UP Cabinet: उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी औद्योगिक और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण हब बनाने की दिशा में राज्य की योगी सरकार ने एक और बड़ा और दूरगामी कदम उठाया है। उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने बुधवार को आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में ‘उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2024’ (Uttar Pradesh Semiconductor Policy-2024) में कई अहम संशोधनों को अपनी मंजूरी दे दी है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह ऐतिहासिक निर्णय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लोकभवन में आयोजित कैबिनेट की उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया। सरकार के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य वर्तमान नीति को पहले की तुलना में कहीं अधिक निवेशक-अनुकूल (Investor-Friendly) बनाना है, जिससे देश और दुनिया की बड़ी तकनीकी और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण कंपनियां उत्तर प्रदेश की ओर आकर्षित हो सकें और राज्य में भारी निवेश की नींव रखी जा सके।
बदलते औद्योगिक परिदृश्य और अन्य राज्यों से मिल रही प्रतिस्पर्धा को देखते हुए सरकार ने लिया निर्णय
राज्य सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया है कि बदलते वैश्विक औद्योगिक परिदृश्य, बड़ी तकनीकी कंपनियों और निवेशकों की व्यावहारिक आवश्यकताओं तथा इस क्षेत्र में अन्य प्रतिस्पर्धी राज्यों से मिल रही कड़ी चुनौती को देखते हुए मौजूदा नीति में ये संशोधन बेहद जरूरी हो गए थे। इसके साथ ही, इन बदलावों का एक बड़ा उद्देश्य उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नीतियों को केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ (India Semiconductor Mission) के साथ बेहतर ढंग से संरेखित (Align) करना है। केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों में इस बेहतर तालमेल से सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को विकसित करने में मदद मिलेगी, जिससे उत्तर प्रदेश वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) में एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर सकेगा।
UP Cabinet: जनवरी 2024 में अधिसूचित की गई थी मूल नीति
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2024 को पहली बार पिछले साल 19 जनवरी 2024 को आधिकारिक तौर पर अधिसूचित किया गया था। नियमों के मुताबिक, यह नीति अपनी अधिसूचना की तिथि से कुल पांच वर्षों की अवधि के लिए पूरे राज्य में प्रभावी और लागू रहेगी। अब कैबिनेट द्वारा इसमें किए गए नए संशोधनों के बाद यह नीति और अधिक व्यावहारिक और आकर्षक हो गई है। उत्तर प्रदेश सरकार के इस नीतिगत सुधार से न केवल घरेलू बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के बड़े चिप डिजाइनरों, फैब्रिकेशन इकाइयों और कंपोनेंट निर्माताओं के राज्य में अपने विनिर्माण प्लांट स्थापित करने का मार्ग पूरी तरह से प्रशस्त हो गया है।
सरकारी खजाने पर नहीं पड़ेगा कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ, रोजगार के सृजन को मिलेगी भारी रफ्तार
कैबिनेट के इस फैसले की सबसे बड़ी और खास बात यह है कि संशोधित नीति के माध्यम से राज्य में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के क्षेत्र में भारी-भरकम पूंजी निवेश आकर्षित होने की पूरी उम्मीद है, जबकि इसके कारण राज्य सरकार के खजाने पर कोई भी अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। सरकार ने वित्तीय संतुलन को बनाए रखते हुए इस नीति को इस प्रकार तैयार किया है कि निवेशकों को मिलने वाली रियायतें और प्रोत्साहन राज्य के आर्थिक विकास की गति को बढ़ाएं। इस उद्योग के विस्तार से उत्तर प्रदेश के तकनीकी रूप से कुशल युवाओं के लिए उच्च स्तर के हजारों नए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
निवेशकों के लिए लागू की गई अनिवार्य शर्त, वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने के बाद तीन साल तक करना होगा संचालन
नीति को अधिक सुरक्षित और जवाबदेह बनाने के लिए संशोधित प्रावधानों के तहत उत्तर प्रदेश सरकार ने निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण और अनिवार्य शर्त भी जोड़ी है। संशोधित नीति के अंतर्गत राज्य में अपनी इकाइयां स्थापित करने वाले सभी निवेशकों और कंपनियों को सरकार को एक औपचारिक वचन पत्र (Undertaking) देना होगा। इस वचन पत्र के अनुसार, कंपनियों के लिए अपने प्लांट में वाणिज्यिक उत्पादन (Commercial Production) शुरू होने की आधिकारिक तिथि से कम से कम तीन वर्षों की अवधि तक विनिर्माण और उत्पादन कार्यों को निरंतर जारी रखना अनिवार्य होगा। इस कड़े कदम से राज्य में स्थापित होने वाले उद्योगों में स्थिरता आएगी और उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास को एक दीर्घकालिक मजबूती मिल सकेगी।
