Border Security Force : भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में पश्चिम बंगाल में कदम उठाए जा रहे हैं। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के महानिदेशक प्रवीण कुमार ने सीमा पर बाड़बंदी और जरूरी बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध कराने पर राज्य सरकार का आभार जताया है। इस पहल से सीमा के उन हिस्सों को सुरक्षित करने में मदद मिलने की उम्मीद है, जहां अभी तक बाड़ नहीं लगाई जा सकी है।
भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा क्यों है जरूरी?
भारत और बांग्लादेश के बीच कुल 4,096.7 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है। इसमें से 2,216.7 किलोमीटर सीमा पश्चिम बंगाल से लगती है। यह सीमा दक्षिण में सुंदरबन से लेकर उत्तर में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर तक फैली हुई है। सीमा की लंबाई और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यहां सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है। नदी वाले इलाकों, दुर्गम क्षेत्रों और सीमा के पास बसी आबादी के कारण बाड़ लगाने का काम भी आसान नहीं है।
ऐसे में सीमा पर बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखना जरूरी माना जाता है।
बीएसएफ डीजी ने राज्य सरकार का जताया आभार
बीएसएफ के महानिदेशक प्रवीण कुमार ने 14 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री को भारत-बांग्लादेश सीमा के मौजूदा सुरक्षा हालात और बीएसएफ की तैयारियों के बारे में जानकारी दी। बीएसएफ की ओर से जारी बयान के अनुसार, सीमा पर बुनियादी ढांचे के लिए जमीन उपलब्ध कराने से सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी। इससे बाड़बंदी में रह गई कमियों को दूर करने और बॉर्डर आउटपोस्ट यानी सीमा चौकियों के निर्माण का रास्ता भी आसान हो सकता है।
569 किलोमीटर सीमा पर अब तक नहीं लगी बाड़
गृह मंत्रालय के अनुसार, पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा का करीब 569 किलोमीटर हिस्सा बिना बाड़ के है। इसमें लगभग 113 किलोमीटर का हिस्सा नदी वाला क्षेत्र है, जहां पारंपरिक तरीके से बाड़ लगाना संभव नहीं है। इस चुनौती को देखते हुए बीएसएफ सीमा के अलग-अलग हिस्सों में सुरक्षा मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। इसके लिए जमीन की उपलब्धता, स्थानीय परिस्थितियों और सीमा के पास मौजूद बस्तियों जैसे पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है।
राज्य सरकार की ओर से जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया इस काम को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है।
नौ जिलों में 1,024 एकड़ जमीन देने की मंजूरी
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के नौ जिलों में करीब 1,024 एकड़ जमीन बीएसएफ को सौंपने के लिए मंजूर की गई है। इस जमीन का इस्तेमाल सीमा पर बाड़बंदी और सीमा चौकियों के निर्माण जैसे कार्यों के लिए किया जा सकता है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य सीमा पर निगरानी बेहतर करना और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी कमियों को दूर करना है। बैठक में अवैध घुसपैठ और अन्य सीमा पार अपराधों को रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय पर भी चर्चा हुई।
जीरो-लाइन गांवों को लेकर क्या है चुनौती?
पश्चिम बंगाल में करीब 360 जीरो-लाइन गांव हैं, जिनकी कुल आबादी लगभग 70 हजार बताई गई है। जीरो-लाइन गांव वे बस्तियां हैं, जो अंतरराष्ट्रीय सीमा से 150 गज के दायरे में स्थित हैं। इनमें से कुछ गांव सीमा पर लगी बाड़ के दूसरी ओर हैं। कई जगह इन बस्तियों की मौजूदगी के कारण बाड़ लगाने और सुरक्षा संबंधी काम करने में कठिनाई होती है। बीएसएफ ने ऐसे गांवों को दूसरी जगह बसाने की जरूरत उठाई है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस मुद्दे को सुलझाने में राज्य सरकार की ओर से सहयोग का भरोसा दिया है। उन्होंने बीएसएफ जवानों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए भी जरूरी मदद देने की बात कही।
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