नई दिल्ली। दुनिया भर के मौसम वैज्ञानिकों और जलवायु विशेषज्ञों के बीच इस समय एक नई चेतावनी तेजी से चर्चा का विषय बनी हुई है। शुरुआती संकेत बता रहे हैं कि प्रशांत महासागर में बनने वाला अल नीनो (El Nino) आने वाले महीनों में बेहद खतरनाक रूप ले सकता है। वैज्ञानिकों को आशंका है कि यह अब तक के सबसे शक्तिशाली अल नीनो घटनाक्रमों में शामिल हो सकता है।
यदि ऐसा होता है तो दुनिया को रिकॉर्ड तोड़ गर्मी, भीषण लू, कमजोर मानसून, सूखा और कई जलवायु संबंधी आपदाओं का सामना करना पड़ सकता है। भारत समेत कई देशों में इसका सीधा असर खेती, पानी और आम लोगों की जिंदगी पर दिखाई दे सकता है।
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2026 के अंत तक और खतरनाक हो सकता है El Nino Alert
अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA और ऑस्ट्रेलिया के मौसम विभाग लगातार प्रशांत महासागर की निगरानी कर रहे हैं। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से तेजी से बढ़ रहा है।
रिपोर्टों के मुताबिक मई महीने में प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से लगभग 0.5 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह गर्मी आने वाले महीनों में और तेज हो सकती है।
पहले जहां अल नीनो बनने की संभावना 61 प्रतिशत मानी जा रही थी, वहीं अब यह बढ़कर 82 प्रतिशत तक पहुंच गई है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह ट्रेंड जारी रहा तो 2026 के आखिर तक दुनिया को “सुपर अल नीनो” जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
भारत में बढ़ सकता है सूखा और भीषण गर्मी का खतरा
भारतीय मौसम विभाग के प्रमुख मृत्युंजय महापात्र ने संकेत दिए हैं कि अल नीनो का असर भारत के मानसून पर पड़ सकता है। मानसून कमजोर होने की स्थिति में देश के कई हिस्सों में सूखा और जल संकट बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार तापमान में बढ़ोतरी सामान्य चक्र से कहीं ज्यादा तेज गति से हो रही है। प्रशांत महासागर हाल ही में ठंडी ला नीना स्थिति से बाहर निकला है और कम समय में तेजी से गर्म हो रहा है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इतनी तेजी से होने वाला बदलाव हर साल नहीं देखा जाता। यही कारण है कि इसे संभावित बड़े जलवायु संकट का शुरुआती संकेत माना जा रहा है।
क्या होता है सुपर El Nino Alert?
अल नीनो को मापने के लिए वैज्ञानिक नीनो 3.4 इंडेक्स का इस्तेमाल करते हैं। यह प्रशांत महासागर का एक खास क्षेत्र होता है जहां समुद्र की सतह के तापमान में बदलाव पर नजर रखी जाती है।
जब समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 1.5°C या उससे ज्यादा बढ़ जाता है, तब उसे मजबूत या “सुपर अल नीनो” माना जाता है।
Tanomaly>1.5∘CT_{anomaly} > 1.5^{\circ}C
कुछ मौजूदा पूर्वानुमानों के अनुसार इस साल के अंत तक तापमान 2°C से 2.5°C तक बढ़ सकता है। अगर ऐसा हुआ तो यह इतिहास के सबसे शक्तिशाली अल नीनो में से एक साबित हो सकता है।
पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ सकता है असर
एक मजबूत अल नीनो केवल प्रशांत महासागर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है। आमतौर पर इसके कारण वैश्विक तापमान में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिलती है।
दक्षिण अमेरिका के कई हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है, जबकि एशिया और अफ्रीका के कुछ क्षेत्रों में सूखे की स्थिति गंभीर हो सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक सबसे ज्यादा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ता है। जहां बारिश कम होती है वहां फसलें खराब हो सकती हैं, जबकि अधिक बारिश वाले इलाकों में बाढ़ खेती को नुकसान पहुंचा सकती है।
खाद्य संकट और महंगाई बढ़ने की आशंका
जलवायु विशेषज्ञों का कहना है कि अल नीनो का असर केवल मौसम तक सीमित नहीं रहता। इसका सीधा प्रभाव खाद्य सुरक्षा, पानी की उपलब्धता, परिवहन और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
यदि कई देशों में फसलों की पैदावार कम हुई तो वैश्विक बाजार में खाद्यान्न की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और विकासशील देशों पर पड़ने की आशंका है।
विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि आने वाले महीनों में दुनिया को जलवायु परिवर्तन से जुड़ी नई चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा।
वैज्ञानिक लगातार रख रहे हैं नजर
फिलहाल वैज्ञानिक स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। मौसम एजेंसियां समुद्र के तापमान, हवा के दबाव और मानसून पैटर्न का विश्लेषण कर रही हैं।
हालांकि अभी अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा, लेकिन शुरुआती संकेतों ने दुनिया भर की सरकारों और पर्यावरण विशेषज्ञों की चिंता जरूर बढ़ा दी है।







