प्रयागराज में माघ मेला 2025 की तैयारियों का जायजा लेने के लिए डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य अचानक संगम क्षेत्र पहुंचे। सोमवार देर शाम डिप्टी सीएम के निरीक्षण से अधिकारियों में हड़कंप मच गया। वे सबसे पहले संगम नोज पर पहुंचे, जहां उन्होंने गंगाजल से आचमन किया और पूजा-अर्चना कर माघ मेले के सकुशल संपन्न होने की कामना की।
माघ मेले को मिनी कुम्भ के रूप में मनाने के निर्देश
डिप्टी सीएम ने माघ मेला को मिनी कुम्भ के रूप में मनाने की बात की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी तैयारियां समय पर पूरी हों। उन्होंने कहा कि सरकार ने माघ मेला को मिनी कुम्भ के रूप में मनाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। जो भी कमियां हैं, उन्हें जल्द से जल्द पूरा किया जाएगा। उन्होंने तीन जनवरी से मेला प्रारंभ होने तक किसी भी काम को लंबित न रखने का निर्देश दिया।
तीर्थयात्रियों से कल्पवास की अपील
केशव प्रसाद मौर्य ने तीर्थयात्रियों से अपील की कि केवल गंगा मइया में डुबकी लगाने से ही संतुष्ट न रहें, बल्कि एक महीने का कल्पवास करने का प्रयास करें। अगर पूरी तरह से कल्पवास नहीं कर सकते तो कम से कम दो-चार या पांच दिन का अल्पवास करके मेले का आध्यात्मिक और अलौकिक आनंद लें।

जमीन आवंटन पर संतों की नाराजगी
मेला क्षेत्र में जमीन आवंटन को लेकर संतों की नाराजगी पर डिप्टी सीएम ने कहा कि सभी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जमीन आवंटन और अन्य कामों के लिए अभियान चलाकर काम पूरा करें। उन्होंने कहा कि माघ मेला के आयोजन में कोई कमी नहीं रखी जाएगी और यहां आने वाले सभी साधु-संतों, कल्पवासियों और श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं होगा।
गंगा जल की उपलब्धता का आश्वासन
गंगा जल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए डिप्टी सीएम ने सिंचाई विभाग को निर्देश दिए हैं कि मेले के दौरान गंगा में पर्याप्त जल की उपलब्धता बनी रहे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार आने के बाद से गंगा अविरल और निर्मल हुई है और अब राज्य में भाजपा सरकार के आने के बाद हर माघ मेला, कुंभ और महाकुंभ दिव्य और भव्य हो रहा है।
सुरक्षा और व्यवस्था की कड़ी निगरानी
डिप्टी सीएम के निर्देशों के बाद माघ मेला के आयोजन की तैयारियां और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी निगरानी में रखी गई हैं। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो और उनका अनुभव सुकूनभरा हो।
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