सीएम योगी आदित्यनाथ की सख्त कार्रवाई इस समय चर्चा में है। समाज कल्याण विभाग में वर्षों पुराने घोटाले में लिप्त अधिकारियों पर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। भ्रष्टाचार के दोषी चार अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है, जबकि तीन सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन में 10 से 50 प्रतिशत तक कटौती करने के आदेश जारी किए गए हैं। जांच में छात्रवृत्ति और पेंशन योजनाओं में करोड़ों रुपये के घोटाले का पर्दाफाश हुआ है।
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति एक बार फिर चर्चा में है। समाज कल्याण विभाग में वर्षों पुराने घोटाले की जांच के बाद सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया, जबकि तीन सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन में 10 से 50 प्रतिशत तक की स्थायी कटौती का आदेश जारी किया है।
दस साल पुराना घोटाला
यह कार्रवाई उस घोटाले से जुड़ी है, जो करीब दस साल पहले छात्रवृत्ति और पेंशन योजनाओं में हुआ था। उस समय लाभार्थियों की सूची से लेकर खातों में राशि के ट्रांसफर तक, हर स्तर पर फर्जीवाड़े का जाल फैला हुआ था। लंबे समय तक फाइलें दबाई जाती रहीं और जांच अधर में लटकी रही, लेकिन अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों पर समाज कल्याण विभाग के पुराने मामलों को फिर से खोला गया। समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण की देखरेख में गठित टीमों ने सभी पुरानी फाइलों की बारीकी से जांच की और गबन की पूरी रकम का लेखा-जोखा तैयार किया। जांच में यह सामने आया कि करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति और पेंशन राशि फर्जी लाभार्थियों के खातों में भेजी गई थी।
बर्खास्त किए गए अधिकारियों में मीना श्रीवास्तव (श्रावस्ती), करुनेश त्रिपाठी (मथुरा), संजय कुमार व्यास (हापुड़) और राजेश कुमार (शाहजहांपुर) शामिल हैं। इन सभी पर गंभीर अनियमितताओं और फर्जीवाड़े के आरोप साबित हुए हैं।
चार अधिकारी, चार कहानियां: भ्रष्टाचार का पूरा नेटवर्क
मीना श्रीवास्तव पर आरोप था कि उन्होंने छात्रवृत्ति लाभार्थियों के आंकड़ों में हेराफेरी की और काल्पनिक नाम जोड़कर लाखों रुपये फर्जी खातों में ट्रांसफर कराए। वहीं करुनेश त्रिपाठी और संजय व्यास ने कथित रूप से ऐसे निजी कॉलेजों को छात्रवृत्ति राशि भेजी जो वास्तव में अस्तित्व में ही नहीं थे। जांच में यह भी सामने आया कि इन कॉलेजों के नाम पर जारी धनराशि का कुछ हिस्सा निजी खातों में डायवर्ट किया गया था। शाहजहांपुर के अधिकारी राजेश कुमार पर पेंशन वितरण प्रणाली में हेराफेरी का आरोप साबित हुआ। उन्होंने लाभार्थियों के बैंक खाते बदलकर फर्जी खातों में पेंशन राशि ट्रांसफर कराई और ऐसे लोगों के नाम पर रकम जारी करवाई जिनका कोई अस्तित्व नहीं था। सरकार ने इसके अलावा तीन रिटायर्ड अधिकारियों – श्री भगवान (औरैया), विनोद शंकर तिवारी (मथुरा) और उमा शंकर शर्मा (मथुरा) पर भी कार्रवाई की है। इनकी पेंशन में 10 से 50 प्रतिशत तक की स्थायी कटौती का आदेश दिया गया है, साथ ही जिन योजनाओं में इनकी भूमिका से सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा, उसकी वसूली की प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है।
जीरो टॉलरेंस नीति फिर चर्चा में: सूत्रों के अनुसार, इस घोटाले में अब तक करोड़ों रुपये की हेराफेरी का अनुमान लगाया गया है, जो आगे और बढ़ सकता है। विभागीय स्तर पर कुछ अन्य अधिकारियों की भूमिका की जांच भी जारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस कदम को प्रशासनिक सख्ती का प्रतीक माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह संदेश स्पष्ट है कि भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और चाहे मामला कितना भी पुराना क्यों न हो, दोषी को सजा अवश्य मिलेगी। मंत्री असीम अरुण ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर पूरी दृढ़ता से काम हो रहा है और आने वाले दिनों में कई पुराने मामलों को फिर से खोला जाएगा।
सरकार ने इस मामले में दोषी पाए गए अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और गबन की गई धनराशि की वसूली के निर्देश भी जारी कर दिए हैं।
