PM Modi Dussehra 2026 celebrations: देशभर में इन दिनों विजयदशमी (Vijayadashami) का पर्व बहुत ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को पूर्वी दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन स्थित डीडीए उत्सव ग्राउंड में आयोजित भव्य दशहरा समारोह में हिस्सा लिया। कार्यक्रम की शुरुआत उन्होंने ‘सियावर रामचंद्र की जय’ के जयकारे के साथ की। इस दौरान पूरा मैदान भगवान श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा और माहौल पूरी तरह से भक्तिमय नजर आया।
देश का कोना-कोना राममय और त्योहारों की प्राण ऊर्जा
समारोह में मौजूद जनसमूह को संबोधित करते हुए PM Modi ने कहा कि आज देश का हर कोना राममय हो चुका है। गांव से लेकर शहर तक हर जगह रामलीलाओं का मंचन हो रहा है। उन्होंने कहा कि रामलीलाएं केवल मनोरंजन या परंपरा नहीं हैं, बल्कि ये अत्याचार और आतंक के अंत का उद्घोष करती हैं और असत्य पर सत्य की जीत का पक्का विश्वास दिलाती हैं। यही कारण है कि ये पर्व हमारी संस्कृति की असली प्राण ऊर्जा हैं। हजारों वर्षों से इस देश की संस्कृति ने श्रीराम की उपासना की है, क्योंकि उन्होंने मानवता के इतिहास में सबसे ऊंचे और अतुलनीय आदर्श स्थापित किए हैं।
भगवान श्रीराम का जीवन और रामराज्य का सच्चा स्वरूप
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि श्रीराम ने अपने जीवन में अनगिनत कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन कभी भी सच्चाई और नीति का मार्ग नहीं छोड़ा। उनके जीवन की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि न तो राजपद मिलने पर उनके चेहरे पर कोई घमंड या खुशी झलकी और न ही वनवास जाने पर कोई दुख हुआ। उन्होंने हर संकट को हंसते हुए सहकर धर्म की स्थापना की। वनवास के दौरान उन्होंने निषादराज को गले लगाया और माता शबरी को मान-सम्मान दिया। उन्होंने समाज में दया, प्रेम और समरसता की मिसाल कायम की। अयोध्या लौटने के बाद उन्होंने जिस रामराज्य की स्थापना की, वह आज भी सुशासन का सबसे बड़ा पैमाना माना जाता है। रामराज्य का अर्थ ही ऐसा शासन है जहां कोई भेदभाव न हो, हर व्यक्ति को न्याय मिले और शासन का मुख्य उद्देश्य केवल जनकल्याण हो।
सामूहिक शक्ति और विकसित भारत का संकल्प
अपने संबोधन के अंत में पीएम मोदी ने कहा कि प्रभु श्रीराम के जीवन से हमें बहुत बड़ी सीख मिलती है। जीवन में चाहे कितनी भी बड़ी चुनौती क्यों न आ जाए, हमें कभी दूसरों के भरोसे नहीं बैठना चाहिए। हमें अपनी ताकत, अपने संसाधनों और अपने परिश्रम पर भरोसा रखना चाहिए। जब समुद्र सामने था और लंका दूर थी, तब राम जी ने अकेले सब कुछ करने के बजाय जनता की सामूहिक शक्ति को जगाया और असंभव लगने वाले लक्ष्य को भी संभव कर दिखाया। आज हमारे सामने भी विकसित और आत्मनिर्भर भारत बनाने का लक्ष्य है। राष्ट्र तभी आगे बढ़ता है जब उसे अपनी विरासत पर गर्व हो। आज देश इसी भावना के साथ अपनी पहचान और संस्कृति को सहेजते हुए आगे बढ़ रहा है।
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