जेवर एयरपोर्ट के पास अवैध निर्माण पर प्रशासन का सख़्त एक्शन, 28 लोगों पर FIR

जेवर एयरपोर्ट के पास अवैध निर्माण पर प्रशासन का सख़्त एक्शन

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ग्रेटर नोएडा के जेवर एयरपोर्ट के पास अवैध निर्माण को लेकर प्रशासन सख़्त हो गया है। नगला हुकम सिंह गांव के 28 लोगों पर FIR दर्ज, जमीन अधिग्रहण और पुनर्वास नीति के दुरुपयोग का आरोप।

ग्रेटर नोएडा में निर्माणाधीन नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) के आसपास अवैध निर्माण का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। एयरपोर्ट के दूसरे चरण के विस्तार से जुड़ी अधिग्रहित भूमि पर नियमों को दरकिनार कर किए जा रहे निर्माण कार्यों को लेकर अब जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। नगला हुकम सिंह गांव के 28 लोगों के खिलाफ रबूपुरा कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया है।

प्रशासन का आरोप है कि ये निर्माण कार्य पुनर्वास और विस्थापन नीति का अनुचित लाभ उठाने के उद्देश्य से किए जा रहे हैं, जबकि संबंधित भूमि का मुआवजा पहले ही किसानों को दिया जा चुका है और जमीन अब नागरिक उड्डयन विभाग के नाम दर्ज हो चुकी है।

लेखपाल की तहरीर पर दर्ज हुआ मुकदमा

नगला हुकम सिंह गांव के लेखपाल प्रत्यूष राही पाठक की ओर से दी गई तहरीर के आधार पर रबूपुरा पुलिस ने यह कार्रवाई की है। तहरीर में उल्लेख है कि जेवर एयरपोर्ट के विस्तार के लिए करीब 1182 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए वर्ष 2022 में अधिसूचना जारी की जा चुकी है।

इसके बावजूद, अधिसूचित क्षेत्र में कुछ लोग बिना अनुमति पक्के निर्माण करा रहे हैं, जो न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग का भी स्पष्ट उदाहरण है।

अधिग्रहित भूमि पर निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित

प्रशासन के अनुसार, एयरपोर्ट के दूसरे चरण के लिए रनहेरा, कुरैब, वीरमपुर, करौली बांगर, दयानतपुर और मूढ़रह गांवों की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में शामिल है। अधिसूचना जारी करते समय स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि जब तक अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक बिना जिला प्रशासन की अनुमति के किसी भी प्रकार का निर्माण या जमीन की खरीद-फरोख्त पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी

इसके बावजूद नियमों की अनदेखी कर निर्माण किया गया, जिसे प्रशासन ने गंभीर उल्लंघन माना है।

पुनर्वास नीति के दुरुपयोग का आरोप

प्रशासन का कहना है कि जिन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है, उन्होंने मुआवजा प्राप्त करने के बाद भी अवैध निर्माण कराया, ताकि भविष्य में पुनर्वास और विस्थापन नीति का अतिरिक्त लाभ लिया जा सके। अधिकारियों के मुताबिक इस तरह की गतिविधियां न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि शासन-प्रशासन की छवि को भी धूमिल करती हैं।

ग्रामीणों को कई बार नोटिस जारी कर निर्माण रोकने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद अवैध निर्माण जारी रहा।

इन लोगों के खिलाफ दर्ज हुई FIR

पुलिस के अनुसार नगला हुकम सिंह व माजरा करौली गांव के जिन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है, उनमें नरेंद्र, हरेंद्र, धीरेन्द्र, नरेश, अंकित, सचिन, पुष्पेंद्र, अमर, बृजेश, अवधेश, वीरबहादुर, अंकुर, दीपक, सुंदर, विनोद, मोनू, मनीष, रसफूल, हरवीर, ध्रुव, सुधीर, परवीन और समयवीर समेत कुल 28 नाम शामिल हैं।

मामले की जांच शुरू कर दी गई है और प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि दोषी पाए जाने पर आगे और भी सख्त कार्रवाई हो सकती है।

पिछले माह बड़ा हादसा, चार मजदूरों की मौत

अवैध निर्माण की गंभीरता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि पिछले महीने नगला हुकम सिंह गांव में एक मकान गिरने से चार मजदूरों की मौत हो गई थी। हादसे के समय मजदूर तीसरी मंजिल के लेंटर को खोल रहे थे, तभी पूरा ढांचा भरभराकर गिर गया।

जांच में सामने आया था कि यह मकान भी पुनर्वास नीति का लाभ लेने के लिए तय मानकों की अनदेखी कर बनाया जा रहा था। इस घटना के बाद प्रशासन ने पूरे इलाके में अवैध निर्माण को लेकर सतर्कता बढ़ा दी थी।

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