ग्लूकोमा: ‘साइलेंट थेफ्ट ऑफ साइट’ और मोबाइल के खतरे
ग्लूकोमा (Glaucoma) को अक्सर ‘साइलेंट थेफ्ट ऑफ साइट’ कहा जाता है। इसका कारण यह है कि यह बीमारी दबे पांव आती है। शुरुआत में न तो किसी प्रकार का दर्द होता है और न ही कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई देते हैं। लेकिन जब मरीज को इसका पता चलता है, तब तक आंखों की रोशनी पर गंभीर असर हो चुका होता है, जिसे सामान्य चिकित्सा के जरिए ठीक करना संभव नहीं होता।
इस गंभीर बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से हर साल जनवरी में ग्लूकोमा अवेयरनेस मंथ मनाया जाता है। इस दौरान लोगों को इसके लक्षण, कारण और बचाव के बारे में जानकारी दी जाती है।
ग्लूकोमा और आंखों का दबाव
ग्लूकोमा का मुख्य कारण आंखों के अंदर दबाव (Intraocular Pressure) का बढ़ना है। बढ़ते दबाव से आंखों में देखने वाली नस (Optic Nerve) कमजोर हो जाती है, जिससे धीरे-धीरे दृष्टि में कमी आती है।
हालांकि विज्ञान पूरी तरह से यह साबित नहीं करता कि सिर्फ मोबाइल का इस्तेमाल ग्लूकोमा का कारण बनता है, लेकिन यह स्थिति को बढ़ाने में योगदान जरूर कर सकता है।
मोबाइल कैसे बढ़ाता है आंखों पर दबाव?
मोबाइल के लगातार और रात के समय इस्तेमाल से आंखों पर विभिन्न तरह का तनाव बढ़ता है। यह तीन मुख्य कारणों से आंखों की सेहत पर असर होता है:
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अंधेरे में स्क्रीन देखना:
जब आप अंधेरे कमरे में मोबाइल की चमकदार स्क्रीन देखते हैं, तो आंखों पर अत्यधिक जोर पड़ता है। लगातार स्क्रीन देखने से आंखों की नसें थक जाती हैं और लंबी अवधि में दबाव बढ़ सकता है। -
पलकें कम झपकाना:
मोबाइल देखने के दौरान अक्सर लोग पलकें कम झपकाते हैं। इसके कारण आंखों में नमी कम हो जाती है, जिससे आंखें सूखी और लाल हो जाती हैं। ड्राई आई से आंखों का दबाव बढ़ सकता है और ग्लूकोमा का खतरा बढ़ सकता है। -
नींद और ब्लू लाइट:
मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट नींद को प्रभावित करती है। नींद पूरी न होने पर शरीर में तनाव हार्मोन बढ़ते हैं और आंखों का दबाव बढ़ सकता है। यही कारण है कि रात में मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल ग्लूकोमा के खतरे को बढ़ा सकता है।
ग्लूकोमा का खतरा किन लोगों में ज्यादा
कुछ लोगों में ग्लूकोमा का खतरा सामान्य से ज्यादा होता है। यदि आपकी उम्र 40 वर्ष से अधिक है, या परिवार में पहले किसी को ग्लूकोमा रहा है, या आपको डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी स्थितियां हैं, तो आपको और सतर्क रहने की जरूरत है।
शुरुआती लक्षण अक्सर नजरअंदाज किए जाते हैं, जैसे:
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सिरदर्द
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धुंधला दिखाई देना (Blur Vision)
कई लोग इसे केवल फोन देखने की थकान मान लेते हैं, जबकि यह ग्लूकोमा के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
ग्लूकोमा से बचाव के उपाय
ग्लूकोमा का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन कुछ साधारण आदतें और सावधानियां आपकी आंखों को सुरक्षित रख सकती हैं:
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सोने से पहले मोबाइल से दूरी बनाएं:
सोने से कम से कम 30-60 मिनट पहले मोबाइल का इस्तेमाल बंद कर दें। इससे नींद बेहतर आती है और आंखों पर दबाव कम होता है। -
फोन की सेटिंग बदलें:
मोबाइल में ‘नाइट मोड’ या ‘वार्म लाइट’ का इस्तेमाल करें और ब्राइटनेस कम रखें। इससे आंखों पर जोर कम होगा। -
नियमित चेकअप:
ग्लूकोमा से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है साल में कम से कम एक बार आंखों का चेकअप कराना। 40 साल से ऊपर की उम्र में आंखों के दबाव और ऑप्टिक नस की जांच जरूर करवाएं।यह भी पढ़ें : यूपी समेत उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड, कोहरा और शीतलहर से जनजीवन प्रभावित







