Chhattisgarh News : छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में विकास और नक्सलवाद से प्रभावित लोगों के पुनर्वास को लेकर केंद्र सरकार ने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट की हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कहा कि नक्सलवाद को खत्म करना ही काफी नहीं है, बल्कि इससे प्रभावित लोगों की जिंदगी को दोबारा बेहतर बनाना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि पिछले पांच दशकों में हिंसा के कारण सबसे ज्यादा परेशानी गरीब आदिवासी परिवारों को उठानी पड़ी है।
अमित शाह ने नक्सल प्रभावित लोगों के लिए क्या कहा?
अमित शाह ने एक कार्यक्रम को डिजिटल माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि नक्सलवाद से प्रभावित लोगों को सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर मिलना चाहिए। सरकार का प्रयास होना चाहिए कि पीड़ितों को जरूरी सहायता मिले और वे सामान्य जिंदगी की ओर लौट सकें। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि बस्तर के विकास और प्रभावित परिवारों की मदद के लिए केंद्र सरकार, छत्तीसगढ़ सरकार को पूरा सहयोग देगी। गृह मंत्री के मुताबिक, नक्सलवाद का अंत होने के बाद भी प्रभावित लोगों की परेशानियां अपने आप खत्म नहीं हो जातीं। इसलिए उनके पुनर्वास और जरूरतों को पूरा करने पर ध्यान देना जरूरी है।
3,600 से ज्यादा लोगों को मिला सहायता का लाभ
बस्तर में नक्सल प्रभावित लोगों की मदद के लिए पांच से सात अक्टूबर तक जगदलपुर में दिव्यांग सहायता कार्यक्रम आयोजित किया गया था। अमित शाह ने बताया कि इस कार्यक्रम से 3,600 से अधिक लोग लाभान्वित हुए। इनमें करीब 1,570 लोग बस्तर क्षेत्र के थे। इस पहल के तहत जरूरतमंद लोगों को कई तरह के सहायक उपकरण दिए जा रहे हैं। इनमें कृत्रिम अंग, व्हीलचेयर, तिपहिया साइकिल, सुनने में मदद करने वाले उपकरण और छड़ियां शामिल हैं। इन उपकरणों से दिव्यांग लोगों को रोजमर्रा के काम करने और दूसरों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास पर जोर
अमित शाह ने नक्सलवाद छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वाले लोगों के पुनर्वास से जुड़े आंकड़े भी साझा किए। उनके अनुसार, लगभग 8,526 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। उन्होंने बताया कि जिन लोगों के पास बैंक खाते नहीं थे, उनमें से करीब 7,500 लोगों के खाते खुलवाए गए। इसके अलावा 1,625 लोगों को इनाम की राशि और 7,882 लोगों को प्रोत्साहन राशि दी गई। गृह मंत्री के मुताबिक, 455 लोगों को रोजगार मिला है, जबकि 129 लोगों को जमीन आवंटित की गई है। इन प्रयासों का उद्देश्य आत्मसमर्पण करने वाले लोगों को सामान्य जीवन में लौटने और आजीविका के अवसर हासिल करने में मदद देना है।
सुरक्षा शिविर बनेंगे सेवा और सामुदायिक केंद्र
बस्तर में विकास को आगे बढ़ाने के लिए सरकार सुरक्षा शिविरों को सेवा केंद्रों और सामुदायिक केंद्रों में बदलने की योजना पर काम कर रही है। अमित शाह ने कहा कि इन केंद्रों के जरिए लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जाएगा। बच्चों की पढ़ाई, युवाओं के रोजगार और आदिवासी परिवारों की आर्थिक जरूरतों को पूरा करना भी इस पहल का हिस्सा होगा। उन्होंने कहा कि जिन जगहों पर पहले सुरक्षाकर्मी लोगों की सुरक्षा के लिए तैनात रहते थे, वहां अब सरकारी अधिकारी विकास से जुड़े कामों को आगे बढ़ाएंगे।
बस्तर ओलंपिक और नियद नेल्लानार योजना से विकास की कोशिश
गृह मंत्री ने बस्तर ओलंपिक, बस्तर पंडुम और नियद नेल्लानार योजना जैसी पहलों का भी जिक्र किया। बस्तर ओलंपिक के जरिए स्थानीय युवाओं को खेलों से जोड़ने और क्षेत्र में सकारात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। वहीं, बस्तर पंडुम आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को सामने लाने का मंच है। नियद नेल्लानार योजना का उद्देश्य प्रभावित और दूरदराज के गांवों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना है। इन पहलों के जरिए सामान्य जनजीवन को मजबूत करने और स्थानीय लोगों को विकास से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
READ MORE : UP News : 15 अक्टूबर से मिठाइयों पर निर्माण और इस्तेमाल की अंतिम तारीख लिखना अनिवार्य







