Varanasi के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी एक बहुत बड़ी और अच्छी खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री बृजेश पाठक (Brajesh Pathak) ने शनिवार को वाराणसी के कबीरचौरा स्थित प्रसिद्ध शिव प्रसाद गुप्त मण्डलीय जिला चिकित्सालय (Shiv Prasad Gupt Hospital) का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं को बारीकी से देखा और मरीजों से मिलकर उनका हाल-चाल जाना। दरअसल, सरकार इस ऐतिहासिक अस्पताल का पूरी तरह से कायाकल्प करने जा रही है, जिससे पूर्वांचल के मरीजों को इलाज के लिए अब बड़े निजी अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
आपातकालीन वार्ड पहुंचे डिप्टी सीएम
अपने दौरे की शुरुआत करते हुए उप-मुख्यमंत्री Brajesh Pathak ने सर्वप्रथम चिकित्सालय के आकस्मिक विभाग का निरीक्षण किया। वहां उन्होंने भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों से सीधे बातचीत की। डिप्टी सीएम ने लोगों से पूछा कि उन्हें अस्पताल में दवाएं और अन्य जरूरी सुविधाएं समय पर मिल रही हैं या नहीं। इसी दौरान वार्ड में जांच कराने आई एक बुजुर्ग महिला से मिलकर उन्होंने बेहद सादगी से बातचीत की और उनका आशीर्वाद भी लिया।
अधिकारियों के साथ की अहम बैठक
अस्पताल की व्यवस्थाएं देखने के बाद उप-मुख्यमंत्री ने चिकित्सालय के कमरा नंबर-1 में स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारियों के साथ एक अहम समीक्षा बैठक की। बैठक में वाराणसी मण्डल के अपर निदेशक डॉ. एनडी शर्मा, प्रमुख अधीक्षक डॉ. बृजेश कुमार और सीएमओ डॉ. मुकेश कुमार समेत कई वरिष्ठ डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ मौजूद रहे। इस बैठक में अस्पताल परिसर में बनने वाले 500 बेड के नए मल्टी सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक को लेकर चर्चा हुई। जब तक नई बिल्डिंग का काम चलेगा, तब तक मरीजों की सुविधा के लिए सेवाओं को महिला अस्पताल के एमसीएच भवन में शिफ्ट किया जाएगा।
बजट और सुविधाओं का पूरा ब्योरा
पत्रकारों से बातचीत में Deputy CM ने बताया कि नए अस्पताल के निर्माण पर 315.48 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा अस्पताल में अत्याधुनिक मेडिकल मशीनें खरीदने के लिए अलग से बजट दिया जाएगा। इस नई बिल्डिंग के बनने से न सिर्फ बेड की संख्या बढ़ेगी, बल्कि मरीजों को एमआरआई (MRI) और डायलिसिस जैसी गंभीर जांचों की सुविधा भी यहीं मिल जाएगी।
समय और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान
काम में किसी भी तरह की ढिलाई न हो, इसके लिए उन्होंने कार्यदायी संस्था को निर्धारित समयसीमा के भीतर निर्माण कार्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि निर्माण कार्य की प्रोग्रेस की हर 15 दिन में समीक्षा की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों और ठेकेदारों को आपस में बेहतर तालमेल बिठाकर काम की क्वालिटी बनाए रखने की हिदायत दी गई है।
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