S Jaishankar ने किंग्स्टन, जमैका में वेस्ट इंडीज यूनिवर्सिटी को संबोधित करते हुए कहा कि “बहुत ही अनिश्चित और अप्रत्याशित” समय में भी भारत कुल वैश्विक आर्थिक विकास में एक बहुत ही महत्वपूर्ण योगदानकर्ता के रूप में उभरा है। विदेश मंत्री S Jaishankar ने मौजूदा दौर की वैश्विक उथल-पुथल और अस्थिरता पर चिंता जताई, लेकिन साथ ही भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत और वैश्विक स्तर पर इसकी स्वीकार्यता को रेखांकित किया।
वैश्विक विकास में भारत की 17 प्रतिशत हिस्सेदारी
विदेश मंत्री S Jaishankar ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दुनिया के सामने रखते हुए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के आंकड़ों का हवाला दिया। उन्होंने बताया:
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आईएमएफ का अनुमान: मौजूदा साल में, दुनिया के कुल आर्थिक विकास में भारत की हिस्सेदारी 17 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
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दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता: इन आंकड़ों के आधार पर, भारत वैश्विक आर्थिक वृद्धि में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता बन गया है।
GCC (ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर) का नेतृत्व
S Jaishankar ने बताया कि राजनीति की वास्तविकता लोगों की आवाजाही के प्रति संवेदनशील होती है। ऐसे में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) एक बड़ा समाधान बनकर उभरे हैं।
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भारत आज GCC अर्थव्यवस्था के लीडर के रूप में स्थापित हो चुका है।
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इस समय देश में लगभग 1,800 GCC काम कर रहे हैं।
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इनका सालाना निर्यात लगभग 70 अरब डॉलर के करीब है और यह बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है।
राष्ट्रीय हित और वैश्विक भलाई का संतुलन
S Jaishankar ने बदलते हुए वैश्विक परिदृश्य पर बात करते हुए कहा कि दुर्भाग्य से दुनिया कुछ हद तक आत्म-केंद्रित हो रही है और देश केवल अपने बारे में सोचने लगे हैं। इस चुनौतीपूर्ण समय में भारत ने एक नई मिसाल पेश की है:
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वसुधैव कुटुंबकम का भाव: भारत दुनिया को दिखा रहा है कि राष्ट्रीय हित और वैश्विक भलाई एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं।
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सकारात्मक योगदान: भारत अपने हितों की रक्षा करते हुए भी वैश्विक कल्याण में निरंतर योगदान दे रहा है।
कैरिबियाई देशों के साथ रणनीतिक संबंध
S Jaishankar का किंग्स्टन दौरा उनके नौ-दिवसीय दौरे का पहला पड़ाव है, जिसमें वे जमैका, सूरीनाम और त्रिनिदाद और टोबैगो का दौरा कर रहे हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य कैरिबियाई देशों के साथ भारत के रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक मज़बूत करना है।
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