भारत की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को तकनीकी रूप से और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को देश के पहले नेशनल IED डेटा मैनेजमेंट सिस्टम (NIDMS) का उद्घाटन किया। यह अत्याधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) से जुड़े खतरों से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत डेटा सिस्टम के रूप में काम करेगा। अधिकारियों के अनुसार, यह प्रणाली भारत के काउंटर-IED और आतंकवाद विरोधी ढांचे को नई मजबूती प्रदान करेगी।
NIDMS को नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) द्वारा विकसित किया गया है। यह एक सुरक्षित और केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसका उद्देश्य देशभर में IED से जुड़ी घटनाओं, पैटर्न, तकनीकों और जांच से संबंधित सूचनाओं को व्यवस्थित रूप से एकत्रित करना, उनका विश्लेषण करना और संबंधित एजेंसियों के साथ साझा करना है।
![]()
क्या है NIDMS और कैसे करेगा काम?
नेशनल IED डेटा मैनेजमेंट सिस्टम को एक यूनिफाइड नेशनल रिपॉजिटरी के रूप में डिजाइन किया गया है, जहां देश में कहीं भी होने वाले IED धमाकों या विस्फोटक घटनाओं से जुड़ा डेटा अपलोड किया जा सकेगा। इस प्लेटफॉर्म के जरिए सभी राज्य पुलिस बल, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPFs), जांच एजेंसियां और सुरक्षा संगठन एक ही डिजिटल सिस्टम पर सूचनाएं साझा कर सकेंगे।
NIDMS ब्लास्ट के बाद की जांच (Post-Blast Investigation) में अहम भूमिका निभाएगा। किसी भी IED घटना के बाद विस्फोटक के प्रकार, ट्रिगर मैकेनिज्म, इस्तेमाल की गई सामग्री, पैटर्न और तकनीकी विवरण को सिस्टम में दर्ज किया जाएगा। इससे अलग-अलग राज्यों में काम कर रहे जांचकर्ताओं को पहले की घटनाओं से तुलना करने, समान पैटर्न पहचानने और संदिग्ध नेटवर्क तक पहुंचने में मदद मिलेगी।
![]()
जांच और समन्वय में आएगी तेजी
इस प्लेटफॉर्म का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह सिंगल-क्लिक एक्सेस विंडो के रूप में काम करेगा। अब तक IED से जुड़ा डेटा अलग-अलग केस फाइलों, विभागों और राज्यों में बिखरा रहता था, जिससे जांच प्रक्रिया धीमी और जटिल हो जाती थी। NIDMS के जरिए केंद्र और राज्य की एजेंसियों, आतंकवाद विरोधी संगठनों और CAPF को रियल टाइम में अहम जानकारी मिल सकेगी।
यूनिफाइड और डेटा-ड्रिवन अप्रोच से जांच एजेंसियों को IED से जुड़े ट्रेंड्स ट्रैक करने, हमलों के पैटर्न समझने और भविष्य के खतरों का अनुमान लगाने में मदद मिलेगी। इससे न सिर्फ जांच की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि समय रहते सुरक्षा उपाय भी मजबूत किए जा सकेंगे।
![]()
क्यों जरूरी था NIDMS?
भारत के कई हिस्सों में IED लंबे समय से एक गंभीर सुरक्षा चुनौती बने हुए हैं। आतंकवादी और उग्रवादी संगठन सुरक्षा बलों और आम नागरिकों को निशाना बनाने के लिए IED का इस्तेमाल करते रहे हैं। जम्मू-कश्मीर, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित इलाके और कुछ शहरी क्षेत्र ऐसे खतरों के प्रति संवेदनशील रहे हैं।
इन चुनौतियों को देखते हुए NIDMS का उद्घाटन सरकार की उस सोच को दर्शाता है, जिसमें तकनीक, डेटा एनालिटिक्स और इंटेलिजेंस-शेयरिंग को आंतरिक सुरक्षा का मजबूत आधार बनाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह प्लेटफॉर्म केवल वर्तमान जरूरतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समय के साथ इसमें नए डेटासेट, आधुनिक एनालिटिकल टूल्स और एडवांस फीचर्स जोड़े जाएंगे।
अमित शाह ने कहा – NIDMS से अलग-अलग केस फाइलों में बिखरा डेटा अब एक क्लिक पर उपलब्ध होगा और यह बम विस्फोटों के पैटर्न, Modus Operandi व इसके सटीक विश्लेषण का मजबूत प्लेटफॉर्म बनेगा।
NSG is a world-class, zero-error force.@nsgblackcats pic.twitter.com/pF4G0XKr1W
— Amit Shah (@AmitShah) January 9, 2026
यह भी पढ़ें: India Energy Week 2026: भारत ऊर्जा सप्ताह का आयोजन 27 जनवरी से गोवा में होगा
भविष्य की सुरक्षा रणनीति में अहम भूमिका
NIDMS से भारत की काउंटर-IED क्षमता को संस्थागत रूप मिलेगा। यह सिस्टम न केवल घटनाओं के बाद की जांच में सहायक होगा, बल्कि रोकथाम (Prevention) और तैयारी (Preparedness) को भी बेहतर बनाएगा। संभावित खतरों की पहले पहचान, सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और तेज प्रतिक्रिया क्षमता, इस प्लेटफॉर्म की प्रमुख उपलब्धियां होंगी।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उद्घाटन के मौके पर संकेत दिया कि सरकार आंतरिक सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतेगी और आधुनिक तकनीक के जरिए देश को सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। NIDMS इसी दिशा में एक मजबूत और दूरदर्शी पहल के रूप में देखा जा रहा है।







