Tibet Earthquake : तिब्बत में आए जोरदार भूकंप ने लोगों को दहशत में डाल दिया। शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, भूकंप के बाद 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि 46 लोग घायल बताए गए। कई इमारतों को नुकसान पहुंचा है और प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है। लगातार झटके महसूस होने से लोगों की चिंता बढ़ गई। आइए जानते हैं तिब्बत भूकंप से जुड़ी अहम बातें। रिपोर्ट के मुताबिक, तिब्बत में भूकंप की तीव्रता 7 के आसपास दर्ज की गई। झटके महसूस होने के बाद लोग घरों से बाहर निकल आए। कई जगह इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं और मलबे में फंसे लोगों की तलाश शुरू की गई। हालांकि, नुकसान का वास्तविक आंकड़ा राहत एवं बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ बदल सकता है।
चार घंटे में 13 बार महसूस हुए झटके
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मुख्य भूकंप के बाद कई बार झटके महसूस किए गए। रिपोर्ट में कुल 13 झटकों का जिक्र है। इससे प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ गई। भूकंप के बाद आने वाले छोटे या बड़े झटकों को आफ्टरशॉक कहा जाता है। ऐसे झटकों के दौरान पहले से कमजोर हो चुकी इमारतों को और नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को प्रशासन की सलाह मानने और क्षतिग्रस्त इमारतों से दूर रहने की जरूरत है। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के हवाले से दी गई जानकारी के मुताबिक, भूकंप भारतीय समयानुसार रात करीब 8:03 बजे आया था। इसका केंद्र उत्तरी तिब्बत के नागकू शहर के आसपास बताया गया, जो ल्हासा से लगभग 400 किलोमीटर दूर है।
रिपोर्ट में भूकंप की गहराई करीब 173 किलोमीटर बताई गई है। भूकंप का असर आसपास के क्षेत्रों में भी महसूस होने की खबर है।
राहत और बचाव अभियान जारी
भूकंप के बाद प्रभावित इलाके में आपातकालीन प्रतिक्रिया शुरू की गई। रिपोर्ट के अनुसार, 300 से अधिक पुलिसकर्मियों और 347 बचावकर्मियों को राहत कार्यों में लगाया गया। टीमें मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रही हैं। प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाने और सुरक्षित स्थानों पर लोगों को ले जाने का काम भी जारी है। प्रशासन की प्राथमिकता घायलों को इलाज उपलब्ध कराना और प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखना है।
तिब्बत में बार-बार क्यों आते हैं भूकंप?
तिब्बती पठार भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। इसकी एक बड़ी वजह भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच होने वाली हलचल है। जब पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटों में तनाव जमा होता है और चट्टानों में अचानक हलचल होती है, तो भूकंप आ सकता है। हालांकि, किसी खास भूकंप की वजह और उसके प्रभाव का आकलन वैज्ञानिक जांच के आधार पर ही किया जाता है।
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