UP New Assembly Building : कमल के फूल के आकार में बनेगा यूपी का नया विधान भवन, जानिए क्या-क्या होंगी खासियतें

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UP New Assembly Building : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को जल्द ही एक नया और भव्य आर्किटेक्चरल लैंडमार्क मिलने जा रहा है। गोमतीनगर स्थित सहारा शहर की लगभग 245 एकड़ जमीन पर प्रदेश का ‘नया विधान भवन लखनऊ’ में आकार लेने के लिए तैयार है। इस ड्रीम प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 5,200 करोड़ रुपये है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी ने नए विधान भवन का मॉडल शेयर करते हुए बताया कि यह परिसर भारतीय संस्कृति और आधुनिक तकनीक का एक बेजोड़ संगम होगा।

कमल के फूल के आकार में बनेगी मुख्य इमारत

नए विधान भवन परिसर का मुख्य आकर्षण इसकी अनूठी बनावट होगी। ऊपर से देखने पर यह पूरी तरह से खिलते हुए कमल के फूल जैसा नजर आएगा। कमल को उत्तर प्रदेश की समृद्ध संस्कृति और विकास का प्रतीक माना जाता है। इमारत के बीचों-बीच मुख्य सभागार होगा, जबकि चारों तरफ कमल की पंखुड़ियों की तरह अलग-अलग विंग्स बनाए जाएंगे। इन विंग्स में सरकारी कार्यालय, शोध केंद्र, डिजिटल लाइब्रेरी और आधुनिक मीटिंग हॉल मौजूद रहेंगे।

भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयारी

वर्ष 2026 के बाद देश में होने वाले परिसीमन को देखते हुए उत्तर प्रदेश में विधायकों की संख्या बढ़ना तय है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस नए सदन में 700 विधायकों के बैठने की व्यवस्था की जा रही है।

इसके अलावा, इसमें 200 सीटों वाली विधान परिषद, 1,000 सीटों वाला विशाल जॉइंट सेशन हॉल और 5,000 से ज्यादा गाड़ियों के लिए भव्य पार्किंग की सुविधा होगी। इस पूरे कैंपस में केवल विधानसभा ही नहीं, बल्कि नया सचिवालय, मुख्यमंत्री आवास और वीवीआईपी ब्लॉक भी शामिल होंगे। इस नए परिसर की एक बड़ी खासियत यह होगी कि इसमें प्रदेश के सभी 75 जिलों के प्रतिनिधियों और विधायकों के लिए अलग-अलग चर्चा जोन बनाए जाएंगे। अब तक सभी जिलों के प्रतिनिधि एक ही हॉल में बैठक करते थे, जिससे समन्वय में दिक्कतें आती थीं। नए सिस्टम से हर जिले से जुड़े विकास कार्यों और स्थानीय समस्याओं पर गहनता से बात हो सकेगी, जिससे फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता आएगी।

102 साल पुराने ऐतिहासिक भवन का भी रहा है गौरवशाली इतिहास

वर्तमान में इस्तेमाल हो रहा विधान भवन लगभग 102 साल पुराना है, जिसकी आधारशिला 1922 में रखी गई थी और यह 1928 में बनकर तैयार हुआ था। मिर्जापुर के बलुआ पत्थरों से बनी वह ऐतिहासिक इमारत वास्तुकला का शानदार नमूना है। अब समय की मांग और बढ़ती जरूरतों को देखते हुए नया इको-फ्रेंडली विधान भवन तैयार किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि इसका निर्माण कार्य 2027 में शुरू कर 2029-30 तक इसे पूरी तरह पूरा कर लिया जाए। लखनऊ में बनने जा रहा यह नया विधान भवन केवल एक इमारत नहीं होगा, बल्कि यह आधुनिक गवर्नेंस और उत्तर प्रदेश के नए विजन को दर्शाएगा। अत्याधुनिक ई-विधान प्रणाली और पर्यावरण अनुकूल तकनीकों से लैस यह परिसर आने वाले समय में देश के सबसे बेहतरीन विधायी परिसरों में से एक साबित होगा।

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