World Alzheimer’s Day: हर साल 21 सितंबर को विश्व अल्जाइमर दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों को दिमागी सेहत और अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारी के प्रति जागरूक करना है। अक्सर हमारे घरों में जब बुजुर्ग बार-बार एक ही बात पूछने लगते हैं, रोजमर्रा के सामान्य काम भूल जाते हैं या परिचित लोगों को पहचानने में दिक्कत महसूस करते हैं, तो हम इसे उम्र का सामान्य पड़ाव मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों और न्यूरोलॉजिस्ट्स की मानें तो ऐसा करना बेहद भारी पड़ सकता है। यह केवल उम्र बढ़ने का असर नहीं, बल्कि डिमेंशिया या अल्जाइमर जैसी बीमारी की शुरुआत हो सकती है।
डिमेंशिया के लक्षण: शुरुआती संकेतों को पहचानना है बेहद जरूरी
अल्जाइमर और डिमेंशिया के शुरुआती संकेतों को यदि समय रहते पहचान लिया जाए, तो मरीज की जीवन गुणवत्ता (Quality of Life) में सुधार किया जा सकता है। इसके मुख्य डिमेंशिया के लक्षण निम्नलिखित हैं:
याददाश्त कमजोर होना: हाल ही में हुई घटनाओं, बातचीत या किसी वस्तु को रखकर भूल जाना।
बातचीत में दोहराव: एक ही सवाल या बात को बार-बार दोहराना।
दैनिक कार्यों में भ्रम: दैनिक जीवन के जाने-पहचाने कामों (जैसे चाय बनाना, पैसे का हिसाब रखना) को करने में असमर्थ होना।
चेहरे और रास्ते भूलना: करीबियों, दोस्तों या अपने पुराने पड़ोसियों को पहचानने में कठिनाई होना।
व्यवहार में बदलाव: चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन, मूड स्विंग और अचानक सामाजिक गतिविधियों से दूरी बना लेना।
अल्जाइमर रोग के कारण: केवल उम्र ही नहीं, ये कारक भी हैं जिम्मेदार
विशेषज्ञों के अनुसार अल्जाइमर रोग वास्तव में डिमेंशिया का सबसे आम और प्रमुख कारण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के मुताबिक, डिमेंशिया के कुल मामलों में लगभग 60 से 70 प्रतिशत हिस्सेदारी अल्जाइमर रोग की ही होती है। यद्यपि उम्र बढ़ना इसका सबसे प्रमुख रिस्क फैक्टर (जोखिम कारक) है, लेकिन अल्जाइमर रोग के कारण केवल उम्र तक ही सीमित नहीं हैं।
डिमेंशिया और संज्ञानात्मक क्षमता (Cognitive Ability) में गिरावट के लिए कई अन्य जीवनशैली संबंधी कारक भी जिम्मेदार होते हैं:
शारीरिक अस्वस्थता: उच्च रक्तचाप (High BP), मधुमेह (Diabetes) और अत्यधिक मोटापा।
निष्क्रिय जीवनशैली: शारीरिक गतिविधियों और वर्कआउट की कमी।
मानसिक और सामाजिक दूरी: सामाजिक अलगाव, एकाकीपन और तनाव।
अस्वस्थ आदतें: खराब नींद की दिनचर्या, धूम्रपान और अत्यधिक वायु प्रदूषण का प्रभाव।
इंद्रियों की समस्या: कम सुनाई देना या कम दिखाई देना भी दिमाग के ढलने की गति को तेज कर देता है।
क्या मोबाइल फोन का इस्तेमाल अल्जाइमर का सीधा कारण है?
आजकल बच्चों और युवाओं में स्मार्टफोन तथा डिजिटल गैजेट्स के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर अक्सर चिंता व्यक्त की जाती है। इस विषय पर विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक या अस्वस्थ स्क्रीन टाइम मानसिक स्वास्थ्य, एकाग्रता, नींद और दिनचर्या को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है। हालांकि, वैज्ञानिक अनुसंधानों के अनुसार मोबाइल फोन के इस्तेमाल को सीधे तौर पर अल्जाइमर का कारण मानने का कोई पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण फिलहाल मौजूद नहीं है। इसलिए स्क्रीन टाइम को संतुलित रखना सेहत के लिए अच्छा है, लेकिन इसे अल्जाइमर का सीधा कारण नहीं कहा जा सकता।
अल्जाइमर से बचाव: सेहतमंद दिमाग के लिए अपनाएं ये आसान आदतें
हालांकि अल्जाइमर का पूरी तरह से इलाज संभव नहीं है, लेकिन सही दिनचर्या अपनाकर अल्जाइमर से बचाव और इसके जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है:
दिमाग को सक्रिय रखें: सुडोकू, पहेलियां सुलझाएं, नई भाषाएं सीखें या किताबें पढ़ें।
संतुलित आहार लें: हरी पत्तेदार सब्जियां, मेवे, फल और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर पौष्टिक भोजन लें।
नियमित व्यायाम: रोजाना कम से कम 30 मिनट टहलें या योग करें ताकि मस्तिष्क में रक्त संचार बेहतर बना रहे।
सामाजिक रूप से सक्रिय रहें: परिवार, दोस्तों और समाज के लोगों से संवाद बनाए रखें।
बीमारियों को नियंत्रित रखें: ब्लड प्रेशर, शुगर और वजन को हमेशा नियंत्रण में रखें।
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