Kannauj Flood : उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में बाढ़ के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है। जिलाधिकारी के सख्त निर्देशों के बाद चिकित्सा अधिकारियों और स्वास्थ्य टीमों को बाढ़ प्रभावित इलाकों में लगातार गश्त करने और प्रभावित ग्रामीणों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए हैं। बाढ़ के पानी से फैलने वाली संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए प्रशासन जमीन पर उतरकर काम कर रहा है।
गांवों में स्वास्थ्य शिविर और मुफ्त दवा वितरण
स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीमें आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं के सहयोग से बाढ़ प्रभावित गांवों में घर-घर पहुंचकर ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण कर रही हैं। मरीजों को मौके पर ही जरूरी दवाएं दी जा रही हैं और पानी से होने वाली बीमारियों से बचाव के प्रति जागरूक किया जा रहा है। स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा ग्रामीणों को उबला हुआ पानी पीने, पानी में क्लोरीन की गोलियां मिलाने और आसपास साफ-सफाई रखने की सलाह दी जा रही है।
472 मरीजों का हुआ इलाज, संक्रामक बीमारियों पर नजर
बाढ़ प्रभावित इलाकों में चलाए जा रहे इस विशेष स्वास्थ्य अभियान के तहत अब तक कुल 472 मरीजों का इलाज किया जा चुका है। प्राथमिक जांच में डायरिया के 22, पेचिश के 8, बुखार के 101, त्वचा रोग के 151 और अन्य बीमारियों से पीड़ित 190 मरीजों का उपचार कर दवा दी गई। राहत की बात यह है कि क्षेत्र में हैजा, पीलिया, मलेरिया, खसरा या सर्पदंश (सांप के काटने) का एक भी मामला सामने नहीं आया है।
जल स्रोतों को कीटाणु रहित करने की कवायद
दूषित पानी से फैलने वाले डायरिया, पेचिश और पीलिया जैसी गंभीर बीमारियों को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें हैंडपंपों और जल स्रोतों को कीटाणु रहित (क्लोरीनेशन) करने में जुटी हैं। इसके अलावा मच्छरों के प्रकोप से बचाव के लिए ग्रामीणों को मच्छरदानी का उपयोग करने, घरों के आसपास पानी जमा न होने देने और बुखार महसूस होने पर तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में संपर्क करने की हिदायत दी जा रही है।







