की शक्ति और इसके फायदे केवल चंद देशों या कंपनियों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि पूरी इंसानियत के साथ इसे बराबरी से साझा किया जाना चाहिए।
सात ‘चक्रों’ पर टिका है भविष्य का AI
नई दिल्ली घोषणापत्र को सात विशेष स्तंभों के आधार पर तैयार किया गया है, जिन्हें “Chakra” का नाम दिया गया है। ये सात चक्र Global AI Ecosystem को नई दिशा देंगे:
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Democratization: एआई संसाधनों तक सबकी पहुंच आसान बनाना।
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Economic Growth: आर्थिक तरक्की और सामाजिक भलाई (Social Good) को बढ़ावा देना।
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Safety & Trust: सुरक्षित और भरोसेमंद AI Systems सुनिश्चित करना।
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Science: वैज्ञानिक रिसर्च में एआई का इस्तेमाल बढ़ाना।
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Social Empowerment: समाज के हर वर्ग को तकनीक से सशक्त करना।
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Human Capital: भविष्य की जरूरतों के हिसाब से वर्कफोर्स तैयार करना।
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Innovation & Energy: नवाचार के साथ Energy-Efficient एआई सिस्टम बनाना।
ग्लोबल पार्टनरशिप के लिए बड़े ऐलान
समिट के दौरान कई महत्वपूर्ण Global Initiatives की नींव रखी गई है, जो तकनीक की दुनिया में मील का पत्थर साबित होंगे:
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Global AI Impact Commons: इसका मकसद गरीब और विकासशील देशों को सस्ती दरों पर एआई रिसोर्स उपलब्ध कराना है।
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Trusted AI Commons: सुरक्षा और भरोसे को केंद्र में रखकर एआई के उपयोग को बढ़ावा देना।
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Workforce Development Playbook: देशों को AI-driven Economy के लिए तैयार करने और युवाओं को नई स्किल्स सिखाने के लिए एक गाइड तैयार की गई है।
एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष जोर
समिट में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों ने इस बात पर सहमति जताई कि भविष्य का AI Infrastructure न केवल मजबूत होना चाहिए, बल्कि वह Environment Friendly भी हो। Energy-Efficient तकनीकों के जरिए पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना आर्थिक बदलाव (Economic Transformation) लाने पर जोर दिया गया है। इसके लिए Open-Source और सुलभ इकोसिस्टम बनाने का कमिटमेंट किया गया।
बिना किसी बंधन के साझा विकास
खास बात यह है कि यह पूरा फ्रेमवर्क Voluntary and Non-binding (स्वैच्छिक और गैर-बाध्यकारी) रखा गया है। इसका मतलब है कि सभी देश अपनी संप्रभुता का सम्मान करते हुए, आपसी सहयोग से International Cooperation को मजबूत करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस डिक्लेरेशन से Global Economic Growth को एक नया इंजन मिलेगा।
88 देशों का एक साथ आना यह दिखाता है कि भारत अब केवल तकनीक का इस्तेमाल करने वाला देश नहीं, बल्कि दुनिया को तकनीक की राह दिखाने वाला Global Leader बन चुका है।