Bhojshala Dispute पर बड़ा फैसला, हाई कोर्ट ने भोजशाला को माना मां वाग्देवी का मंदिर
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के Dhar स्थित ऐतिहासिक भोजशाला विवाद मामले में बड़ा फैसला सामने आया है। Indore High Court ने शुक्रवार, 15 मई को अपने महत्वपूर्ण फैसले में भोजशाला को मां वाग्देवी का मंदिर माना है। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब सबसे ज्यादा चर्चा उस ऐतिहासिक प्रतिमा की हो रही है, जिसकी पूजा को लेकर वर्षों से मांग उठती रही है। मां वाग्देवी की वह प्रतिमा फिलहाल लंदन में मौजूद है और अब उसे भारत वापस लाने की मांग तेज हो गई है।
कोर्ट ने सरकार को दिए प्रतिमा वापसी के निर्देश
Indore High Court ने अपने फैसले में केंद्र सरकार को निर्देश दिए हैं कि लंदन में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा को भारत वापस लाने के लिए प्रयास किए जाएं।फैसले के बाद Mohan Yadav ने भी कहा कि राज्य सरकार केंद्र सरकार के साथ मिलकर कोर्ट के निर्देशों पर काम करेगी। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए इस फैसले को भारत की सांस्कृतिक विरासत और आस्था के सम्मान की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।
माननीय उच्च न्यायालय द्वारा धार की ऐतिहासिक भोजशाला को संरक्षित स्मारक एवं मां वाग्देवी की आराधना स्थली मानते हुए दिया गया निर्णय हमारी सांस्कृतिक विरासत, आस्था और इतिहास के सम्मान का महत्वपूर्ण क्षण है।
ASI के संरक्षण एवं प्रबंधन में भोजशाला की गरिमा और अधिक सुदृढ़ होगी तथा…
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) May 15, 2026
कैसे बनी भोजशाला विवाद का केंद्र?
Bhojshala का इतिहास राजा भोज के शासनकाल से जुड़ा माना जाता है। माना जाता है कि राजा भोज ने 11वीं शताब्दी में इस ऐतिहासिक स्थल का निर्माण कराया था। हिंदू पक्ष भोजशाला को मां सरस्वती यानी मां वाग्देवी का मंदिर और प्राचीन शिक्षा केंद्र मानता है। वहीं मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता रहा है। जैन समुदाय के कुछ लोग इसे मध्यकालीन जैन मंदिर और गुरुकुल मानते हैं। लंबे समय से यह मामला धार्मिक और ऐतिहासिक विवाद का विषय बना हुआ था।
लंदन कैसे पहुंची मां वाग्देवी की प्रतिमा?
रिपोर्ट्स के अनुसार साल 1875 में अंग्रेज अधिकारियों ने भोजशाला परिसर में खुदाई के दौरान मां वाग्देवी की प्रतिमा निकाली थी। बताया जाता है कि अंग्रेज अधिकारी मेजर किनकेड इस प्रतिमा को अपने साथ इंग्लैंड ले गए थे। तब से यह प्रतिमा लंदन के एक म्यूजियम में संरक्षित रखी गई है। अब हाई कोर्ट के फैसले के बाद इस ऐतिहासिक प्रतिमा की वापसी को लेकर नई उम्मीदें पैदा हो गई हैं।
क्या अब भारत लौट सकती है प्रतिमा?
कोर्ट के फैसले के बाद प्रतिमा की वापसी को लेकर कानूनी और कूटनीतिक प्रयास तेज हो सकते हैं। हाल के वर्षों में भारत कई ऐतिहासिक और धार्मिक मूर्तियों को विदेशों से वापस लाने में सफल रहा है। ऐसे में मां वाग्देवी की प्रतिमा की वापसी को लेकर भी उम्मीद बढ़ गई है। हालांकि यह प्रक्रिया आसान नहीं मानी जा रही, क्योंकि इसके लिए अंतरराष्ट्रीय कानून, कूटनीतिक वार्ता और संग्रहालयों से जुड़ी प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।
Mohan Yadav ने फैसले का किया स्वागत
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि हाई कोर्ट का यह निर्णय प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर और श्रद्धा के सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI के संरक्षण में भोजशाला की गरिमा और मजबूत होगी। साथ ही श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना का अधिकार सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कोर्ट के आदेशों के प्रभावी क्रियान्वयन में पूरा सहयोग करेगी।
सांस्कृतिक विरासत और सौहार्द पर जोर
मुख्यमंत्री ने अपने बयान में सामाजिक सौहार्द और सर्वधर्म समभाव की बात भी कही। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति हमेशा भाईचारे और सामाजिक सद्भाव की प्रतीक रही है। उन्होंने लोगों से शांति और आपसी सम्मान बनाए रखने की अपील भी की।







