RSS शताब्दी वर्ष: बाराबंकी में भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन, सामाजिक समरसता, स्वदेशी, पर्यावरण पर जोर

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में बाराबंकी जिले में भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। आयोजित कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं द्वारा मुख्य अतिथि का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चंपत राय ने समाज को पांच परिवर्तन का संदेश दिया। उन्होंने सामाजिक समरसता, पारिवारिक मूल्यों की मजबूती, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी को बढ़ावा देने और नागरिक कर्तव्यों के पालन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन पांच परिवर्तनों को अपनाकर ही मजबूत समाज और सशक्त राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है। अपने संबोधन में चंपत राय ने कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर पूरे भारतवर्ष में एक लाख स्थानों पर हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इन सम्मेलनों का उद्देश्य समाज में एकता, समरसता और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करना है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष समारोह के अंतर्गत बुधवार को महर्षि नगर में एक भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि डॉक्टर हेडगेवार द्वारा स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने 100 वर्षों के सफर में विषम परिस्थितियों के बावजूद राष्ट्रभक्ति और स्वदेश प्रेम के अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किए हैं।

चंपत राय ने कहा कि देश के महापुरुषों से प्रेरणा लेकर संगठित प्रयासों के माध्यम से राष्ट्र उत्थान के लिए सक्रिय भूमिका निभाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहकर ही विश्वगुरु बन सकता है। यदि समाज अपनी सांस्कृतिक जड़ों को भूलता है तो सनातन परंपरा कमजोर हो जाएगी।

उन्होंने लोगों से अपनी जड़ों की ओर लौटने और गौरवशाली सनातन संस्कृति को संरक्षित रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज में व्याप्त बुराइयों को चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए अपनी सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा के साथ आगे बढ़ना होगा, ताकि भारत निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर हो सके।

मुख्य वक्ता ने कहा कि भारत को नुकसान पहुंचाने वाली शक्तियां स्वयं को भारत माता की संतान कहने का अधिकार नहीं रखतीं। उन्होंने हिंदू समाज से संगठित होकर सक्रियता के साथ देश के विकास में भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पूर्वजों, महापुरुषों और धार्मिक ग्रंथों के विचारों से आने वाली पीढ़ी को संस्कारित करना होगा। यदि समाज संगठित हो जाए तो भारत एक बार फिर ‘सोने की चिड़िया’ कहलाएगा।

राम मंदिर पर बोलते हुए चंपत राय ने कहा कि यह केवल एक धार्मिक संरचना नहीं, बल्कि हिंदू समाज के सदियों के संघर्ष, अटूट आस्था और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन ने जाति-पाति के भेदभाव को समाप्त कर समाज को एकजुट करने का ऐतिहासिक कार्य किया है।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि स्वामी चेतनानंद तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता योगेंद्र सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए। भारत माता की आरती के साथ सम्मेलन का समापन हुआ। इस अवसर पर जिला प्रचारक रवि प्रकाश, जिला कार्यवाह सुधीर, सह जिला कार्यवाह पारितोष, विभम, अमितेश, राजीव खरे, मयंक, उदय और जयशिव सहित कई स्वयंसेवक एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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