बिहार में छठ के बाद गरमाई सियासत, पीएम मोदी के दौरे से बदला माहौल
छठ महापर्व की समाप्ति के साथ ही बिहार में चुनावी गतिविधियां फिर से पूरे उफान पर हैं। राजधानी पटना से लेकर सुदूर जिलों तक सभी राजनीतिक दल अब प्रचार अभियान में पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में जुट गए हैं। भारतीय जनता पार्टी ने अपने स्टार प्रचारक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मैदान में उतारने की घोषणा कर दी है।
बिहार भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री मोदी 30 अक्टूबर को मुजफ्फरपुर और छपरा में जनसभाओं को संबोधित करेंगे। उनका कहना है कि यह सिलसिला चुनाव तक लगातार जारी रहेगा। इस घोषणा के साथ ही राज्य में सियासी तापमान एक बार फिर चढ़ गया है। मोदी के कार्यक्रमों को लेकर भाजपा संगठन स्तर पर पूरी तैयारी में जुट गया है। जिला से लेकर बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया गया है ताकि प्रधानमंत्री की रैली ऐतिहासिक बन सके।
महागठबंधन ने भी तेज किया प्रचार, घोषणा पत्र हुआ जारी
दूसरी तरफ, महागठबंधन ने भी अपने चुनावी अभियान को नई दिशा देने की कोशिश शुरू कर दी है। आज पटना में गठबंधन की ओर से घोषणा पत्र जारी किया गया जिसमें युवाओं, किसानों और रोजगार पर विशेष जोर दिया गया है। तेजस्वी यादव ने कहा कि उनकी सरकार आने पर हर घर को रोजगार देने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने भाषण में भाजपा पर तीखे हमले किए। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता ने झूठे वादों से तंग आ चुकी है और अब बदलाव चाहती है। हालांकि भाजपा ने इन बयानों को राजनीतिक नौटंकी करार दिया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कहा कि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने एसआईआर अभियान के दौरान अपने नाम के साथ ‘जननायक’ शब्द जोड़ने का प्रयास किया, जबकि असली जननायक केवल कर्पूरी ठाकुर और जयप्रकाश नारायण जैसे लोग थे जिन्होंने जनता के लिए संघर्ष किया।
पीएम मोदी की रैली से बीजेपी को मिलने की उम्मीद नई ऊर्जा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की जनसभाओं से भाजपा को न केवल संगठनात्मक मजबूती मिलेगी बल्कि वोटरों के बीच नया उत्साह भी पैदा होगा। पिछले कुछ महीनों से बिहार में भाजपा लगातार अपने जनाधार को मजबूत करने में लगी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता राज्य के विभिन्न जिलों में लगातार दौरे कर रहे हैं।
मुजफ्फरपुर और छपरा दोनों ही ऐसे क्षेत्र हैं जहां भाजपा का परंपरागत प्रभाव माना जाता है। पार्टी का इरादा है कि मोदी की रैलियों के माध्यम से इन इलाकों में अपने मतदाताओं को एकजुट किया जाए। साथ ही, विकास और सुशासन के मुद्दों पर जनता को दोबारा विश्वास दिलाया जाए। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के मुताबिक, मोदी की उपस्थिति विपक्ष के लिए चुनौती साबित हो सकती है क्योंकि उनका जनसंपर्क अभियान सीधे जनता की भावनाओं को छूता है।

छठ के बाद चुनावी रंग में रंगा बिहार, जनता के मूड पर सबकी निगाहें
छठ पूजा ने जहां बिहार को एकता और भक्ति के रंग में रंग दिया, वहीं अब यही भीड़ चुनावी रैलियों में उमड़ने को तैयार है। बिहार के गांवों, कस्बों और शहरों में इस समय हर गली-मोहल्ले में चुनावी चर्चा जोरों पर है। भाजपा और महागठबंधन दोनों जनता से सीधा संपर्क साधने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
जहां भाजपा केंद्र की योजनाओं और प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता को भुनाने की कोशिश में है, वहीं महागठबंधन बेरोजगारी, महंगाई और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को सामने रखकर जनता को साधने की कोशिश कर रहा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि बिहार की जनता किसके पक्ष में जनादेश देती है।
30 अक्टूबर को प्रधानमंत्री मोदी की रैलियां इस चुनावी संग्राम में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती हैं। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि यह दिन बिहार के आगामी चुनावी समीकरण को बदलने की क्षमता रखता है। सभी की निगाहें अब मुजफ्फरपुर और छपरा की रैलियों पर टिकी हैं, जहां से चुनावी अभियान की नई दिशा तय होगी।







