SEMICON India 2026 Exhibition: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर (Yashobhoomi convention centre) में सेमीकॉन इंडिया 2026 प्रदर्शनी का उद्घाटन करने से पहले वहां का दौरा किया। उन्होंने प्रदर्शनी में भाग ले रहे देश-विदेश के प्रतिनिधियों और युवा स्टार्टअप्स के संस्थापकों से बातचीत की। 17 से 19 सितंबर तक चलने वाले इस तीन दिवसीय भव्य सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय साझेदारी, नई तकनीकों और उद्योग की दिशा पर खास ध्यान दिया जाएगा। इस साल का आयोजन ‘सिलिकॉन टू सिस्टम्स: बिल्डिंग द इकोसिस्टम’ विषय पर आधारित है, जिसे इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन और वैश्विक संस्था SEMI द्वारा मिलकर आयोजित किया जा रहा है।
वैश्विक भागीदारी और विशाल प्रदर्शनी का नजारा
यह आयोजन भारत में सेमीकंडक्टर (semiconductor) क्षेत्र के बढ़ते कदमों की एक साफ तस्वीर पेश करता है। लगभग 15,000 वर्ग मीटर के बड़े क्षेत्र में फैली इस प्रदर्शनी में दुनिया भर की 300 से अधिक कंपनियों सहित 600 से ज्यादा प्रदर्शक हिस्सा ले रहे हैं। इसमें जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर और नीदरलैंड जैसे देशों के 6 अंतर्राष्ट्रीय पवेलियन और 12 राज्यों के अपने विशेष पवेलियन बनाए गए हैं। इसके अलावा लगभग 40 उभरते हुए स्टार्टअप्स और प्रतिभाशाली छात्रों के लिए भी खास स्थान तैयार किए गए हैं, जहां वे अपनी नई तकनीकों का प्रदर्शन कर रहे हैं।
Sand to Silicon का अनोखा अनुभव
इस प्रदर्शनी की सबसे बड़ी खासियत ‘सैंड टू सिलिकॉन टू सिस्टम्स’ अनुभव क्षेत्र है। इसके माध्यम से आगंतुकों को यह देखने का मौका मिल रहा है कि सामान्य रेत से सेमीकंडक्टर सामग्री, वेफर, चिप डिजाइनिंग और पैकेजिंग के रास्ते अंततः इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम कैसे तैयार होते हैं। भारत अब केवल चिप असेंबलिंग तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि निर्माण प्रक्रिया के हर चरण में अपनी आत्मनिर्भरता मजबूत कर रहा है। केंद्र सरकार के सेमीकॉन 2.0 कार्यक्रम से इस दिशा में और तेजी आने की उम्मीद है।
वैश्विक दिग्गजों का भारत पर बढ़ा भरोसा
इस बड़े आयोजन में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, माइक्रोन, एप्लाइड मैटेरियल्स, एएसएमएल, इन्फिनियन, एनएक्सपी और आईबीएम रिसर्च जैसी दुनिया की नामी कंपनियां हिस्सा ले रही हैं। देश के 400 से ज्यादा शैक्षणिक संस्थानों तक चिप डिजाइन टूल्स पहुंचाए जा चुके हैं, ताकि कॉलेज स्तर से ही कुशल इंजीनियर तैयार किए जा सकें। इस सम्मेलन से विदेशी निवेश, तकनीकी तालमेल और नई साझेदारियों के कई रास्ते खुलेंगे, जिससे भारत आने वाले समय में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का एक मजबूत और भरोसेमंद केंद्र बनकर उभरेगा।
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