उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने शैक्षिक सत्र 2026 से कक्षा 9 और कक्षा 11 में व्यावसायिक शिक्षा को अनिवार्य करने का बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत IT, ITS, इलेक्ट्रॉनिक रेफ्रिजरेशन, एयर कंडीशनर, ब्यूटीशियन और वेलनेस जैसे कोर्स शामिल किए जा रहे हैं। शिवचरण दास कन्हैयालाल इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य लाल चंद्र पाठक ने बताया कि इससे छात्रों में व्यावसायिक कौशल का विकास होगा और वे स्वरोजगार शुरू कर सकेंगे। कंप्यूटर विज्ञान के प्रवक्ता विश्वनाथ मिश्र ने बताया कि हाई स्कूल में 16 और इंटरमीडिएट में 23 व्यवसायिक विषय पेश किए गए हैं। भारत सरकार के व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र के निदेशक अभय कुमार पांडे ने कहा कि यह पहल छात्रों को रोजगार और व्यवसाय की दिशा में मार्गदर्शन देगी। इससे कौशल विकास और व्यावसायिक क्षमता में सफलता मिली है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ रोज़गार से जुड़ी व्यावहारिक और कौशल आधारित शिक्षा प्रदान करना है, ताकि वे भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें।
रोजगारोन्मुखी शिक्षा पर फोकस
यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि इस पहल के अंतर्गत विषय समितियों द्वारा आईटी एवं इससे जुड़े क्षेत्रों के लिए अनुमोदित पाठ्यक्रम परिषद को सौंपे गए हैं। इनमें प्रमुख रूप से—
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सूचना प्रौद्योगिकी (IT)
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इलेक्ट्रॉनिक्स
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परिधान
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सौंदर्य एवं आरोग्य (Beauty & Wellness)
जैसे व्यावसायिक ट्रेड शामिल हैं।

विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया गया पाठ्यक्रम
सचिव भगवती सिंह ने बताया कि इन सभी ट्रेड्स के लिए रोजगारपरक पाठ्यक्रम तैयार करने हेतु विषय-विशेषज्ञों ने कई चरणों में विस्तृत बैठकें कीं। इन बैठकों के बाद ऐसा पाठ्यक्रम विकसित किया गया है जो न केवल अकादमिक दृष्टि से मजबूत है, बल्कि वर्तमान तकनीकी आवश्यकताओं और उद्योग जगत की अपेक्षाओं के अनुरूप भी है।
कौशल आधारित और व्यवहारिक शिक्षा
विशेषज्ञ समिति द्वारा अनुमोदित पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता (Employability) को केंद्र में रखा गया है। इसमें—
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व्यवहारिक ज्ञान
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कौशल आधारित प्रशिक्षण
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उद्योग से जुड़ी आवश्यक दक्षताएँ
को प्रमुखता से शामिल किया गया है, ताकि छात्र पढ़ाई के दौरान ही व्यावसायिक कौशल अर्जित कर सकें।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप पहल
यूपी बोर्ड का यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के उद्देश्यों के अनुरूप है। इस पहल से विद्यार्थियों में—
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कौशल विकास
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आत्मनिर्भरता
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व्यावसायिक दक्षता
को बढ़ावा मिलेगा और वे केवल डिग्री पर निर्भर न रहकर व्यवहारिक रूप से भी सक्षम बन सकेंगे।
भविष्य के लिए तैयार करेगा यह निर्णय
भगवती सिंह ने कहा कि माध्यमिक शिक्षा परिषद का यह निर्णय विद्यालयी शिक्षा को रोजगार से जोड़ने, विद्यार्थियों को व्यवहारिक ज्ञान प्रदान करने और उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक सार्थक और दूरदर्शी प्रयास है।
यूपी बोर्ड द्वारा लिया गया यह फैसला न केवल शिक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि इससे लाखों छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ कैरियर और रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे। यह पहल उत्तर प्रदेश में कौशल आधारित शिक्षा को मजबूत आधार प्रदान करेगी और युवाओं को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करेगी।
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