Sambhal Land Dispute: संभल में 50 करोड़ की आर्य समाज मंदिर जमीन पर एसडीएम कोर्ट का बड़ा फैसला, 11 अवैध नाम निरस्त

Sambhal Land Dispute

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Sambhal Land Dispute: Sambhal जिले के शेर खां सराय गांव में आर्य समाज मंदिर की करीब पांच बीघा जमीन पर कब्जे को लेकर चल रहा विवाद अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है । करीब 50 करोड़ रुपये कीमत की इस जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था । मामले में प्रशासन ने बड़ा फैसला लेते हुए एसडीएम कोर्ट के आदेश के बाद जमीन को दोबारा ‘आर्य समाज मंदिर’ और ‘ग्राम समाज’ के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कर दिया है । इसके साथ ही राजस्व अभिलेखों में अवैध रूप से दर्ज किए गए 11 लोगों के नाम भी निरस्त कर दिए गए हैं… आखिर इस जमीन को लेकर विवाद की शुरुआत कैसे हुई, आइए जानते हैं –

क्या है पूरा विवाद ?

– मामला संभल जिले के शेर खां सराय क्षेत्र का है
– ( जहां ) आर्य समाज मंदिर की ओर से करीब एक साल पहले जिला प्रशासन में शिकायत दी गई थी
– ( शिकायत में दावा किया गया था कि ) वर्ष 1960 की चकबंदी प्रक्रिया के दौरान गाटा संख्या 103, 106 और 107 की जमीन आधिकारिक तौर पर ‘आर्य समाज मंदिर’ के नाम दर्ज हुई थी
– (आरोप लगाया गया कि ) बाद में फर्जीवाड़े और मिलीभगत के जरिए इस जमीन पर निजी लोगों के नाम दर्ज करा दिए गए
– शिकायत के बाद मामला संभल SDM विकास चंद्र की अदालत में पहुंचा
– ( जहां ) करीब एक साल तक दोनों पक्षों की सुनवाई चली और दस्तावेज व साक्ष्य पेश किए गए
– ( सुनवाई के दौरान ) SDM कोर्ट ने तहसीलदार से जमीन की मौके पर जांच कर रिपोर्ट मांगी थी
– तहसीलदार की रिपोर्ट में 3,350 वर्ग मीटर जमीन को आर्य समाज मंदिर की जमीन बताया गया
– ( जांच में यह भी सामने आया कि ) जमीन पर पक्के मकान और मजार का निर्माण मौजूद है
– ( रिपोर्ट के आधार पर ) SDM ने जमीन को दोबारा आर्य समाज मंदिर और प्रधान ग्राम समाज के नाम दर्ज करने का फैसला सुनाया

एसडीएम कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने जमीन खाली कराने की प्रक्रिया तेज कर दी है। अधिकारियों ने कब्जाधारियों को जल्द से जल्द जमीन खाली करने की चेतावनी दी है। साथ ही साफ किया है कि अगर अवैध कब्जा नहीं हटाया गया, तो नियमानुसार कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माण भी ध्वस्त कराया जाएगा। वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि भूमि पर मौजूद मजार करीब 150 वर्ष पुरानी है और वर्षों से यहां धार्मिक गतिविधियां होती रही हैं। ऐसे में प्रशासन के फैसले के बाद अब इस विवादित जमीन को लेकर आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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