आपराधिक साजिश
रेलवे में नौकरी के बदले जमीन लेने से जुड़े बहुचर्चित ‘लैंड फॉर जॉब’ घोटाले में एक बड़ा और निर्णायक मोड़ आ गया है। दिल्ली के राउज एवेन्यू स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी व बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, बेटियों मीसा भारती और हेमा यादव सहित कुल 41 आरोपियों पर आरोप तय कर दिए हैं।
अदालत ने अपने आदेश में इस पूरे मामले को केवल व्यक्तिगत लेन-देन नहीं, बल्कि एक संगठित आपराधिक साजिश करार दिया है, जिसमें कथित तौर पर पूरे परिवार ने एक सिंडिकेट की तरह काम किया।
क्या है ‘लैंड फॉर जॉब’ मामला?
‘लैंड फॉर जॉब’ मामला उस दौर से जुड़ा है, जब 2004 से 2009 के बीच लालू प्रसाद यादव केंद्र की यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के अनुसार, इसी अवधि में रेलवे के विभिन्न जोनों में ग्रुप-डी पदों पर बिना विज्ञापन और बिना निर्धारित चयन प्रक्रिया के नियुक्तियां की गईं।
आरोप है कि इन नौकरियों के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से बिहार में कीमती जमीनें बेहद कम कीमत पर या गिफ्ट डीड के जरिए लालू परिवार के नाम कराई गईं।
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अदालत की सख्त टिप्पणी
राउज एवेन्यू कोर्ट ने आरोप तय करते हुए कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों से प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट होता है कि यह अलग-अलग सौदों का मामला नहीं है। अदालत के अनुसार,
“आरोपितों की भूमिकाएं आपस में जुड़ी हुई थीं और सभी ने साझा उद्देश्य के तहत काम किया। यह मामला सरकारी पद के दुरुपयोग और निजी लाभ के लिए रची गई सुनियोजित आपराधिक साजिश का प्रतीत होता है।”
अदालत ने यह भी कहा कि पूरे घटनाक्रम में रेल मंत्रालय की शक्तियों का दुरुपयोग कर निजी संपत्ति अर्जित की गई।
जमीन के बदले नौकरी: कैसे हुआ खेल?
CBI की चार्जशीट के अनुसार, कई मामलों में जमीन का बाजार मूल्य करोड़ों में था, लेकिन उसे लाखों रुपये या उससे भी कम कीमत पर लालू परिवार के सदस्यों के नाम ट्रांसफर कराया गया।
चर्चित मामला – 6 फरवरी 2008
पटना निवासी किशुन देव राय ने अपनी 3,375 वर्ग फीट जमीन मात्र 3.75 लाख रुपये में राबड़ी देवी के नाम रजिस्ट्री कर दी।
इसके बाद उसी वर्ष उनके परिवार के तीन सदस्यों — राजकुमार सिंह, मिथिलेश कुमार और अजय कुमार — को मध्य रेलवे, मुंबई में ग्रुप-डी की नौकरी मिल गई।
CBI ने इसे नौकरी के बदले जमीन का सीधा उदाहरण बताया है।
26 लाख में 4.39 करोड़ की जमीन
जांच एजेंसी का दावा है कि ऐसे ही कई सौदों के जरिए लालू परिवार ने एक लाख वर्ग फीट से अधिक जमीन सिर्फ 26 लाख रुपये में हासिल कर ली, जबकि उस समय सर्किल रेट के अनुसार इन जमीनों की कीमत करीब 4.39 करोड़ रुपये थी।
कई मामलों में नकद भुगतान दिखाया गया, जबकि कुछ जगहों पर गिफ्ट डीड के माध्यम से जमीन ट्रांसफर कराई गई।
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बिना विज्ञापन, बिना प्रक्रिया नियुक्तियां
CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में सामने आया कि:
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किसी भी भर्ती के लिए कोई सार्वजनिक विज्ञापन जारी नहीं किया गया
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रेलवे की तय चयन प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ
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कुछ मामलों में आवेदन मिलने के महज तीन दिन के भीतर नियुक्ति पत्र जारी कर दिए गए
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कई आवेदनों में अधूरे पते और दस्तावेज होने के बावजूद चयन कर लिया गया
सात सौदों पर टिकी पूरी जांच
चार्जशीट में सात प्रमुख डील का उल्लेख किया गया है, जिनसे पूरे घोटाले की संरचना सामने आती है। इनमें जमीन देने के बदले एक या एक से अधिक लोगों को रेलवे में नौकरी मिलने के आरोप हैं।
कुछ मामलों में पहले नौकरी दी गई और कई साल बाद जमीन ट्रांसफर की गई, जिससे जांच एजेंसियों को यह एक पूर्व नियोजित सौदा प्रतीत होता है।
नाबालिग बेटों के नाम जमीन
CBI की चार्जशीट का एक और चौंकाने वाला पहलू यह है कि तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव, जो उस समय नाबालिग थे, उनके नाम भी जमीन ट्रांसफर की गई।
आरोप है कि 14 जून 2005 को एक व्यक्ति ने अपने बेटे को रेलवे में नौकरी दिलाने के बदले मात्र 5,700 रुपये में दो जमीनें तेजस्वी और तेज प्रताप के नाम कर दीं, जिनकी देखरेख राबड़ी देवी के संरक्षण में बताई गई।
छापेमारी और कानूनी कार्रवाई
मामले की जांच के तहत मई 2022 में CBI ने लालू यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती और अन्य परिजनों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इसके बाद अगस्त में दोबारा छापे डाले गए।
जांच के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया।
