वित्त मंत्री Suresh Khanna ने बुधवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 9,12,696.35 करोड़ रुपये का बजट पेश किया। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की मौजूदगी में प्रस्तुत यह बजट पिछले साल की तुलना में 12.9 प्रतिशत अधिक है। सरकार ने शिक्षा के लिए 12.4 प्रतिशत और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 6 प्रतिशत बजट निर्धारित किया है। राजकोषीय घाटे को 3 प्रतिशत की सीमा में रखते हुए युवाओं, किसानों और तकनीकी विकास को प्राथमिकता दी गई है।
बजट का आकार और आर्थिक स्थिति
इस बार प्रदेश का बजट 9 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है। वित्त मंत्री ने बताया कि राज्य की प्रति व्यक्ति आय 1,09,844 रुपये तक पहुंच गई है, जो वर्ष 2016-17 की तुलना में दोगुने से अधिक है। लक्ष्य है कि 2025-26 तक इसे 1,20,000 रुपये तक ले जाया जाए।
प्रदेश की जीएसडीपी में 13.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि बेरोजगारी दर घटकर 2.24 प्रतिशत रह गई है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माण केंद्र बन चुका है, जो औद्योगिक विकास की रफ्तार को दर्शाता है।
युवाओं के लिए ‘टेक युवा-समर्थ युवा’ और AI मिशन
युवाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए ‘टेक युवा-समर्थ युवा’ योजना और AI मिशन की घोषणा की गई है। पुलिस विभाग में 2,19,000 से अधिक भर्तियां पूरी की जा चुकी हैं और 83,122 पदों पर प्रक्रिया जारी है।
मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत हर वर्ष 1 लाख सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने का लक्ष्य है, जिसमें युवाओं को बिना ब्याज ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना के अंतर्गत लगभग 50 लाख टैबलेट और स्मार्टफोन वितरित किए जा चुके हैं।
किसानों के लिए मुफ्त बिजली और राहत
किसानों को नलकूपों के जरिए सिंचाई हेतु मुफ्त बिजली आपूर्ति जारी रहेगी। गन्ना किसानों को रिकॉर्ड 3,04,321 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। पेराई सत्र 2025-26 के लिए गन्ने के दाम में 30 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है, जिससे करीब 3000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ होगा।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से 3.12 करोड़ किसानों के खातों में 94,668 करोड़ रुपये सीधे ट्रांसफर किए गए हैं। विश्व बैंक समर्थित यूपी-एग्रीज परियोजना के तहत एक कृषि निर्यात केंद्र बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य कृषि निर्यात बढ़ाना और किसानों की आय में सुधार करना है। सरकार जन विश्वास सुधार ढांचे के तहत सरल पंजीकरण और लाइसेंसिंग के माध्यम से उद्योगों को सहयोग देने की भी योजना बना रही है, जिससे व्यावसायिक संचालन आसान हो जाएगा।
महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा
‘सेफ सिटी’ परियोजना के तहत सीसीटीवी नेटवर्क और एंटी-रोमियो स्क्वॉड को मजबूत किया गया है। वर्किंग वूमेन हॉस्टल निर्माण और मुख्यमंत्री सुमंगला योजना के अंतर्गत 26.81 लाख बालिकाओं को लाभ प्रदान किया गया है। ‘महिला सामर्थ्य योजना’ के तहत दुग्ध उत्पादन में मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियों का गठन किया जा रहा है। महिला गन्ना किसानों को पर्ची निर्गमन में प्राथमिकता दी जा रही है।
इसके साथ ही महिला और बाल विकास के लिए भी कई बड़ी घोषणाएं की गई हैं। इसी में से एक घोषणा सामूहिक विवाह के दौरान कन्याओं को मिलने वाली राशि की रही। बजट के अनुसार अब से लड़कियों को शादी के लिए 1 लाख रुपये मिलेंगे। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजनान्तर्गत सभी वर्ग की पुत्रियों के विवाह हेतु अनुदान राशि रूपये 51,000 रुपये से बढ़ाकर 1.01 लाख रूपये कर दी गई है। योजना हेतु 750 करोड़ रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।
तकनीक और औद्योगिक विकास की दिशा
प्रदेश में ‘स्टेट डाटा अथॉरिटी’ और ‘डाटा सेंटर क्लस्टर्स’ स्थापित किए जाएंगे। नई और उभरती तकनीकों के लिए विशेष टेक्नोलॉजी मिशन गठित होगा।
औद्योगिक प्रगति के लिए ‘सिटी इकोनॉमिक रीजन’ योजना लागू की जाएगी और पंजीकरण व लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा। ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत श्रमिकों के लिए दुर्घटना बीमा और लेबर अड्डों के निर्माण का भी प्रस्ताव शामिल है।
सरकार का दावा है कि यह बजट उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने के साथ-साथ युवाओं, किसानों और महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ठोस कदम साबित होगा।
दवा आपूर्ति को लेकर नई रणनीति
सरकारी अस्पतालों में दवाओं की कमी की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। इसी समस्या के समाधान के लिए सरकार ने आयुर्वेदिक और यूनानी अस्पतालों में प्रमाणित तथा गुणवत्तायुक्त दवाओं की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है। इस उद्देश्य से लखनऊ और पीलीभीत में संचालित दो सरकारी औषधि निर्माण इकाइयों को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा। इन संस्थानों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजना पर काम होगा, ताकि अस्पतालों में दवाओं की कमी की स्थिति पैदा न हो और मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।
ग्रामीण क्षेत्रों में आयुष सेवाओं का महत्व
ग्रामीण और सुदूर इलाकों में आयुष सेवाएं विशेष रूप से कारगर साबित हो रही हैं। जहां बड़े अस्पतालों तक पहुंचना आसान नहीं होता, वहां आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक चिकित्सालय लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। सरकार का मानना है कि आयुष ढांचे को मजबूत बनाने से स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और प्रभावशीलता दोनों बढ़ेंगे। पिछले कुछ वर्षों में आयुर्वेद और योग को वैश्विक स्तर पर भी व्यापक पहचान मिली है। सरकार चाहती है कि प्रदेश इस क्षेत्र में अग्रणी स्थान हासिल करे। मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों की संख्या में वृद्धि के साथ-साथ दवा निर्माण व्यवस्था को सशक्त बनाना इसी दिशा में उठाया गया अहम कदम माना जा रहा है।
क्या बदलेगी आयुष की तस्वीर?
कुल 2,867 करोड़ रुपये का यह बजटीय प्रावधान केवल एक आंकड़ा भर नहीं, बल्कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को नई मजबूती देने का प्रयास है। सरकार का स्पष्ट संकेत है कि आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के साथ-साथ आयुष को भी समान महत्व दिया जाएगा, ताकि समाज के हर वर्ग तक किफायती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकें।
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