Unnao: महिला हेल्प डेस्क की पहल से 16 जोड़ों में फिर जुड़ा भरोसे का रिश्ता

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उन्नाव जिले में पुलिस की पहल ने फिर एक मिसाल कायम की है। महिला हेल्प डेस्क के प्रयासों से 16 विवादित पति-पत्नी के जोड़ों ने अपने पुराने मतभेद भुलाकर एक साथ रहने का फैसला किया है। पुलिस अधीक्षक जय प्रकाश सिंह के कुशल निर्देशन में चलाए जा रहे इस विशेष अभियान ने कई बिखरते परिवारों को टूटने से बचा लिया।

पुलिस की इस संवेदनशील पहल के तहत जिले के सभी थानों में स्थित महिला हेल्प डेस्क पर उन दंपतियों को बुलाया गया, जिनके बीच लंबे समय से विवाद चल रहे थे। परिवार परामर्शदाताओं और महिला हेल्प डेस्क की टीम ने प्रत्येक जोड़े की गहन काउंसलिंग की। बातचीत, समझाइश और आपसी विश्वास के माध्यम से उन्हें फिर से एकजुट करने का प्रयास किया गया।

इन काउंसलिंग सत्रों का परिणाम बेहद सकारात्मक रहा। कई जोड़ों ने खुलकर अपनी बातें साझा कीं और आपसी मतभेदों को सुलझाने पर सहमति जताई। इस प्रयास से न केवल पति-पत्नी के बीच के रिश्ते सुधरे, बल्कि उनके बच्चों और परिवारों में भी खुशी का माहौल लौट आया।

महिला थाना से 6 जोड़े, थाना अचलगंज, थाना कोतवाली सदर की मगरवारा चौकी से 2-2 जोड़े, थाना फतेहपुर चौरासी से 2 जोड़े तथा थाना दही, हसनगंज, गंगाघाट और बांगरमऊ से 1-1 जोड़े को आपसी सहमति के साथ विदा किया गया। सभी जोड़ों ने बिना किसी विवाद के एक साथ रहने का वादा किया।

इस अभियान में परिवार परामर्श समिति के प्रभारी डॉ. आशीष श्रीवास्तव का विशेष योगदान रहा। उनके मार्गदर्शन में टीम ने हर जोड़े को भावनात्मक रूप से समझा और एक-दूसरे के दृष्टिकोण से स्थिति को देखने के लिए प्रेरित किया।

पुलिस टीम में प्रभारी निरीक्षक महिला थाना रेखा सिंह, उपनिरीक्षक अरविंद पांडेय (मगरवारा चौकी, सदर कोतवाली), महिला हेड कांस्टेबल रीता सिंह चौहान, महिला कांस्टेबल पूजा यादव, पूजा चौधरी, पूनम शाक्य, सोनम, लक्ष्मी वर्मा, दुर्गेश और अर्चना शामिल रहीं।

इन अधिकारियों की मेहनत और संवेदनशील काउंसलिंग की वजह से 16 घरों में फिर से खुशियों की वापसी हुई है। पुलिस अधीक्षक जय प्रकाश सिंह ने टीम को इस सराहनीय कार्य के लिए बधाई दी और कहा कि —

“महिला हेल्प डेस्क केवल शिकायतों का निस्तारण नहीं करती, बल्कि रिश्तों को जोड़ने का भी कार्य करती है। समाज में शांति और सौहार्द बनाए रखने में ऐसे प्रयास महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”

यह पहल पुलिस के मानवीय चेहरे को सामने लाती है और यह संदेश देती है कि कानून के साथ-साथ संवेदनशील संवाद भी समाज सुधार का सशक्त माध्यम हो सकता है।

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