bilaspur train accident: क्या रेड सिग्नल पार करने से हुआ बिलासपुर ट्रेन हादसा? रेलवे ने बताई पूरी सच्चाई

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नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेलवे स्टेशन (bilaspur train accident) के पास सोमवार को हुए दर्दनाक ट्रेन हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया है। एक लोकल पैसेंजर ट्रेन और मालगाड़ी के बीच हुई टक्कर में 11 यात्रियों की जान चली गई जबकि दर्जनों लोग घायल हो गए। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि यह दुर्घटना संभवतः तब हुई जब पैसेंजर ट्रेन ने रेड सिग्नल पार कर लिया। रेलवे बोर्ड ने देर रात इस मामले पर आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि घटना का प्रारंभिक कारण डेमू ट्रेन द्वारा ‘खतरे में सिग्नल’ पार करना प्रतीत होता है। हादसा सोमवार शाम करीब चार बजे बिलासपुर-गतोरा स्टेशन के बीच हुआ, जब कोरबा जिले के गेवरा से बिलासपुर जा रही डीजल इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (DEMU) ट्रेन मालगाड़ी से पीछे से जा टकराई।

हादसे की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि ट्रेन के कई डिब्बे पटरी से उतर गए और यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों और रेलवे कर्मियों ने तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू किया। बिलासपुर रेलवे प्रशासन ने कहा कि घटना की सूचना मिलते ही राहत टीमों को मौके पर भेज दिया गया और घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। रेलवे बोर्ड की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि प्रशासन ने युद्धस्तर पर राहत-बचाव कार्य चलाया है और जिला प्रशासन, एंबुलेंस सेवा तथा चिकित्सा टीमों के साथ समन्वय बनाकर घायलों को हरसंभव सहायता प्रदान की जा रही है। रेलवे ने हादसे में मृतकों के परिजनों के लिए 10 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों के लिए 5 लाख रुपये और मामूली घायलों के लिए 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की है।

bilaspur train हादसे के बाद रेल मंत्री ने स्थिति की लगातार समीक्षा की और अधिकारियों को घटनास्थल पर जाकर राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। इस बीच, रेलवे सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) को मामले की विस्तृत जांच सौंपी गई है ताकि हादसे के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके और भविष्य में ऐसी त्रासदियों से बचाव के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें। सूत्रों के मुताबिक, प्राथमिक जांच में ट्रेन के ड्राइवर द्वारा सिग्नल की अनदेखी की बात सामने आई है, हालांकि तकनीकी खराबी की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ट्रेन की ब्रेकिंग सिस्टम या सिग्नलिंग डिवाइस में कोई गड़बड़ी हुई हो तो उसे जांच में शामिल किया जाना चाहिए। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर के बाद ट्रेन में अफरा-तफरी मच गई थी और कई यात्री खुद ही खिड़कियों को तोड़कर बाहर निकले।

घटनास्थल पर मौजूद राहत दलों ने देर रात तक सर्च ऑपरेशन चलाया और मलबे में फंसे लोगों को निकाला। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों के परिवारों को हेल्पलाइन नंबर जारी कर सहायता की व्यवस्था की है। इस हादसे ने रेलवे सुरक्षा मानकों पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं क्योंकि पिछले कुछ महीनों में कई राज्यों से ट्रेन दुर्घटनाओं की खबरें आई हैं। हालांकि रेलवे का कहना है कि सिग्नल ओवररन के मामलों को रोकने के लिए ऑटोमैटिक ट्रेनों में ट्रेन प्रोटेक्शन एंड वॉर्निंग सिस्टम (TPWS) और कवच तकनीक जैसे उपाय तेजी से लागू किए जा रहे हैं। अधिकारियों का दावा है कि आने वाले समय में ऐसे हादसों की संभावना कम होगी क्योंकि आधुनिक ट्रेन कंट्रोल सिस्टम और ट्रैक सेफ्टी सिस्टम को और मजबूत किया जा रहा है। रेलवे ने यह भी कहा कि इस दुर्घटना से सबक लेते हुए, सभी जोनल प्रमुखों को निर्देश दिए गए हैं कि जहां भी सिग्नलिंग सिस्टम पुराना है, उसकी तुरंत जांच और अपग्रेडेशन की प्रक्रिया शुरू की जाए। फिलहाल बिलासपुर हादसे की जांच जारी है और प्रशासन का कहना है कि दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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