NEET-UG 2026: संगम नगरी प्रयागराज (Prayagraj) के युवाओं ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अगर लगन सच्ची हो और इरादे मजबूत हों, तो किसी भी मंजिल को पाना नामुमकिन नहीं है। देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली मेडिकल प्रवेश परीक्षा (Neet-UG 2026) के नतीजे घोषित हो चुके हैं। इस परीक्षा में प्रयागराज के दो होनहारों, एकाग्र यादव और जोयना सिंह ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर सफलता का परचम लहराया है। इन दोनों छात्र-छात्राओं ने न केवल अपने माता-पिता का सिर गर्व से ऊंचा किया है, बल्कि पूरे जिले का नाम भी रोशन किया है।
एकाग्र यादव बने प्रयागराज के टॉपर
झलवा के रहने वाले एकाग्र यादव ने नीट 2026 में 690 अंक हासिल कर इतिहास रच दिया है। उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 104 प्राप्त की है, जिससे वह Prayagraj के जिला टॉपर बन गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने पूरे उत्तर प्रदेश में पांचवां स्थान हासिल किया है। एकाग्र ने यह बड़ी कामयाबी अपने पहले ही प्रयास में हासिल की है। उनके पिता डॉ. अनुराग यादव रेलवे अस्पताल में डॉक्टर हैं और माता कविता यादव शिक्षिका हैं। एकाग्र ने बताया कि डॉक्टर बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने 12वीं के बाद प्रतिदिन करीब 12 घंटे पढ़ाई की थी।
मुश्किलों के बाद भी नहीं खोया हौसला
एकाग्र के लिए यह सफर इतना आसान नहीं था। बीच में परीक्षा निरस्त होने से उनका मनोबल प्रभावित हुआ था, लेकिन उनके परिवार और शिक्षकों ने उन्हें टूटने नहीं दिया। सभी के सहयोग से उन्होंने दोबारा दोगुनी ताकत के साथ तैयारी की और यह बेहतरीन मुकाम हासिल किया। दिलचस्प बात यह है कि एकाग्र साल 2024 में हाईस्कूल और 2026 में इंटरमीडिएट परीक्षा में भी जिला टॉपर रह चुके हैं।
जोयना सिंह ने भी मनवाया अपनी प्रतिभा का लोहा
Prayagraj की ही एक और बेटी जोयना सिंह ने भी इस परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया है। नारायण स्वरूप हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. राजीव सिंह और वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सोनिया सिंह की बेटी जोयना ने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 9281 और कैटेगरी रैंक 3902 हासिल की है। उनका स्कोर 99.5 पर्सेंटाइल रहा है। जोयना ने इसी साल इंटरमीडिएट परीक्षा में भी अपने कॉलेज में टॉप किया था।
शिक्षकों के मार्गदर्शन ने आसान बनाई राह
अपनी इस सफलता का श्रेय जोयना ने अपने माता-पिता और गुरुजनों को दिया है। तैयारी के दिनों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि उनके मार्गदर्शकों ने पढ़ाई में उनकी बहुत मदद की। शिक्षकों की वजह से ही उन्हें विषयों की गहरी समझ विकसित करने, समय का सही प्रबंधन करने और परीक्षा के लिए एक सटीक रणनीति तैयार करने में मदद मिली, जिसके दम पर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया।




