उत्तर प्रदेश में अपराध और अपराधियों के लिए अब कोई जगह नहीं बची है। राज्य सरकार की कड़क छवि और यूपी पुलिस की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत पुलिस ने अब उन शातिर बदमाशों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है जो लंबे समय से कानून की आंखों में धूल झोंक रहे थे। इसी कड़ी में वाराणसी परिक्षेत्र के डीआईजी की ओर से एक बड़ी कार्रवाई की गई है, जिसने पूरे प्रदेश के जरायम जगत में हड़कंप मचा दिया है।
वाराणसी परिक्षेत्र के डीआईजी ने एक ताजा प्रेस नोट जारी कर 54 ऐसे कुख्यात अपराधियों के नामों का खुलासा किया है, जो अलग-अलग जिलों में वारदातों को अंजाम देकर फरार चल रहे हैं। इन सभी पर पुलिस ने भारी-भरकम इनाम घोषित किया है। पुलिस की इस सक्रियता ने साफ कर दिया है कि अपराधी चाहे कहीं भी छिप जाए, कानून के हाथ उन तक पहुँचकर ही रहेंगे।
डीआईजी द्वारा 50 हजार के इनामिया 54 बदमाशों की सूची जारी
पुलिस विभाग द्वारा जारी इस सूची की सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें शामिल सभी 54 बदमाशों पर 50-50 हजार रुपये का इनाम रखा गया है। वाराणसी परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विभिन्न जिलों के साथ-साथ प्रदेश के अन्य हिस्सों के अपराधियों को भी इस सूची में जगह दी गई है। डीआईजी कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि इन बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और स्थानीय पुलिस की क्राइम ब्रांच टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।
पुलिस ने जनता से भी सहयोग की अपील की है। विभाग का कहना है कि जो भी व्यक्ति इन अपराधियों के बारे में सटीक जानकारी देगा, उसे न केवल इनाम की राशि दी जाएगी, बल्कि उसकी पहचान को पूरी तरह गुप्त रखा जाएगा। पुलिस का यह कदम मुखबिर तंत्र को मजबूत करने और अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए उठाया गया है।
इन बदमाशों पर कसा गया शिकंजा (जिलेवार सूची)
यूपी पुलिस की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत जारी की गई इस लंबी सूची में गाजीपुर के विकास कुमार, वाराणसी के मनीष सिंह, गोरखपुर के सतीश कुमार और प्रयागराज के मोहम्मद ज़ैद जैसे नाम शामिल हैं। इसके अलावा आजमगढ़ से रिंकू यादव, मऊ से सुधीर कुमार, और प्रतापगढ़ से पंकज पाल के नाम भी इस लिस्ट में प्रमुखता से दर्ज हैं।
सूची में पश्चिम से लेकर पूर्व तक के जिलों को कवर किया गया है, जिसमें मेरठ के सोनू उर्फ सोहैल, गाजियाबाद के राहुल त्यागी, बुलंदशहर के रोहित चौधरी और मुजफ्फरनगर के कपिल देव के नाम भी हैं। लखनऊ के रितेश मिश्रा और अयोध्या के राजमणि यादव जैसे अपराधियों पर भी अब 50 हजार का इनाम बोल रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि सूची सार्वजनिक होने के बाद से इन बदमाशों में ‘एनकाउंटर’ का डर साफ देखा जा रहा है। कई अपराधी अब खुद को सरेंडर करने की राह तलाश रहे हैं।
यूपी पुलिस की जीरो टॉलरेंस नीति: अपराधियों में खौफ
उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह से अपराधियों पर नकेल कसी गई है, उसने अपराधियों के मन में कानून का भय पैदा कर दिया है। यूपी पुलिस की जीरो टॉलरेंस नीति का ही असर है कि अब अपराधी खुलेआम घूमने के बजाय जेल की सलाखों के पीछे रहने में ही अपनी भलाई समझ रहे हैं। डीआईजी वाराणसी के प्रेस नोट के बाद अब जिलों की पुलिस सीमाओं पर चेकिंग और दबिश तेज कर दी गई है।
पुलिस महानिदेशक कार्यालय से भी निर्देश जारी किए गए हैं कि इनामी बदमाशों की गिरफ्तारी में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। एसटीएफ की टीमें इन 54 बदमाशों के संभावित ठिकानों पर इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से नजर रख रही हैं। पुलिस का कहना है कि इन सभी को ‘डिटेक्ट’ और ‘अरेस्ट’ करने का अभियान अब निर्णायक मोड़ पर है।
जन-सहयोग और सुरक्षा का आश्वासन
पुलिस प्रशासन ने आम नागरिकों को भरोसा दिलाया है कि वे बिना किसी डर के अपराधियों की सूचना दे सकते हैं। मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में, पुलिस अब तकनीक और सूचना के मेल से ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ कर रही है। जिन 54 बदमाशों की सूची जारी हुई है, उनमें से कई ऐसे हैं जो अवैध रंगदारी, हत्या और लूट जैसे गंभीर मामलों में वांछित हैं।
पुलिस की इस कार्रवाई से आम जनता ने राहत की सांस ली है। वाराणसी, जौनपुर, बलिया और मऊ जैसे जिलों में पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है। यूपी पुलिस का संदेश साफ है—या तो अपराध छोड़ दो, या फिर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहो। – डॉ मंगलेश्वर त्रिपाठी