PM Modi Mann Ki Baat: अमरनाथ यात्रा में स्वच्छता और जनभागीदारी, जानिए देश भर के प्रेरणादायक प्रयास

PM Modi Mann Ki Baat

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PM Modi Mann Ki Baat:मन की बात‘ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में देश के अलग-अलग कोनों से सामने आने वाली सकारात्मक खबरों और जनभागीदारी का उल्लेख किया। इस चर्चा में उन्होंने यह रेखांकित किया कि किस तरह आम नागरिक अपने स्तर पर छोटे प्रयास करके पर्यावरण संरक्षण, आत्मनिर्भरता और समाज सुधार की दिशा में योगदान दे रहे हैं। चाहे वह कठिन क्षेत्रों में स्वच्छता का प्रबंधन हो या फिर कृषि और विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, ये सभी उदाहरण एक बदलते और जागरूक भारत की तस्वीर पेश करते हैं।

Amarnath Yatra में स्वच्छता और जनभागीदारी 

अमरनाथ यात्रा जैसे कठिन और दुर्गम मार्ग पर स्वच्छता बनाए रखना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। इस वर्ष की यात्रा के दौरान स्वच्छता कर्मियों और श्रद्धालुओं ने मिलकर एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। यात्रा मार्ग से 400 मीट्रिक टन से अधिक कचरा एकत्र करके उसका उचित निस्तारण किया गया।

इस दौरान 16 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने स्वयं स्वच्छता का संकल्प लिया, जबकि 10 हजार से ज्यादा यात्रियों को ‘रिस्पॉन्सिबल यात्री’ प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। एक विशेष पहल के तहत मार्ग में इस्तेमाल होने वाले पशुओं के गोबर से बायोगैस तैयार की गई, जिससे उत्पन्न स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग ‘स्वच्छ ज्योत’ प्रज्ज्वलित करने में किया गया। यह प्रयास यह दिखाता है कि धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण को कैसे जोड़ा जा सकता है।

फूलों की खेती से बदली वेसालु की जिंदगी

नागालैंड के फेक जिले की रहने वाली वेसालु पुरो की कहानी ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार का एक अच्छा उदाहरण है। एक साधारण किसान परिवार में पली-बढ़ी वेसालु को बचपन से ही तरह-तरह के फूलों से लगाव था। उन्होंने अपने इस शौक को व्यावसायिक रूप देने का फैसला किया और वर्ष 2021 में छोटे स्तर पर फूलों की खेती की शुरुआत की।

स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र से वैज्ञानिक खेती की बारीकियां सीखने के बाद उन्होंने एक चौथाई एकड़ जमीन पर ग्लैडियोलस के पौधे लगाए। पहली ही फसल में 5 हजार से अधिक फूल खिले, जिससे उनका उत्साह बढ़ा। इसके बाद उन्होंने अपने काम का विस्तार किया और आज उनके उगाए फूल नागालैंड के स्थानीय बाजारों से निकलकर दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों तक सप्लाई हो रहे हैं।

जंगल संरक्षण से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रहीं महिलाएं

ओडिशा के देबरीगढ़ स्थित धोड़रोकुसुम गांव की मैथिली भुए ने यह दिखाया है कि जंगलों पर निर्भर रहने वाले लोग किस तरह उनके रक्षक बन सकते हैं। पहले मैथिली जंगल से जलावन की लकड़ी और अन्य वन उपज एकत्र करके अपना जीवन यापन करती थीं। बाद में वे देबरीगढ़ इको-टूरिज्म पहल से जुड़ीं और जंगल को नुकसान पहुंचाए बिना अपनी आजीविका चलाने लगीं।

उनके इस बदलाव से प्रभावित होकर गांव की 60 से अधिक अन्य महिलाएं भी इस अभियान से जुड़ चुकी हैं। आज ये महिलाएं वन्यजीवों की सुरक्षा, घास के मैदानों के रख-रखाव और इको-टूरिज्म गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। इससे जंगलों की कटाई में कमी आई है और महिलाओं को नियमित आय का जरिया मिला है।

