सोमवार को Rajya Sabha के 271वें सत्र की शुरुआत एक बेहद सकारात्मक माहौल में हुई। इस नए सत्र के उद्घाटन के मौके पर राज्यसभा के सभापति C. P. Radhakrishnan ने सदन में मौजूद सभी सांसदों का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने एक बात साफ तौर पर कही कि जब बात देश के अहम मुद्दों की हो, तो बहस का स्तर ऐसा होना चाहिए जो समाज को दिशा दे सके।
नए सदस्यों का स्वागत और पुरानी परंपराओं का सम्मान
सभापति ने अपने संबोधन में खास तौर पर नए चुनकर आए सदस्यों का स्वागत किया। उन्होंने याद दिलाया कि राज्यसभा का इतिहास बहुत ही गौरवशाली रहा है, जहाँ हमेशा गंभीर और विचार-विमर्श से भरे मुद्दों पर बात होती आई है। उन्हें पूरा भरोसा है कि नए सदस्य भी इस परंपरा को और आगे ले जाएंगे और सदन में सार्थक बातचीत देखने को मिलेगी।
19 बैठकों के प्रभावी संचालन पर जोर
इस सत्र के दौरान कुल 19 बैठकें तय की गई हैं। C. P. Radhakrishnan ने सांसदों से कहा कि हमारे पास जो समय उपलब्ध है, उसका सही और प्रभावी इस्तेमाल होना बेहद जरूरी है। देश के विकास से जुड़ी कई नीतियां और विधायी कार्य इस सत्र की कार्यसूची में शामिल हैं। अगर बार-बार कार्यवाही में रुकावट आएगी, तो आम जनता से जुड़े अहम फैसले लटक सकते हैं।
नौ भाषाओं में AI आधारित लाइव अनुवाद की शुरुआत
इस बार संसद की कार्यवाही में एक बड़ा और आधुनिक बदलाव भी देखने को मिला है। सभापति ने बताया कि सदस्यों की सीटों पर लगे मल्टीमीडिया उपकरणों के जरिए नौ भाषाओं में एआई आधारित लाइव अनुवाद की सुविधा शुरू कर दी गई है। आने वाले समय में इसे संविधान की सभी 22 भाषाओं तक ले जाने की योजना है। इस तकनीक के आने से क्षेत्रीय भाषा बोलने वाले सांसदों को अपनी बात रखने और दूसरों को समझने में काफी आसानी होगी।
सदन की गरिमा बनाए रखने का आह्वान
अपनी बात खत्म करते हुए सभापति ने लोकतांत्रिक मर्यादा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राजनीति में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन विरोध दर्ज कराने का तरीका ऐसा हो जिससे सदन की गरिमा को ठेस न पहुंचे। उन्होंने सभी से सहयोग मांगते हुए एक सफल और उद्देश्यपूर्ण सत्र की उम्मीद जताई।
यह भी पढ़ें: CM Yogi Barabanki Visit: बाराबंकी को मिली 542 करोड़ की सौगात







