Mann Ki Baat 137th Episode: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 137वें एपिसोड में देशवासियों से संवाद करते हुए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। इस बातचीत में उन्होंने उन साधारण लोगों की कहानियों को साझा किया, जो अपने छोटे-छोटे प्रयासों से समाज में एक बड़ा बदलाव ला रहे हैं। युवाओं के नवाचार से लेकर महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन और स्वच्छता के अभियानों तक, प्रधानमंत्री ने देश के कोने-कोने में छिपी प्रतिभाओं और उनके योगदान की सराहना की। आइए जानते हैं कि इस बार की चर्चा में कौन-कौन से मुख्य विषय और प्रेरणादायक बातें शामिल रहीं।
तकनीक के जरिए इतिहास को रोचक बनाने की एक नई पहल
अक्सर ऐसा देखा जाता है कि इतिहास विषय को पढ़ते समय बहुत से लोग इसे थोड़ा उबाऊ महसूस करते हैं। इसी सोच को बदलने के लिए मुंबई के कृष्णा शेषाद्री ने एक अनोखा प्रयास किया है। उन्होंने ‘भारत राज्य’ नाम से एक ऐसी वेबसाइट बनाई है, जहां तकनीक का सहारा लेकर भारतीय इतिहास को बेहद सरल और दिलचस्प तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
इस प्लेटफॉर्म की सबसे खास बात यह है कि आप किसी भी वर्ष का चयन करके यह देख सकते हैं कि उस समय भारत के किस भू-भाग पर किस राजवंश का शासन था। प्रधानमंत्री ने कृष्णा से बात करते हुए उनके इस प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि चोल, पल्लव, कर्कोट और अहोम जैसे साम्राज्यों के गौरवशाली इतिहास को आम लोगों और नई पीढ़ी तक पहुंचाना बहुत जरूरी है।
इतिहास को आसान भाषा और कहानियों में समझना
कृष्णा शेषाद्री ने बताया कि बचपन से ही उनकी इतिहास में गहरी रुचि रही है। वे चाहते थे कि लोग इतिहास को केवल तिथियों और घटनाओं के रूप में न देखें, बल्कि इसे कहानियों की तरह समझें। यही वजह है कि उन्होंने इतिहास और आधुनिक तकनीक का मेल करके यह डिजिटल प्रयास शुरू किया।
बातचीत के दौरान राजराज चोल, राजेंद्र चोल, हेमू और त्रिभुवन महादेवी जैसी महान ऐतिहासिक शख्सियतों के योगदान पर भी चर्चा हुई। इस तरह के प्रयास न केवल विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई को आसान बनाते हैं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का एक सीधा और सहज माध्यम भी बनते हैं।
नशा मुक्त भारत के लिए जनभागीदारी का संदेश
देश के विकास में युवाओं की भूमिका सबसे अहम होती है, लेकिन नशे की लत इस ऊर्जा को गलत दिशा में ले जाती है। प्रधानमंत्री ने ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि यह पहल अब एक व्यापक रूप ले रही है। नशे का असर केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पूरे परिवार और समाज के ताने-बाने को प्रभावित करता है।
उन्होंने देश के विद्यार्थियों, संगीतकारों, थिएटर कलाकारों और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स से अपील की कि वे इस विषय पर अपनी रचनात्मकता का उपयोग करें। स्लोगन, छोटे नाटक, गीत और कलात्मक सामग्री के माध्यम से बात लोगों के दिलों तक ज्यादा गहराई से पहुंचती है। जब समाज खुद आगे आकर किसी समस्या के खिलाफ खड़ा होता है, तो बदलाव निश्चित होता है।
तिरंगे से जुड़ी देशभक्ति और जन-उत्साह
अगस्त का महीना देश में देशभक्ति के रंग में रंगा रहता है। इस दौरान नेशनल हैंडलूम डे, भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ, स्वतंत्रता दिवस और नेशनल Space Day जैसे कई अवसर आते हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि इस वर्ष ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में लोगों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया और 8 करोड़ से अधिक तिरंगा सेल्फी अपलोड की गईं।
इसके साथ ही ‘सूर्यपथ तिरंगा’ का विशेष उल्लेख हुआ, जिसमें तिरंगा फिजी के सुवा से शुरू होकर एशिया, अफ्रीका, यूरोप और फिर अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को तक पहुंचा। यह इस बात का प्रतीक है कि भारतीय मूल के लोग दुनिया के किसी भी कोने में रहें, अपनी मिट्टी और राष्ट्रध्वज से उनका जुड़ाव हमेशा गहरा बना रहता है।
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पीएम स्वनिधि से महिलाओं की बढ़ती आत्मनिर्भरता
छोटे व्यवसाय और रेहड़ी-पटरी पर काम करने वाले लोगों को आर्थिक संबल देने में पीएम स्वनिधि योजना (PM SVANidhi) एक महत्वपूर्ण माध्यम बनी है। इस योजना का एक बड़ा पहलू यह है कि इसके कुल लाभार्थियों में लगभग 46 प्रतिशत महिलाएं हैं। करीब 35 लाख महिलाएं इस सहायता के जरिए अपने काम को आगे बढ़ा रही हैं।
गाजियाबाद की बबीता शर्मा की कहानी इसका एक सुंदर उदाहरण है। बबीता पहले सड़क किनारे पूजा सामग्री का छोटा स्टॉल लगाती थीं। योजना से आर्थिक सहायता मिलने के बाद उन्होंने दुकान का सामान बढ़ाया और धीरे-धीरे अपने छोटे से स्टॉल को एक स्थायी दुकान का रूप दे दिया। आज वे आत्मविश्वास के साथ अपना परिवार चला रही हैं।
छोटे कारोबार से परिवार का बदलता भविष्य
बेंगलुरु की टी.एस. निन्गम्मा की कहानी भी ऐसी ही एक प्रेरणादायक मिसाल है। निन्गम्मा और उनके पति ने इडली, डोसा और सांभर बेचने का एक बहुत छोटा काम शुरू किया था। जब उन्हें पीएम स्वनिधि योजना का सहयोग मिला, तो उन्होंने अपनी रेहड़ी को बेहतर बनाया, थोक में सामग्री खरीदना शुरू किया और मेन्यू में नई चीजें जोड़ीं।
कारोबार में सुधार होने से उनकी दैनिक आय बढ़ी, जिसका सीधा असर उनके परिवार के जीवन स्तर पर पड़ा। आज वे अपने तीनों बच्चों को अच्छी शिक्षा दिला पा रही हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि जब एक महिला आर्थिक रूप से सक्षम होती है, तो वह पूरे परिवार के भविष्य को सुरक्षित और बेहतर बनाती है।
युवाओं की पहल से पटवाई में स्वच्छता का संदेश
उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के पटवाई गांव से आने वाले दो युवाओं, आकाश और रोहन ने यह साबित कर दिया है कि बदलाव के लिए किसी बड़े तंत्र की नहीं, केवल एक सोच और दृढ़ संकल्प की जरूरत होती है। अपने आसपास फैली गंदगी को देखकर उन्होंने खुद सफाई करने का निर्णय लिया।
देखते ही देखते उनके साथ गांव के अन्य युवा भी जुड़ गए और ‘क्लीन-अप पटवाई’ नाम की एक टीम बन गई। इस टीम ने अब तक चार गंगा घाटों की सफाई की है और एक टन से भी ज्यादा प्लास्टिक कचरा हटाकर नदियों को साफ करने में योगदान दिया है। इसके अलावा वे स्थानीय तालाबों और सार्वजनिक स्थानों को भी स्वच्छ बनाने में निरंतर जुटे हुए हैं।
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