यह भी पढ़ें: Mann Ki Baat 137th Episode: PM Modi ने की युवाओं से नशे से दूर रहने और महिला उद्यमियों के प्रयासों की सराहना

मिशन शक्तिSAT से 108 देशों की छात्राओं को अवसर

अंतरिक्ष और विज्ञान के क्षेत्र में बेटियों की बढ़ती रुचि को बढ़ावा देने के लिए ‘मिशन शक्तिSAT’ की शुरुआत की गई है। इस अंतरराष्ट्रीय पहल के माध्यम से 108 देशों की लगभग 12 हजार छात्राओं को सैटेलाइट तकनीक, डिजाइनिंग और नवाचार सीखने का अवसर मिल रहा है।

ग्रेटर नोएडा के गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में इस मिशन के अगले चरण की शुरुआत की गई है। इस पूरे प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य छात्राओं द्वारा तैयार किए गए एक विशेष सैटेलाइट को चंद्रमा की कक्षा में भेजना है। यह कार्यक्रम युवा छात्राओं को एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी जैसे जटिल विषयों में व्यावहारिक अनुभव प्रदान कर रहा है।

एवोकाडो (Avocado) की खेती से किसानों को नई आय

पारंपरिक फसलों के साथ-साथ अब भारतीय किसान आधुनिक और उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर भी रुख कर रहे हैं। आंध्र प्रदेश के कडपा जिले के किसान वरदराज ने डिजिटल माध्यमों से जानकारी जुटाकर Avocado की खेती शुरू की। सही प्रबंधन के बल पर वे अब तक लगभग 4 टन एवोकाडो का उत्पादन कर चुके हैं, जिसे वे सीधे स्थानीय बाजारों में बेच रहे हैं।

इसी तरह तमिलनाडु के कोडाइकनाल में चंद्रशेखरन ने अपनी आधी हेक्टेयर जमीन पर Avocado उगाना शुरू किया। कर्नाटक के चिक्कमगलुरु में भी किसानों ने कॉफी के बागानों के बीच अंतर-फसल (inter-cropping) के रूप में एवोकाडो (Avocado) की खेती अपनाई है। यह प्रयोग किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित हो रहा है।

उत्तम कुमार को जन्म-शताब्दी वर्ष में याद किया

भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता उत्तम कुमार की आगामी जन्म-शताब्दी के अवसर पर उनके योगदान को याद किया गया। अपनी सहज अभिनय शैली के लिए जाने जाने वाले उत्तम कुमार ने अपने करियर में कई यादगार फिल्में दीं। प्रसिद्ध निर्देशक सत्यजीत रे की फिल्म ‘नायक’ में उनके अभिनय को विशेष रूप से सराहा जाता है। उनका शुरुआती जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा, लेकिन उन्होंने अपनी लगन से भारतीय सिनेमा में एक अलग पहचान बनाई।

त्योहारों पर ‘Vocal for Local’ का संदेश

आने वाले त्योहारों के मौसम को ध्यान में रखते हुए स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और शिल्पकारों के समर्थन पर बल दिया गया। केवल पारंपरिक वस्तुएं ही नहीं, बल्कि दैनिक उपयोग की चीजों में भी स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया गया है। डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स और सेलिब्रिटीज से भी अपील की गई है कि वे स्थानीय हस्तशिल्प और भारतीय निर्मित सामानों के प्रचार-प्रसार में अपना सहयोग दें।

छोटे प्रयासों को ‘मन की बात’ तक पहुंचाने की अपील

संबोधन के अंत में आम जनता से आग्रह किया गया कि वे अपने आसपास होने वाले सकारात्मक बदलावों और इनोवेटिव प्रयासों की जानकारी साझा करते रहें। समाज में किए गए छोटे-छोटे सुधार भी अन्य लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनते हैं और देश के अलग-अलग हिस्सों में नए विचारों को जन्म देते हैं।

यह भी पढ़ें: Jan Dhan Yojana से बदली ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी, Balrampur में 10.50 लाख खाते संचालित | DD News UP

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